{"_id":"5a8f0d494f1c1b462c8b9800","slug":"191519324489-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहे तोसे सजना ये तोरी सजनियां’","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कहे तोसे सजना ये तोरी सजनियां’
Updated Fri, 23 Feb 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘कहे तोसे सजना ये तोरी सजनिया...’
फैजाबाद। साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज महाविद्यालय के सांस्कृतिक परिषद की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध लोक गायिका वंदना मिश्र ने उपस्थित श्रोताआें को अपनी शानदार प्रस्तुति से लोक संगीत से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का आरंभ ‘कहे तोसे सजना ये तोरी सजनियां...’ लोकगीत से हुआ। लेकिन जैसे ही उन्होंने ‘हे गंगा मैया तुहै पियरी चढै़बे...’ को प्रस्तुत किया, उपस्थित श्रोता झूम उठे। वंदना ने अवधी लोकगीत ‘आंखों जैसी आंख नहीं है, हे सईयां चश्मा लगा ला...’ को एक नया मकाम दिलाने में सत्यापित कर दिया। इस पूरे कार्यक्रम में सर्वाधिक महत्वपूर्ण आकर्षण महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के द्वारा प्रस्तुत राजस्थान का घूमर नृत्य रहा। इन छात्र-छात्राओं ने बरसाने में होने वाली होली नृत्य नाटिका को भी प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के अवैतनिक सचिव दीपकृष्ण वर्मा ने अपनी गायकी से उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने ‘जरा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कि कहीं ये वो तो नहीं...’ को जैसे ही पूरा किया, श्रोताओं द्वारा एक बार फिर की मांग होने लगी। अवैतनिक सचिव ने राम यमन कल्याण में रचित गीत ‘अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं...’ ने न सिर्फ माहौल को संगीतमय कर दिया अपितु एक सप्ताह बाद सेवानिवृत्त हो रहे प्राचार्य प्रो. प्रदीप खरे को यह पंक्तियां समर्पित भी की।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डोगरा रेजीमेंट के ब्रिगेडियर जी ज्ञानोदय थे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार पाठक, रामचंद्र जायसवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, संयुक्त सचिव, आनंद सिंघल, प्राचार्य, प्रो. प्रदीप खरे, मुख्य नियंता डॉ. एसपी सिंह, सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रणय त्रिपाठी ने माता सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित और माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीता पांडेय ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदना मिश्र के सूफियाना गीत ‘दमादम मस्त कलन्दर’ के साथ हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
फैजाबाद। साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज महाविद्यालय के सांस्कृतिक परिषद की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध लोक गायिका वंदना मिश्र ने उपस्थित श्रोताआें को अपनी शानदार प्रस्तुति से लोक संगीत से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का आरंभ ‘कहे तोसे सजना ये तोरी सजनियां...’ लोकगीत से हुआ। लेकिन जैसे ही उन्होंने ‘हे गंगा मैया तुहै पियरी चढै़बे...’ को प्रस्तुत किया, उपस्थित श्रोता झूम उठे। वंदना ने अवधी लोकगीत ‘आंखों जैसी आंख नहीं है, हे सईयां चश्मा लगा ला...’ को एक नया मकाम दिलाने में सत्यापित कर दिया। इस पूरे कार्यक्रम में सर्वाधिक महत्वपूर्ण आकर्षण महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के द्वारा प्रस्तुत राजस्थान का घूमर नृत्य रहा। इन छात्र-छात्राओं ने बरसाने में होने वाली होली नृत्य नाटिका को भी प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के अवैतनिक सचिव दीपकृष्ण वर्मा ने अपनी गायकी से उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने ‘जरा सी आहट होती है तो दिल सोचता है कि कहीं ये वो तो नहीं...’ को जैसे ही पूरा किया, श्रोताओं द्वारा एक बार फिर की मांग होने लगी। अवैतनिक सचिव ने राम यमन कल्याण में रचित गीत ‘अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं...’ ने न सिर्फ माहौल को संगीतमय कर दिया अपितु एक सप्ताह बाद सेवानिवृत्त हो रहे प्राचार्य प्रो. प्रदीप खरे को यह पंक्तियां समर्पित भी की।
विज्ञापन
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डोगरा रेजीमेंट के ब्रिगेडियर जी ज्ञानोदय थे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार पाठक, रामचंद्र जायसवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, संयुक्त सचिव, आनंद सिंघल, प्राचार्य, प्रो. प्रदीप खरे, मुख्य नियंता डॉ. एसपी सिंह, सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रणय त्रिपाठी ने माता सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित और माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीता पांडेय ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदना मिश्र के सूफियाना गीत ‘दमादम मस्त कलन्दर’ के साथ हुआ।
विज्ञापन