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मासूम छात्र की जुबानी अपहरण की कहानी:

Sat, 21 Apr 2018 12:48 AM IST
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:48 AM IST
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मासूम छात्र की जुबानी अपहरण की कहानी:
मम्मी की तबियत खराब बताकर उठा ले गए थे चाचा
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फैजाबाद। मैं रोज वैन से एमआरडी इंटरनेशन स्कूल आशापुर जाता था। सोमवार को सुबह 7:30 बजे साथियों के साथ स्कूल जा रहा था। स्कूल के पहले ही चाचा अनिल ने वैन रोकवाई, कहा कि तुम्हारी मां की तबियत खराब है, चलो..। मैं बस्ता लेकर उतरा और बाइक पर बैठ गया, पीछे चाचा के साथ वाले बैठे। मुझे दुबौलिया बस्ती ले गए। फिर वहां से बस पर बैठाकर लखनऊ लाए। रास्ते में मैने लंच बॉक्स भी खाया। मुझे बिस्कुट भी दिए। फिर दिल्ली वाली बस में तीनों लोग बैठे। वहां से बहादुरगढ़ (हरियाणा) लाए। मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरा अपहरण हुआ है, और फुफा-बुआ समेत मम्मी-पापा को मेरे जाने का पता नहीं है। वहां चाचा खाने के साथ बिस्कुट व आइसक्रीम देते थे, मैं खेलता था। मगर जब पापा से बात करने को कहता था तो नहीं कराते थे। मम्मी से भी नहीं मिलवाए तो डर लगने लगा था।

यह बातें कक्षा चार के छात्र मासूम दीपांशु ने अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद शुक्रवार को कही। उसका सोमवार (17 अप्रैल 2018) को अयोध्या कोतवाली के दर्शननगर चौकी अंतर्गत एक निजी स्कूल के पास से अपहरण कर लिया गया था। उसके घर व पड़ोसी घर के बीच सालों से खूनी दुश्मनी से अंजान मासूम अपहरणकर्ता चाचा को पहचानता था। जबकि घर वाले कलेजे के टुकड़े को दुश्मनी की वजह से कोई टारगेट न करे, इसलिए फैजाबाद में अयोध्या कोतवाली में स्कूल के पास भीखापुर में बुआ के घर रखकर पढ़ाते थे। मगर क्या पता कि यहां भी उसके जान पर आ जाएगी। मासूम दीपांशु ने बताया कि उसे पापा व फूफा के घर के सभी लोगों का मोबाइल नंबर याद था, वह बार-बार पापा को फोन करने के लिए कह रहा था लेकिन अनिल चाचा व विनोद अंकल बात नहीं कराते थे। कहा कि मुझे नहीं पता था कि मां की तबियत खराब होने की बात कहकर अपहरण कर रहे हैं। पता होता तो बाइक पर बैठाकर जब हरैया (बस्ती) पहुंचे, तभी दौड़कर लोगों को बता देता। बताया कि बृहस्पतिवार को पुलिस अंकल आए और उसे व चाचा को लेकर लखनऊ आए। यहां आने पर पापा से मिला तो पता चला कि मेरा अपहरण हुआ था, सब लोग रो रहे थे। मासूम के पिता दिनेश चौधरी ने बताया कि गुरुवार शाम जब पुलिस द्वारा उन्हें फोन पर उनके बच्चे के मिलने की बात बताई, तो उनके मुंह से निकला कि क्या वो जिंदा है, जब पुलिस ने हां कहा तो उनके आंखों में खुशी के आंसू निकल आए। उन्होंने फैजाबाद पुलिस का तहे दिल से आभार जताया।
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