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आशीष ने अपने घर पर की थी मनोज की हत्या
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अयोध्या। नगर कोतवाली क्षेत्र के एक होटल से अगवा किए गए मनोज शुक्ला की हत्या दोस्त वीरेश सिंह के भाई आशीष सिंह ने अपने घर पर बुधवार रात कर दी थी।
मुख्य आरोपी आशीष उसे अगवा कर अपने घर ले गया और उसकी जमकर पिटाई की, इस दौरान उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने उसी रात अपने साथियों की मदद से शव को गोंडा के मसकनवां में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। रविवार को एसएसपी आशीष तिवारी ने पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता कर मनोज शुक्ला अपहरण व हत्याकांड का खुलासा किया।
बताया कि हत्याकांड के मुख्य आरोपी आशीष समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि, सात अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि वारदात 12 जून रात करीब 11 बजे की है। मृतक के भाई राघवेंद्र शुक्ल ने 13 जून शाम 4:52 बजे पुलिस का सूचना दी।
इसके आधार पर आशीष सिंह के ऊपर अपहरण व मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। अपहृत युवक की तलाश के लिए एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया के नेतृत्व में बनाई टीम में शामिल सीओ सिटी अरविंद चौरसिया, नगर कोतवाल विनोद बाबू मिश्र, स्वॉट टीम प्रभारी अभिषेक सिंह ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज चेक की तो आरोपी आशीष सिंह व उसके साथियों द्वारा मनोज के अपहरण करने की पुष्टि हुई।
इसके बाद से आरोपी फरार थे, उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही थी। इस दौरान 15 जून को गोंडा जनपद के थाना छपिया अंतर्गत चौकी मसकनवां क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर एक युवक की क्षत विक्षित शव मिलने की सूचना मिली।
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इस पर वहां पहुंची पुलिस टीम ने शव की फोटो के आधार पर उसकी पहचान मनोज शुक्ला के रूप में की। इसके बाद पुलिस मृतक के भाई राघवेंद्र व बहन पूजा को लेकर वहां गई, उन्होंने उसकी पुष्टि की। एसएसपी के अनुसार इस बारे में जब गोंडा पुलिस से जानकारी ली गई तो पता चला कि 14 जून को शव का पोस्टमार्टम कराकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया।
मनोज की संगत में वीरेश बिगड़ रहा था, इसलिए की हत्या
एसएसपी के अनुसार, मुख्य आरोपी आशीष ने पूछताछ में बताया कि उसका छोटा भाई वीरेश सिंह व मनोज घनिष्ठ मित्र थे। वीरेश लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।
आरोपी के अनुसार वह जब फैजाबाद आता तो मनोज उसे अपने साथ ले जाता और दोनों साथ बैठकर शराब पीते थे। 12 जून की रात मनोज व वीरेश ने शहर के होटल में बैठकर शराब पी व गाली गलौज की। इसकी जानकारी मिलने पर उसने मनोज की हत्या करने का प्लान बना लिया था।
ये लोग थे हत्या में शामिल
एसएसपी ने बताया कि, मामले में पुलिस ने हत्या आरोपी आशीष व वीरेश सिंह समेत श्याम यादव निवासी साहबगंज, शिवम सिंह निवासी शाहजहांपुर कोतवाली अयोध्या, विनीत पांडेय निवासी केशवपुर हरैया जनपद बस्ती व श्रवण पांडेय निवासी दुबौलिया जनपद बस्ती को गिरफ्तार किया गया है।
इनके पास से अपहरण व हत्या में प्रयुक्त दो एसयूवी वाहन, मृतक की बाइक, हत्या करने में प्रयुक्त लोहे का रॉड आदि बरामद किया है। वहीं, इस मामले में फरार चल रहे अमन सिंह, विकास तिवारी व धर्मेंद्र सिंह सभी निवासी महताब बाग को. नगर, सोनू सोनकर निवासी चक्रतीर्थ को. अयोध्या, अनीश पांडेय निवासी परसपुर बस्ती, राना सिंह निवासी दुबौलिया जनपद बस्ती व मनुज मल्होत्रा निवासी जालपा कोतवाली अयोध्या की तलाश की जा रही है।
पुलिस को क्लीन चिट देते हुए पीठ थपथपाई
एसएसपी ने मनोज अपहरण व हत्याकांड में पुलिस को क्लीन चिट देते हुए पीठ थपथपाई। मामले में मृतक के परिवारीजनों ने पुलिस के ऊपर आरोपी को बचाने का आरोप लगाया था। इसको लेकर शनिवार देर रात रिकाबगंज चौराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन भी किया गया था। एसएसपी के अनुसार पुलिस ने केस दर्ज होने के बाद से कार्रवाई शुरू कर दी थी। महज 30 घंटे के अंदर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया गया।
