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दीपदान से आलोकित हुई सरयू तट
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देव दीपावली पर दीयों से लिखा जय श्रीराम।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को देव दीपावली का पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास पूर्वक मनाया गया। सरयू तट पर मां सरयू की 251 बत्ती की महाआरती हुई।
इसके बाद भक्तों ने सरयू में दीपदान भी किया। दीपदान से संपूर्ण सरयू तट आलोकित हो उठा। सरयू मैया की जय, जय श्रीराम के जयकारे भी इस दौरान गूंजते रहे। अयोध्या राममंदिर मामले में अदालत से आए सुप्रीम फैसले से उत्साहित लोगों ने देव दीपावली पर भी अपने-अपने घरों, दुकानों में रोशनी कर खुशी का इजहार किया।
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर देवदीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। देवदीपावली के पीछे कई किवंदतियां प्रचलित हैं। एक कथा यह भी है कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी जिसे वैकुंठ चतुर्दशी भी कहा जाता है की तिथि पर देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल नरेश राजा बलि के बंधन से मुक्त कराया था।
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इसके बाद दोनों साथ-साथ बैकुंठ पधारे थे। इसके उपलक्ष्य में देवताओं ने दीपावली मनाई और दीपमालाओं की श्रृंखला से अपना उल्लास व्यक्त किया। इस पुण्य पर्व के अवसर पर मंगलवार को सरयू नदी के घाटों से लेकर मठ-मंदिरों में दीपमालाएं सजाई गईं।
इसके साथ ही देवी मां की नित्य आरती के क्रम में मां सरयू की भव्य महाआरती भी की गई। इस दौरान भक्तों के जयघोष से सरयू तट गुंजायमान होता रहा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन नजर आए। दंतधावन कुंड पर साधु-संतों एवं भक्तों ने दीप जलाकर खुशी मनाई एवं दीपदान किया।
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इसके बाद भक्तों ने सरयू में दीपदान भी किया। दीपदान से संपूर्ण सरयू तट आलोकित हो उठा। सरयू मैया की जय, जय श्रीराम के जयकारे भी इस दौरान गूंजते रहे। अयोध्या राममंदिर मामले में अदालत से आए सुप्रीम फैसले से उत्साहित लोगों ने देव दीपावली पर भी अपने-अपने घरों, दुकानों में रोशनी कर खुशी का इजहार किया।
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कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर देवदीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। देवदीपावली के पीछे कई किवंदतियां प्रचलित हैं। एक कथा यह भी है कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी जिसे वैकुंठ चतुर्दशी भी कहा जाता है की तिथि पर देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल नरेश राजा बलि के बंधन से मुक्त कराया था।
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इसके बाद दोनों साथ-साथ बैकुंठ पधारे थे। इसके उपलक्ष्य में देवताओं ने दीपावली मनाई और दीपमालाओं की श्रृंखला से अपना उल्लास व्यक्त किया। इस पुण्य पर्व के अवसर पर मंगलवार को सरयू नदी के घाटों से लेकर मठ-मंदिरों में दीपमालाएं सजाई गईं।
इसके साथ ही देवी मां की नित्य आरती के क्रम में मां सरयू की भव्य महाआरती भी की गई। इस दौरान भक्तों के जयघोष से सरयू तट गुंजायमान होता रहा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन नजर आए। दंतधावन कुंड पर साधु-संतों एवं भक्तों ने दीप जलाकर खुशी मनाई एवं दीपदान किया।