{"_id":"3ee8ebcd18205a33beba22387f246d0f","slug":"buried-tazia-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दफन हुए ताजिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दफन हुए ताजिया
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुरबानी को लेकर शनिवार को दसवीं मोहर्रम पर शहर से जुलूस की शक्ल में निकले ताजिये विभिन्न करबलाओं में दफन कर दिये गये।
अलम व दुलदुल के साथ जुलूस में जगह-जगह मातम हुआ। तलवार, भाला, जंजीरों व ट्यूब-रॉड के करतब में लहूलुहान हो रहे अंजुमनों के सदस्यों को देख दर्शकों के आंसू छलक पड़े। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये थे। चौराहों पर और जुलूस के साथ पुलिस व पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।
देर रात तक विभिन्न घरों से निकले ताजिये बड़ी बुआ, खुर्द महल, दिल्ली दरवाजा, सिविल लाइंस, मकबरा के पीछे, वजीरगंज जप्ती, फार्ब्स इंटर कॉलेज के पीछे, रेतिया, सआदतगंज अब्बूसराय समेत इलाके की अलग-अलग करबलाओं में दफन किये गये। इससे पहले नवीं मोहर्रम पर शब-ए-आसूर की रात राठहवेली, इमामबाड़ा, खुर्द महल, हैदरगंज, मुकेरी टोला, चौक, बल्लाहाता, वजीरगंज जप्ती, मोदहा, हाता खुसरू बेग, कश्मीरी मोहल्ला व हसनू कटरा आदि जगहों पर रात भर मजलिसों का दौर चला। यहां कई अंजुमनों ने शिरकत की। सुबह होते ही ताजियों के साथ जुलूस निकलना शुरू हो गया। अंजुमनों ने नौहाख्वानी कर करबला की घटना का मार्मिक वर्णन किया।
विज्ञापन
मुहर्रम संचालन कमेटी के अध्यक्ष मुनीर आब्दी व सचिव वसी हैदर गुड्डू ने बताया कि नगर में एक हजार से अधिक ताजिये लोगों ने अपने घरों में रखे थे। सबसे अधिक करीब पांच सौ ताजिये बड़ी बुआ और उसके बाद करीब तीन सौ ताजिये खुर्द महल की करबला में दफन किये गये। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कमां-छुरी और जंजीरों के मातम के साथ निकले ताजिये चौक, आंख अस्पताल तिराहा और खवासपुरा होते हुए इमामबाड़ा पहुंचे। अंजुमन आबीदिया के नेतृत्व में मातम के साथ अंजुमनों ने सीनाजनी और नौहाख्वानी की। ताजियों को करबलाओं में दफन करने का क्रम रात नौ बजे के करीब थमा। इस दौरान जायरीन को चाय, पानी, शरबत व चना आदि पिलाया-खिलाया जाता रहा।
विज्ञापन
अलम व दुलदुल के साथ जुलूस में जगह-जगह मातम हुआ। तलवार, भाला, जंजीरों व ट्यूब-रॉड के करतब में लहूलुहान हो रहे अंजुमनों के सदस्यों को देख दर्शकों के आंसू छलक पड़े। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये थे। चौराहों पर और जुलूस के साथ पुलिस व पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।
विज्ञापन
देर रात तक विभिन्न घरों से निकले ताजिये बड़ी बुआ, खुर्द महल, दिल्ली दरवाजा, सिविल लाइंस, मकबरा के पीछे, वजीरगंज जप्ती, फार्ब्स इंटर कॉलेज के पीछे, रेतिया, सआदतगंज अब्बूसराय समेत इलाके की अलग-अलग करबलाओं में दफन किये गये। इससे पहले नवीं मोहर्रम पर शब-ए-आसूर की रात राठहवेली, इमामबाड़ा, खुर्द महल, हैदरगंज, मुकेरी टोला, चौक, बल्लाहाता, वजीरगंज जप्ती, मोदहा, हाता खुसरू बेग, कश्मीरी मोहल्ला व हसनू कटरा आदि जगहों पर रात भर मजलिसों का दौर चला। यहां कई अंजुमनों ने शिरकत की। सुबह होते ही ताजियों के साथ जुलूस निकलना शुरू हो गया। अंजुमनों ने नौहाख्वानी कर करबला की घटना का मार्मिक वर्णन किया।
विज्ञापन
मुहर्रम संचालन कमेटी के अध्यक्ष मुनीर आब्दी व सचिव वसी हैदर गुड्डू ने बताया कि नगर में एक हजार से अधिक ताजिये लोगों ने अपने घरों में रखे थे। सबसे अधिक करीब पांच सौ ताजिये बड़ी बुआ और उसके बाद करीब तीन सौ ताजिये खुर्द महल की करबला में दफन किये गये। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कमां-छुरी और जंजीरों के मातम के साथ निकले ताजिये चौक, आंख अस्पताल तिराहा और खवासपुरा होते हुए इमामबाड़ा पहुंचे। अंजुमन आबीदिया के नेतृत्व में मातम के साथ अंजुमनों ने सीनाजनी और नौहाख्वानी की। ताजियों को करबलाओं में दफन करने का क्रम रात नौ बजे के करीब थमा। इस दौरान जायरीन को चाय, पानी, शरबत व चना आदि पिलाया-खिलाया जाता रहा।