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फिर गहराया पटना मंदिर का विवाद : कूटरचित दस्तावेज, फर्जी वसीयत के आधार पर मंदिर अपने नाम दर्ज कराने का आरोप
Mon, 21 Aug 2023 07:20 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 21 Aug 2023 07:20 PM IST
सार
पुलिस ने विश्वनाथ मिश्र, राजनंदन मिश्र, जनक नंदन मिश्र, बृजनंदन मिश्र, देवी प्रसाद पांडेय, हरिशंकर विश्वकर्मा व गंगा प्रसाद तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोतवाली अयोध्या के तुलसी उद्यान के निकट स्थित 150 वर्ष पुराने पटना मंदिर का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मंदिर के वारिस होने के दावा करने वाले बिहार के गोपालपुर निवासी अरुण किशोर शरण ने मंदिर में ही रहने वाले कुछ लोगों पर फर्जी वसीयत व कूट रचित दस्तावेज के आधार पर उक्त मंदिर को अपने नाम कराने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने सात लोगों पर केस दर्ज किया है।
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अवध किशोर शरण का आरोप है कि हमारे पूर्वजों द्वारा उक्त मंदिर में पुजारी के रूप में नागेश्वर मिश्र को रखा हुआ था। वर्ष 1974 तक हमारे पूर्वज लखन किशोर शरण मंदिर की देखभाल के लिए पटना से अयोध्या आया करते थे। उनकी मृ़त्यु के बाद पुजारी स्व नागेश्वर मिश्र के पुत्र विश्वनाथ मिश्र, उनके पुत्र राजनंदन मिश्र, जनक नंदन मिश्र व बृजनंदन मिश्र ने साजिश रचकर लखन किशोर शरण की एक अपंजीकृत वसीयत तैयार कराई, जिसमें 10 अगस्त 1971 की तिथि अंकित की गई। इसमें देवी प्रसाद पांडेय, हरिशंकर लाल के गवाह के रूप में हस्ताक्षर हैं।
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इस वसीयत में न तो लेखक का नाम है, न ही किसी के पिता का नाम व पता लिखा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि यह वसीयत फर्जी है। आरोप लगाया कि लखन किशोर शरण की म़ृत्यु के लगभग 23 वर्ष बाद 23 सितंबर 1998 में विश्वनाथ मिश्र ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में तत्कालीन नगर पालिका अयोध्या में अपना नाम दर्ज करवा लिया। बताया कि स्व नागेश्वर मिश्र के तीसरे लड़के रघुनाथ मिश्र व उनका लड़का राजकुमार मिश्र जो मंदिर के वास्तविक पुजारी हैं, उन्होंने इसकी जानकारी उन्हें दी। आरोप लगाया कि अब सभी आरोपी उन्हें मंदिर में आने से रोकते हैं व गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी देते हैं।
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तहरीर के आधार पर कोतवाली अयोध्या पुलिस ने विश्वनाथ मिश्र, राजनंदन मिश्र, जनक नंदन मिश्र, बृजनंदन मिश्र, देवी प्रसाद पांडेय, हरिशंकर विश्वकर्मा व गंगा प्रसाद तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। ध्यान रहे कि इस मंदिर को लेकर कई साल से विवाद चला आ रहा है।