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किशोर की मौत पर जिला अस्पताल में हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2017 11:34 PM IST
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जिला अस्पताल में रविवार को डायरिया पीड़ित एक किशोर की मौत होने पर उसके परिवारीजनों व मोहल्ले के लोगों ने जमकर हंगामा किया। बाद में पुलिस ने किसी तरह समझाकर लोगों को शांत कराया।
शहर के ऋषि टोला निवासी विष्णु प्रजापति के 16 वर्षीय पुत्र पिंकू को उल्टी-दस्त होने पर रविवार सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि कोई भी डॉक्टर पिंकू को देखने नहीं आया। एक नर्स ने ड्रिप लगाई।
इसके बाद इंजेक्शन लगने के बाद पिंकू की हालत खराब होने लगी। दोपहर साढ़े तीन बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने व अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पिंकू के परिवारीजनों व मोहल्ले के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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सूचना पाकर दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे कोतवाल प्रमोद कुमार पांडेय ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत कराया। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि किशोर को डॉ. आरपी गुप्ता ने भर्ती किया था। उसकी हालत पहले से ही नाजुक थी, डॉ. आरसी राय ने भी उसे देखा था।
दोपहर साढ़े तीन बजे दर्द बढ़ने पर पिंकू को इंजेक्शन लगाया गया। हालत बिगड़ने पर डॉ. अरुण कुमार ने भी पिंकू को देखा मगर उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल की ओर से जरा भी लापरवाही नहीं बरती गई है।
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शहर के ऋषि टोला निवासी विष्णु प्रजापति के 16 वर्षीय पुत्र पिंकू को उल्टी-दस्त होने पर रविवार सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि कोई भी डॉक्टर पिंकू को देखने नहीं आया। एक नर्स ने ड्रिप लगाई।
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इसके बाद इंजेक्शन लगने के बाद पिंकू की हालत खराब होने लगी। दोपहर साढ़े तीन बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने व अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पिंकू के परिवारीजनों व मोहल्ले के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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सूचना पाकर दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे कोतवाल प्रमोद कुमार पांडेय ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत कराया। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि किशोर को डॉ. आरपी गुप्ता ने भर्ती किया था। उसकी हालत पहले से ही नाजुक थी, डॉ. आरसी राय ने भी उसे देखा था।
दोपहर साढ़े तीन बजे दर्द बढ़ने पर पिंकू को इंजेक्शन लगाया गया। हालत बिगड़ने पर डॉ. अरुण कुमार ने भी पिंकू को देखा मगर उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल की ओर से जरा भी लापरवाही नहीं बरती गई है।