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रामलला के दर्शन का टूटा रिकॉर्ड
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद पहली बार संपन्न हुए रामनवमी मेले में रामलला के दर्शन का रिकॉर्ड टूट गया है। इस बार रामजन्मोत्सव पर करीब 20 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।
जो रामलला का ठाठ-बाट व मंदिर निर्माण कार्य देखकर निहाल हो उठे। नौ दिनों तक चले रामनवमी मेले में 4,12,467 भक्तों ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर नया रिकॉर्ड बना दिया।
भक्तों में राममंदिर निर्माण कार्य देखने की सर्वाधिक ललक दिखी। जिसका परिणाम रहा कि रिकॉर्ड संख्या में भक्त रामलला के दरबार पहुंचे। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 2,83,542 भक्तों ने रामलला के दर्शन किये थे।
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वर्र्ष 2018 में 3,02,054 और वर्ष 2019 में 3,35, 227 भक्तों ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई थी। दो वर्ष(2020 व 2021 में) कोरोना संक्रमण के चलते लगी पाबंदियों ने श्रद्धालुओं के पैर बांध रखे थे।
हर कोई अयोध्या आकर बदलती अयोध्या व अस्थायी मंदिर में विराजमान किए गए रामलला का दर्शन करना चाहता था लेकिन कोरोना संक्रमण बाधक बनकर खड़ा रहे।
जैसे ही संक्रमण से राहत मिली और पाबंदियों में ढील दी गई तो श्रद्धालु भी अयोध्या का रुख करने लगे। इस वर्ष के पहले दिन एक जनवरी 2022 को जब रामलला के दरबार में रिकॉर्ड एक लाख 12 हजार भक्त पहुंचे तो जानकारों को अंदाजा लग गया था कि अब अयोध्या में भक्तों की भीड़ रुकने वाली नहीं है।
रामनगरी लगातार श्रद्धालुओं से गुलजार होती गई। रामलला के दरबार में प्रतिदिन जहां तीन से पांच हजार भक्त दर्शन करते थे, इसकी संख्या दोगुनी होकर आठ से 10 हजार पहुंच गई।
वीकेंड, छुट्टी, पर्व व त्योहारों पर तो बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दरबार पहुंचने लगे। रामनवमी मेला शुरू होने से पूर्व ही यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस बार रामनवमी मेले में भक्तों की रिकॉर्ड भीड़ पहुंचेगी।
अनुमान सही रहा और रामनवमी मेले में लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। इसको लेकर प्रशासन ने तैयारी भी कर रखी थी। पूरी अयोध्या को राममय बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गईं थी।
रामभक्तों को निशुल्क भोजन, सांस्कृतिक आयोजन, मैजिक शो, एलईडी पर रामायण का प्रसारण, पूरी अयोध्या से लेकर रामजन्मभूमि की भव्य सजावट आदि व्यवस्थाएं थी जो भक्तों को आकर्षित करती रहीं।
अयोध्या पहुुंचने वाले भक्तों में रामलला के दर्शन की व्याकुलता साफ दिखती थी। रामनवमी व चैत्र नवरात्र पर्व का शुभारंभ दो अप्रैल से हुआ। पहले दिन से रामलला के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी और हर दिन भक्तों की संख्या बढ़ती गई।
आलम यह रहा कि नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। भक्त अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला का ठाठ-बाट व राममंदिर निर्माण अपनी आंखों से देखकर निहाल थे। कई भक्त तो दर्शनमार्ग पर मंदिर निर्माण देखकर भावुक भी होते रहे।
नवरात्र में भक्तों के दर्शन की संख्या
दो अप्रैल प्रतिपदा 11,885
तीन अप्रैल द्वितीया 21,222
चार अप्रैल तृतीया 23,006
पांच अप्रैल चतुर्थी 22,066
छह अप्रैल पंचमी 18,168
सात अप्रैल षष्ठी 20,757
आठ अप्रैल सप्तमी 51,768
नौ अप्रैल अष्टमी 11,5875
दस अप्रैल रामनवमी 1,27,720
रामजन्मोत्सव का पर्व समाप्त हो चुका है लेकिन भक्त इस कदर उत्साह व आस्था से लबरेज हैं कि दशमी तिथि को भी अयोध्या में कई लाख भक्तों की भीड़ रही।
वहीं मंदिरों में भी भगवान श्रीराम के जन्म के बाद बधाइयां गाकर उत्सव मनाने का क्रम जारी है। दशमी को भी करीब दो लाख भक्तों ने अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। रामलला के दर्शन को भी भक्तों की भीड़ रही।
अपने आराध्य श्रीरामलला के जन्म की खुशी में मठ-मंदिरों में अभी भी बधाई गान का दौर जारी है। गीत-संगीत की महफिल जमी है। श्रद्धालु भी अयोध्या में ठहरे हैं और जन्मोत्सव का आनंद उठा रहे हैं।
चौबुर्जी मंदिर में महंत बृजमोहन दास की अध्यक्षता में शाम को बधाई गान की महफिल सजी। बृजमोहन दास ने कई भजन व गीत सुनाए तो भक्त आनंदित हो उठे। खासकर राममंदिर व अयोध्या की महिमा का वर्णन करते उनके गीतों ने श्रद्धालुुओं को खूब रिझाया।
उनके शिष्य राजकुमार दास ने भी भजनों की प्रस्तुति की। वहीं सिद्धपीठ कनकभवन में भी उत्सव का रंग प्रगाढ़ है। यहां एकादशी तक गीत-संगीत की महफिल सजेगी।
इसी तरह सियाराम किला, श्रीरामवल्लभाकुंज, अशर्फी भवन, लक्ष्मण किला समेत सैकड़ों मंदिरों में सोमवार को भी सांस्कृतिक आयोजनों की धूम रही।
विश्वशांति आश्रम में श्रीरामजन्मोत्सव का सोमवार को भव्य समापन हुआ। दशमी तिथि पर उमड़े भक्तों को रामनाम की महत्ता बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास आचार्य लक्ष्मण दास ने कहा कि भगवान राम का नाम लोक मंगलकारी है।
राम जाति वर्ग से परे हैं दरअसल राम देश की एकता के प्रतीक हैं। कहा कि इस संपूर्ण विश्व में राम सा चरित्र दूसरा नहीं। राम इस दुनिया के संतुलन हैं और उनका नाम भवसागर से पार कराने वाला अमृत है।
इससे पूर्व हवन-पूजन कर जन्मोत्सव का समापन किया गया। इस अवसर पर प्रसाद वितरण का भी आयोजन हुआ। इस दौरान जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत प्रियाप्रीतम शरण, पार्षद रमेश दास, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय सहित बड़ी संख्या में भक्त, श्रद्धालु भी मौजूद रहे।
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जो रामलला का ठाठ-बाट व मंदिर निर्माण कार्य देखकर निहाल हो उठे। नौ दिनों तक चले रामनवमी मेले में 4,12,467 भक्तों ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर नया रिकॉर्ड बना दिया।
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भक्तों में राममंदिर निर्माण कार्य देखने की सर्वाधिक ललक दिखी। जिसका परिणाम रहा कि रिकॉर्ड संख्या में भक्त रामलला के दरबार पहुंचे। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 2,83,542 भक्तों ने रामलला के दर्शन किये थे।
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वर्र्ष 2018 में 3,02,054 और वर्ष 2019 में 3,35, 227 भक्तों ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई थी। दो वर्ष(2020 व 2021 में) कोरोना संक्रमण के चलते लगी पाबंदियों ने श्रद्धालुओं के पैर बांध रखे थे।
हर कोई अयोध्या आकर बदलती अयोध्या व अस्थायी मंदिर में विराजमान किए गए रामलला का दर्शन करना चाहता था लेकिन कोरोना संक्रमण बाधक बनकर खड़ा रहे।
जैसे ही संक्रमण से राहत मिली और पाबंदियों में ढील दी गई तो श्रद्धालु भी अयोध्या का रुख करने लगे। इस वर्ष के पहले दिन एक जनवरी 2022 को जब रामलला के दरबार में रिकॉर्ड एक लाख 12 हजार भक्त पहुंचे तो जानकारों को अंदाजा लग गया था कि अब अयोध्या में भक्तों की भीड़ रुकने वाली नहीं है।
रामनगरी लगातार श्रद्धालुओं से गुलजार होती गई। रामलला के दरबार में प्रतिदिन जहां तीन से पांच हजार भक्त दर्शन करते थे, इसकी संख्या दोगुनी होकर आठ से 10 हजार पहुंच गई।