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मुख्य आरोपी आशीष उसे अगवा कर अपने घर ले गया और उसकी जमकर पिटाई की, इस दौरान उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने उसी रात अपने साथियों की मदद से शव को गोंडा के मसकनवां में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। रविवार को एसएसपी आशीष तिवारी ने पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता कर मनोज शुक्ला अपहरण व हत्याकांड का खुलासा किया।
बताया कि हत्याकांड के मुख्य आरोपी आशीष समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि, सात अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि वारदात 12 जून रात करीब 11 बजे की है। मृतक के भाई राघवेंद्र शुक्ल ने 13 जून शाम 4:52 बजे पुलिस का सूचना दी।
इसके आधार पर आशीष सिंह के ऊपर अपहरण व मारपीट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। अपहृत युवक की तलाश के लिए एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया के नेतृत्व में बनाई टीम में शामिल सीओ सिटी अरविंद चौरसिया, नगर कोतवाल विनोद बाबू मिश्र, स्वॉट टीम प्रभारी अभिषेक सिंह ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज चेक की तो आरोपी आशीष सिंह व उसके साथियों द्वारा मनोज के अपहरण करने की पुष्टि हुई।
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इसके बाद से आरोपी फरार थे, उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही थी। इस दौरान 15 जून को गोंडा जनपद के थाना छपिया अंतर्गत चौकी मसकनवां क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर एक युवक की क्षत विक्षित शव मिलने की सूचना मिली।
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इस पर वहां पहुंची पुलिस टीम ने शव की फोटो के आधार पर उसकी पहचान मनोज शुक्ला के रूप में की। इसके बाद पुलिस मृतक के भाई राघवेंद्र व बहन पूजा को लेकर वहां गई, उन्होंने उसकी पुष्टि की। एसएसपी के अनुसार इस बारे में जब गोंडा पुलिस से जानकारी ली गई तो पता चला कि 14 जून को शव का पोस्टमार्टम कराकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया।
मनोज की संगत में वीरेश बिगड़ रहा था, इसलिए की हत्या
एसएसपी के अनुसार, मुख्य आरोपी आशीष ने पूछताछ में बताया कि उसका छोटा भाई वीरेश सिंह व मनोज घनिष्ठ मित्र थे। वीरेश लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।
आरोपी के अनुसार वह जब फैजाबाद आता तो मनोज उसे अपने साथ ले जाता और दोनों साथ बैठकर शराब पीते थे। 12 जून की रात मनोज व वीरेश ने शहर के होटल में बैठकर शराब पी व गाली गलौज की। इसकी जानकारी मिलने पर उसने मनोज की हत्या करने का प्लान बना लिया था।
ये लोग थे हत्या में शामिल
एसएसपी ने बताया कि, मामले में पुलिस ने हत्या आरोपी आशीष व वीरेश सिंह समेत श्याम यादव निवासी साहबगंज, शिवम सिंह निवासी शाहजहांपुर कोतवाली अयोध्या, विनीत पांडेय निवासी केशवपुर हरैया जनपद बस्ती व श्रवण पांडेय निवासी दुबौलिया जनपद बस्ती को गिरफ्तार किया गया है।
इनके पास से अपहरण व हत्या में प्रयुक्त दो एसयूवी वाहन, मृतक की बाइक, हत्या करने में प्रयुक्त लोहे का रॉड आदि बरामद किया है। वहीं, इस मामले में फरार चल रहे अमन सिंह, विकास तिवारी व धर्मेंद्र सिंह सभी निवासी महताब बाग को. नगर, सोनू सोनकर निवासी चक्रतीर्थ को. अयोध्या, अनीश पांडेय निवासी परसपुर बस्ती, राना सिंह निवासी दुबौलिया जनपद बस्ती व मनुज मल्होत्रा निवासी जालपा कोतवाली अयोध्या की तलाश की जा रही है।
पुलिस को क्लीन चिट देते हुए पीठ थपथपाई
एसएसपी ने मनोज अपहरण व हत्याकांड में पुलिस को क्लीन चिट देते हुए पीठ थपथपाई। मामले में मृतक के परिवारीजनों ने पुलिस के ऊपर आरोपी को बचाने का आरोप लगाया था। इसको लेकर शनिवार देर रात रिकाबगंज चौराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन भी किया गया था। एसएसपी के अनुसार पुलिस ने केस दर्ज होने के बाद से कार्रवाई शुरू कर दी थी। महज 30 घंटे के अंदर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया गया।