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Ayodhya News: चार लाख पशुओं को गला घोंटू का खतरा
Fri, 26 May 2023 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 26 May 2023 12:32 AM IST
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गोंडा। पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने वाले गला घोंटू बीमारी से बचाव के लिए टीका प्रयाप्त नहीं है। जिले के करीब चार लाख पशुओं को बीमारी से बचाना है लेकिन पशु चिकित्सा विभाग को सिर्फ 67000 डोज वैक्सीन ही मिली है। ऐसे में इनती बड़ी संख्या में पशुओं को इस संक्रमण से बचाने की बड़ी चुनौती है।
पशुपालक भी पशुओं को गलाघोंटू का टीका न लग पाने के कारण चिंतित हैं। पशुओं कई प्रकार की संक्रामक बीमारी भी होती है जो मौसम के हिसाब से फैलती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि मई से अक्तूबर तक का माह पशुओं के लिए काफी संवेदनशील होता है। इसमें उन्हें बुखार सहित कई प्रकार की बीमारी होती है। इसमें गलाघोंटू बहुत ही खतरनाक है। गलाघोंटू बीमारी से पशुओं का बचा पाना काफी मुश्किल होता है। अगर समय से टीकाकरण हुआ करे तो इस बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। वहीं, जिले में टीके की स्थिति ठीक नहीं है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र व गोशालाओं में लगेगा टीका
- टीके की कम आमद की वजह से पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण शुरू किया जाएगा। उसके बाद गोशालाओं में निवास कर रहे पशुओं को वैक्सीन की डोज दी जाएगी। टीकाकरण 15 मई से ही शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक अधिकांश क्षेत्र में वैक्सीन लगने की शुरुआत नहीं हो सकी। जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ रही है।
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पशुपालकों की बढ़ी चिंता
- इटियाथोक के पशुपालक रामसुमेर वर्मा, राजितराम यादव व मंगरे यादव ने बताया कि उनके परिवार के भरण पोषण पशुपालन पर ही निर्भर है। अगर पशु बीमार हो जाते हैं तो बड़ी समस्या हो जाती है। इंसान से अधिक कीमत की दवा इन्हें लगती है। ऐसे में पशुपालक टूट जाता है। पिछले कई सालों से देखा जा रहा है कि यदि पशु को गला घोंटू हो गया तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता है।
वर्जन -
- गला घोंटू से बचाव के लिए टीका लगना शुरू हो गया है। अभी तक मात्र 67 हजार डोज वैक्सीन मिली है, जिससे पहले चरण में गोशाला में संरक्षित पशुओं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पशुओं को टीका लगाया जाएगा।
- डॉ. ठाकुर जी पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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पशुपालक भी पशुओं को गलाघोंटू का टीका न लग पाने के कारण चिंतित हैं। पशुओं कई प्रकार की संक्रामक बीमारी भी होती है जो मौसम के हिसाब से फैलती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि मई से अक्तूबर तक का माह पशुओं के लिए काफी संवेदनशील होता है। इसमें उन्हें बुखार सहित कई प्रकार की बीमारी होती है। इसमें गलाघोंटू बहुत ही खतरनाक है। गलाघोंटू बीमारी से पशुओं का बचा पाना काफी मुश्किल होता है। अगर समय से टीकाकरण हुआ करे तो इस बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। वहीं, जिले में टीके की स्थिति ठीक नहीं है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र व गोशालाओं में लगेगा टीका
- टीके की कम आमद की वजह से पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण शुरू किया जाएगा। उसके बाद गोशालाओं में निवास कर रहे पशुओं को वैक्सीन की डोज दी जाएगी। टीकाकरण 15 मई से ही शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक अधिकांश क्षेत्र में वैक्सीन लगने की शुरुआत नहीं हो सकी। जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ रही है।
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पशुपालकों की बढ़ी चिंता
- इटियाथोक के पशुपालक रामसुमेर वर्मा, राजितराम यादव व मंगरे यादव ने बताया कि उनके परिवार के भरण पोषण पशुपालन पर ही निर्भर है। अगर पशु बीमार हो जाते हैं तो बड़ी समस्या हो जाती है। इंसान से अधिक कीमत की दवा इन्हें लगती है। ऐसे में पशुपालक टूट जाता है। पिछले कई सालों से देखा जा रहा है कि यदि पशु को गला घोंटू हो गया तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता है।
वर्जन -
- गला घोंटू से बचाव के लिए टीका लगना शुरू हो गया है। अभी तक मात्र 67 हजार डोज वैक्सीन मिली है, जिससे पहले चरण में गोशाला में संरक्षित पशुओं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पशुओं को टीका लगाया जाएगा।
- डॉ. ठाकुर जी पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी