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अयोध्या की साफ-सफाई पर खर्च होंगे सवा छह करोड़
अमर उजाला ब्यूरो/अयोध्या
Updated Thu, 30 Jun 2016 11:34 PM IST
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नगर पालिका की बोर्ड बैठक में बहस करते सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर पालिका की बोर्ड बैठक में गुरुवार को तीखी बहस के बीच वित्तीय वर्ष 2016-17 के 17 करोड़ 35 लाख 77 हजार रुपये आय के सापेक्ष 17 करोड़ 14 लाख 75 हजार रुपये के व्यय का बजट सर्वसम्मति से पास किया गया है। यह बजट 21 लाख रुपये लाभ का है।
इसमें सबसे अधिक साफ-सफाई व उपकरणों पर सवा छह करोड़ रुपये खर्च होंगे। बैठक में डूडा से ठेके पर कर्मचारियों के कार्य कराए जाने के मुद्दे की गूंज रही। बोर्ड के सदस्य डूडा से ठेके पर कर्मियों से कार्य कराए जाने व न कराए जाने को लेकर दो खेमों में बंट गए।
पालिका कार्यालय में निर्धारित समय से लगभग डेढ़ घंटे देर से बोर्ड बैठक शुरू हुई। पारित बजट में सड़क मरम्मत निर्माण पर एक करोड़ 50 लाख रुपये, जलकल में एक करोड़ 85 लाख 53 हजार रुपये, नालियों के मरम्मत व निर्माण में एक करोड़ रुपये व्यय, मेला व्यवस्था में सबसे कम 15 लाख रुपये खर्च होगा।
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कारण कि इसके लिए अलग से जिला प्रशासन को शासन से बजट आवंटित होता है। नगर पालिका ने सार्वजनिक निर्माण विभाग पर 75 लाख खर्च करने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जबकि कर्मियों के भविष्य निधि व पेंशन-बोनस में तीन करोड़ 60 लाख रुपये खर्च होंगे।
बजट की स्वीकृति से पहले डूडा से ठेके पर कर्मचारियों के कार्य कराए जाने के विषय को लेकर हंगामा हुआ। सभासद अभय श्रीवास्तव ने कहा कि डूडा के माध्यम से कर्मचारी की आपूर्ति का प्रस्ताव बैठक 30 अप्रैल को तुलसी स्मारक भवन में रखा गया था। उसको सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया गया था।
पांच मई को बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद चार जून की बोर्ड बैठक में कुछ सभासदों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। कहा कि निरस्त किए गए प्रस्ताव को किन परिस्थितियों में छह माह से पूर्व नियम विरुद्ध स्वीकृत कर दिया गया।
आपत्ति दर्ज कराई कि निकाय नियमावली के तहत निरस्त प्रस्ताव पर छह माह के पहले बैठक नहीं होनी चाहिए जो नियम विरुद्ध है। अभय के समर्थन में सभासद कुंवर देवेश सिंह, रमेश दास, राम प्रकाश, विवेक मिश्र, अखिलेश त्रिपाठी, व्यंकटेशाचारी आदि ने भी विरोध दर्ज कराया और सदस्यों ने पालिका अधिवक्ता से विधिक राय मांगी।
दूसरी तरफ सभासद दुर्गेश पांडेय, लल्लन मिश्र, रियाज अहमद, श्यामलाल, रमाकांत विश्वकर्मा, श्याम जी, संगीता सोनकर आदि ने डूडा से ठेके पर कर्मियों से कार्य कराए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे पालिका में कार्य की गुणवत्ता बढ़ेग
तो दूसरी तरफ विरोध कर रहे सदस्यों का मानना है कि डूडा द्वारा काम कराए जाने पर कर्मचारियों का शोषण होगा और उनको कार्य से मुक्त कर दिया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष राधेश्याम गुप्त ने की और संचालन में ईओ पूजा त्रिपाठी ने किया।
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इसमें सबसे अधिक साफ-सफाई व उपकरणों पर सवा छह करोड़ रुपये खर्च होंगे। बैठक में डूडा से ठेके पर कर्मचारियों के कार्य कराए जाने के मुद्दे की गूंज रही। बोर्ड के सदस्य डूडा से ठेके पर कर्मियों से कार्य कराए जाने व न कराए जाने को लेकर दो खेमों में बंट गए।
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पालिका कार्यालय में निर्धारित समय से लगभग डेढ़ घंटे देर से बोर्ड बैठक शुरू हुई। पारित बजट में सड़क मरम्मत निर्माण पर एक करोड़ 50 लाख रुपये, जलकल में एक करोड़ 85 लाख 53 हजार रुपये, नालियों के मरम्मत व निर्माण में एक करोड़ रुपये व्यय, मेला व्यवस्था में सबसे कम 15 लाख रुपये खर्च होगा।
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कारण कि इसके लिए अलग से जिला प्रशासन को शासन से बजट आवंटित होता है। नगर पालिका ने सार्वजनिक निर्माण विभाग पर 75 लाख खर्च करने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जबकि कर्मियों के भविष्य निधि व पेंशन-बोनस में तीन करोड़ 60 लाख रुपये खर्च होंगे।
बजट की स्वीकृति से पहले डूडा से ठेके पर कर्मचारियों के कार्य कराए जाने के विषय को लेकर हंगामा हुआ। सभासद अभय श्रीवास्तव ने कहा कि डूडा के माध्यम से कर्मचारी की आपूर्ति का प्रस्ताव बैठक 30 अप्रैल को तुलसी स्मारक भवन में रखा गया था। उसको सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया गया था।
पांच मई को बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद चार जून की बोर्ड बैठक में कुछ सभासदों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। कहा कि निरस्त किए गए प्रस्ताव को किन परिस्थितियों में छह माह से पूर्व नियम विरुद्ध स्वीकृत कर दिया गया।
आपत्ति दर्ज कराई कि निकाय नियमावली के तहत निरस्त प्रस्ताव पर छह माह के पहले बैठक नहीं होनी चाहिए जो नियम विरुद्ध है। अभय के समर्थन में सभासद कुंवर देवेश सिंह, रमेश दास, राम प्रकाश, विवेक मिश्र, अखिलेश त्रिपाठी, व्यंकटेशाचारी आदि ने भी विरोध दर्ज कराया और सदस्यों ने पालिका अधिवक्ता से विधिक राय मांगी।
दूसरी तरफ सभासद दुर्गेश पांडेय, लल्लन मिश्र, रियाज अहमद, श्यामलाल, रमाकांत विश्वकर्मा, श्याम जी, संगीता सोनकर आदि ने डूडा से ठेके पर कर्मियों से कार्य कराए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे पालिका में कार्य की गुणवत्ता बढ़ेग
तो दूसरी तरफ विरोध कर रहे सदस्यों का मानना है कि डूडा द्वारा काम कराए जाने पर कर्मचारियों का शोषण होगा और उनको कार्य से मुक्त कर दिया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष राधेश्याम गुप्त ने की और संचालन में ईओ पूजा त्रिपाठी ने किया।