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बीटीसी प्रशिक्षुओं की परीक्षा में जमकर नकल
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:03 AM IST
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भविष्य के शिक्षकों ने मंगलवार से शुरू हुई बीटीसी वर्ष 2013 के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में जमकर नकल की। सुबह की पाली में न कोई सिटिंग प्लान था, न ही नकल रोकने का कोई इंतजाम।
डायट के शिक्षकों के सामने एक-दूसरे की कॉपी से खुलेआम नकल करते दिखे। कहीं से नहीं लग रहा था कि कोई परीक्षा हो रही है। बीटीसी के छात्र/छात्राओं ने टाट-पट्टी पर आसपास बैठकर परीक्षा दी और कॉपी में एकदूसरे का जवाब खूब टीपा।
शिक्षक बनने के लिए बीटीसी होना अनिवार्य योग्यता है। नकल कर पास हुए इन्हीं परीक्षार्थी के कंधे पर देश के भविष्य का निर्माण करने की भी जिम्मेदारी होगी।
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बीटीसी 2013 की प्रथम सेमेस्टर की मंडल स्तरीय तीन दिवसीय परीक्षा 17 नवंबर को सुबह 10 बजे शहर स्थित साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज में शुरू हुई।
कुल परीक्षार्थियों की तादात 627 है जिसमें से 159 परीक्षार्थी आंशिक श्रेणी के हैं। आंशिक उसे कहते हैं जो पिछली परीक्षा में किन्हीं कारण से असफल रहे हो, उन्हें दूसरी बार भी मौका दिया जाता है।
कमरों में टाट-पट्टी बिछी मिली। परीक्षार्थी सटकर बैठ गए जिससे एक दूसरे की नकल करने में कोई असुविधा न हो। परीक्षा की शुचिता को तार-तार कर दिया।
627 परीक्षार्थियों के लिए सिर्फ एक परीक्षा केंद्र बना देने से डायट पर भी संदेह की अंगुली उठ रही है। समूचे मंडल के बीटीसी कर रहे छात्र/छात्राओं की संख्या को देखते हुए और भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते थे।
हालांकि दूसरे पाली में अधिकारी होश में आए और परीक्षा के लिए इंतजाम सख्त कर दिए गए हैं। लेकिन डायट की भूमिका सवालों के घेरे में है।
आखिर जिले में और भी साखदार व संसाधन युक्त स्कूल थे, उन्हें परीक्षा केंद्र क्यों नहीं बनाया? यदि भौतिक संसाधनों का अभाव था और जिसके कारण टाट-पट्टी का इंतजाम करना पड़ा, उस पर डायट का ध्यान क्यों नहीं गया।
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डायट के शिक्षकों के सामने एक-दूसरे की कॉपी से खुलेआम नकल करते दिखे। कहीं से नहीं लग रहा था कि कोई परीक्षा हो रही है। बीटीसी के छात्र/छात्राओं ने टाट-पट्टी पर आसपास बैठकर परीक्षा दी और कॉपी में एकदूसरे का जवाब खूब टीपा।
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शिक्षक बनने के लिए बीटीसी होना अनिवार्य योग्यता है। नकल कर पास हुए इन्हीं परीक्षार्थी के कंधे पर देश के भविष्य का निर्माण करने की भी जिम्मेदारी होगी।
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बीटीसी 2013 की प्रथम सेमेस्टर की मंडल स्तरीय तीन दिवसीय परीक्षा 17 नवंबर को सुबह 10 बजे शहर स्थित साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज में शुरू हुई।
कुल परीक्षार्थियों की तादात 627 है जिसमें से 159 परीक्षार्थी आंशिक श्रेणी के हैं। आंशिक उसे कहते हैं जो पिछली परीक्षा में किन्हीं कारण से असफल रहे हो, उन्हें दूसरी बार भी मौका दिया जाता है।
कमरों में टाट-पट्टी बिछी मिली। परीक्षार्थी सटकर बैठ गए जिससे एक दूसरे की नकल करने में कोई असुविधा न हो। परीक्षा की शुचिता को तार-तार कर दिया।
627 परीक्षार्थियों के लिए सिर्फ एक परीक्षा केंद्र बना देने से डायट पर भी संदेह की अंगुली उठ रही है। समूचे मंडल के बीटीसी कर रहे छात्र/छात्राओं की संख्या को देखते हुए और भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते थे।
हालांकि दूसरे पाली में अधिकारी होश में आए और परीक्षा के लिए इंतजाम सख्त कर दिए गए हैं। लेकिन डायट की भूमिका सवालों के घेरे में है।
आखिर जिले में और भी साखदार व संसाधन युक्त स्कूल थे, उन्हें परीक्षा केंद्र क्यों नहीं बनाया? यदि भौतिक संसाधनों का अभाव था और जिसके कारण टाट-पट्टी का इंतजाम करना पड़ा, उस पर डायट का ध्यान क्यों नहीं गया।