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भाजपा विधायक को बचाने में झूठे साक्ष्य गढ़ रही पुलिस

Tue, 08 Jan 2019 02:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jan 2019 02:02 AM IST
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भाजपा विधायक को बचाने में झूठे साक्ष्य गढ़ रही पुलिस
सीजेएम ने कैंट एसओ को केस डायरी के साथ 10 को किया तलब
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अयोध्या। ठेकेदार अजय प्रताप उर्फ सोनू सिंह हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। मामले के वादी व मृतक के पिता ने कोर्ट में मॉनिटरिंग ऑफ इन्वेस्टिगेशन की अर्जी दाखिल कर मामले की मॉनिटरिंग करने की याचना की है।

आरोप लगाया है कि भाजपा विधायक खब्बू तिवारी को बचाने के लिए पुलिस झूठे साक्ष्य गढ़ रही है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचक कैंट थाना प्रभारी को केस डायरी के साथ 10 जनवरी को तलब किया है।
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फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन सिंह ने बताया कि ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के ठेकेदार अमित प्रताप सिंह उर्फ सोनू सिंह की 22 दिसंबर को हत्या हो गई थी। यह हत्या उनके आवास कौशलपुरी स्थित फेज टू में हुई थी।
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इसकी रिपोर्ट मृतक के पिता राजकुमार सिंह ने गोसाईगंज विधानसभा के विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू के खिलाफ नामजद हत्या की धारा में कैंट थाने में लिखाई थी।

राजकुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी वरुण मोहित निगम की अदालत में मॉनिटरिंग की अर्जी दाखिल करके कहा है कि उन्होंने सत्ताधारी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू के खिलाफ अजय प्रताप सिंह उर्फ सोनू की हत्या के संबंध में एफआईआर दर्ज कराई है।

उनका पुत्र ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत ठेकेदारी का काम करता था। विधायक द्वारा गुंडा टैक्स वसूली का प्रयास किया जा रहा था। 10 दिसंबर 2018 को पिपरी टोल प्लाजा पर विधायक ने उनके पुत्र को रोककर गुंडा टैक्स मांगा था।

न देने पर कहा गया था कि आजकल बहुत उड़ रहे हो दो-चार दिन में तुम्हारी उड़ान बंद हो जाएगी। इसकी सूचना उनके पुत्र ने पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों को दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उनके पुत्र की 22 दिसंबर 2018 को हत्या कर दी गई।

पुलिस पहले तो एफआईआर दर्ज करने में ही टालमटोल कर रही थी। काफी दबाव के बाद एफआईआर दर्ज हुई। कोर्ट को बताया गया है कि घटनास्थल का निरीक्षण करते समय बिस्तर के नीचे से बरामद रिवॉल्वर, कारतूस व खोखा मिलने की बात कही गई।

निरीक्षण की वीडियोग्राफी भी हुई लेकिन उसकी प्रति उसको नहीं मुहैया कराई गई। मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस उसके पुत्र की हत्या को कोई और रंग देने का प्रयास कर रही है।

जिससे क्षुब्ध होकर उसने इसकी जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री समेत अन्य लोगों से की है। विवेचक व पुलिस अधिकारी विधायक को बचाने के लिए शासन के दबाव में झूठे साक्ष्य गढ रहे हैं।

झूठी बातें इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में प्रचार की जा रही है। इसके मद्देनजर उन्होंने मामले की विवेचना कोर्ट से करने की याचना की है। इस पर कोर्ट ने मामले की सीडी और विवेचक को 10 तारीख को तलब किया है।

कैंट थाना प्रभारी आरके राना ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन होगा। ठेकेदार हत्याकांड में मृतक की साली महिमा सिंह निवासी ग्राम तारुन, थाना तारुन ने कोर्ट में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ इस्तगासा दायर किया है।

इसमें कोर्ट ने परिवादी के बयान के लिए 31 जनवरी की तिथि नियत की है। परिवाद में पुलिसकर्मियों पर पूरे परिवार को प्रताड़ित करके झूठा बयान देने का आरोप लगाया गया है।

मृतक की साली ने दायर इस्तगासा में सीओ सिटी धनंजय कुशवाहा, सर्विलांस प्रभारी अभिषेक सिंह ,महिला थाना अध्यक्ष प्रियंका पांडे, मामले के विवेचक राम किशन राणा के खिलाफ आरोप लगाया है कि पुलिस पूरी तरीके से सत्ताधारी विधायक के प्रभाव में है।

23 दिसंबर 2018 को 12 से 1 बजे के बीच दिन में तारुन थाने की पुलिस उनके घर आई। उनकी बड़ी बहन केतकी सिंह, भाई आरेंद्र सिंह व उत्तम सिंह को थाने चलने को कहा। सभी लोग अपने साधन से थाना तारुन पहुंचे।

वहां रात 8:30 बजे एसओ कैंट राम किशन राणा, दो महिला कांस्टेबल अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे और काफी गाली गलौज की। जबरदस्ती पुलिस गाड़ी में लाद लिया।

इसके बाद महिला थाने लाया गया, जहां महिला थानाध्यक्ष प्रियंका पांडेय, थाना कैंट प्रभारी, सीओ सिटी ने प्रार्थिनी व उसकी बहन के प्रति अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए चारित्रिक लांछन लगाया।


अवैध संबंध की फर्जी कहानी गढ़कर उसके बहनोई की आत्महत्या की बात कही गई। यह बयान देने के लिए उसे काफी प्रताड़ित किया गया। यह प्रताड़ना तीन दिन तक चली।

जिससे वह बेहोश तक हो गई। उन लोगों से सादे कागजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। कुछ बातें जबरदस्ती बुलवाकर वीडियो रिकॉर्डिंग की गई जो पुलिस की जुर्म और ज्यादती की गवाह है। मामले में महिमा सिंह ने इन पुलिस कर्मियों को तलब करके दंडित करने की याचना की है।
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