वीकेंड, छुट्टी, पर्व व त्योहारों पर तो बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दरबार पहुंचने लगे। रामनवमी मेला शुरू होने से पूर्व ही यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस बार रामनवमी मेले में भक्तों की रिकॉर्ड भीड़ पहुंचेगी।
अनुमान सही रहा और रामनवमी मेले में लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। इसको लेकर प्रशासन ने तैयारी भी कर रखी थी। पूरी अयोध्या को राममय बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गईं थी।
रामभक्तों को निशुल्क भोजन, सांस्कृतिक आयोजन, मैजिक शो, एलईडी पर रामायण का प्रसारण, पूरी अयोध्या से लेकर रामजन्मभूमि की भव्य सजावट आदि व्यवस्थाएं थी जो भक्तों को आकर्षित करती रहीं।
अयोध्या पहुुंचने वाले भक्तों में रामलला के दर्शन की व्याकुलता साफ दिखती थी। रामनवमी व चैत्र नवरात्र पर्व का शुभारंभ दो अप्रैल से हुआ। पहले दिन से रामलला के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी और हर दिन भक्तों की संख्या बढ़ती गई।
आलम यह रहा कि नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। भक्त अस्थायी मंदिर में विराजमान रामलला का ठाठ-बाट व राममंदिर निर्माण अपनी आंखों से देखकर निहाल थे। कई भक्त तो दर्शनमार्ग पर मंदिर निर्माण देखकर भावुक भी होते रहे।
नवरात्र में भक्तों के दर्शन की संख्या
दो अप्रैल प्रतिपदा 11,885
तीन अप्रैल द्वितीया 21,222
चार अप्रैल तृतीया 23,006
पांच अप्रैल चतुर्थी 22,066
छह अप्रैल पंचमी 18,168
सात अप्रैल षष्ठी 20,757
आठ अप्रैल सप्तमी 51,768
नौ अप्रैल अष्टमी 11,5875
दस अप्रैल रामनवमी 1,27,720
रामजन्मोत्सव का पर्व समाप्त हो चुका है लेकिन भक्त इस कदर उत्साह व आस्था से लबरेज हैं कि दशमी तिथि को भी अयोध्या में कई लाख भक्तों की भीड़ रही।
वहीं मंदिरों में भी भगवान श्रीराम के जन्म के बाद बधाइयां गाकर उत्सव मनाने का क्रम जारी है। दशमी को भी करीब दो लाख भक्तों ने अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। रामलला के दर्शन को भी भक्तों की भीड़ रही।
अपने आराध्य श्रीरामलला के जन्म की खुशी में मठ-मंदिरों में अभी भी बधाई गान का दौर जारी है। गीत-संगीत की महफिल जमी है। श्रद्धालु भी अयोध्या में ठहरे हैं और जन्मोत्सव का आनंद उठा रहे हैं।
चौबुर्जी मंदिर में महंत बृजमोहन दास की अध्यक्षता में शाम को बधाई गान की महफिल सजी। बृजमोहन दास ने कई भजन व गीत सुनाए तो भक्त आनंदित हो उठे। खासकर राममंदिर व अयोध्या की महिमा का वर्णन करते उनके गीतों ने श्रद्धालुुओं को खूब रिझाया।
उनके शिष्य राजकुमार दास ने भी भजनों की प्रस्तुति की। वहीं सिद्धपीठ कनकभवन में भी उत्सव का रंग प्रगाढ़ है। यहां एकादशी तक गीत-संगीत की महफिल सजेगी।
इसी तरह सियाराम किला, श्रीरामवल्लभाकुंज, अशर्फी भवन, लक्ष्मण किला समेत सैकड़ों मंदिरों में सोमवार को भी सांस्कृतिक आयोजनों की धूम रही।
विश्वशांति आश्रम में श्रीरामजन्मोत्सव का सोमवार को भव्य समापन हुआ। दशमी तिथि पर उमड़े भक्तों को रामनाम की महत्ता बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास आचार्य लक्ष्मण दास ने कहा कि भगवान राम का नाम लोक मंगलकारी है।
राम जाति वर्ग से परे हैं दरअसल राम देश की एकता के प्रतीक हैं। कहा कि इस संपूर्ण विश्व में राम सा चरित्र दूसरा नहीं। राम इस दुनिया के संतुलन हैं और उनका नाम भवसागर से पार कराने वाला अमृत है।
इससे पूर्व हवन-पूजन कर जन्मोत्सव का समापन किया गया। इस अवसर पर प्रसाद वितरण का भी आयोजन हुआ। इस दौरान जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत प्रियाप्रीतम शरण, पार्षद रमेश दास, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय सहित बड़ी संख्या में भक्त, श्रद्धालु भी मौजूद रहे।