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बार उपाध्यक्ष की सदस्यता निलंबित
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2015 11:32 PM IST
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बार एसोसिएशन की बैठक शुक्रवार को हुई। इसमें संघ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी को संघ की सदस्यता से छह माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। उन पर संघ विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए बैठक में सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया। बार उपाध्यक्ष ने इस कार्रवाई को बार अध्यक्ष की विक्षिप्तता करार दिया है।
बार की बैठक शुक्रवार को ढहाए गए बंगला नंबर पांच पर चल रहे आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक शुरू होते ही संघ अध्यक्ष ने कुछ सदस्यों पर आरोप लगाया कि वह आंदोलन को कमजोर करने में लगे हैं और जिला व पुलिस प्रशासन को बार की गुप्त बातें बता रहे हैं।
इस पर बैठक में उन वकीलों का नाम खुलासा करने की मांग हुई। बार अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने उपाध्यक्ष का नाम लेते हुए उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस को 44 वकीलों की सूची सौंपी है। वह बराबर आंदोलन को कमजोर करने में लगे हुए हैं। इस पर अधिकतर वकीलों ने उपाध्यक्ष को संघ की सदस्यता से निष्कासित करने की मांग की।
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इस पर संघ अध्यक्ष ने उन्हें छह माह के लिए संघ की सदस्यता से निष्कासित करने की घोषणा की। अध्यक्ष ने बताया कि वह खुद प्रकरण की जांच करेंगे और इसमें संलिप्त होने की बात सामने आई तो सदस्यता से बर्खास्तगी की कार्रवाई करेंगे।
कार्रवाई पर ओम प्रकाश तिवारी का कहना है कि बार काउंसिल के मॉडल बायलाज के मुताबिक चुनाव न होने पाए इसीलिए बार अध्यक्ष ने बंगला ढहवाकर 40 वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। बार नियमावली में बिना किसी प्रावधान के उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई।
अपने गांव के पड़ोसी को नीचा दिखाने के लिए पूरे सत्र बार अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए लगातार न्यायिक कार्य से विरत रखा। यह कार्रवाई बार अध्यक्ष की विक्षिप्तता का प्रमाण है।
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बार की बैठक शुक्रवार को ढहाए गए बंगला नंबर पांच पर चल रहे आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक शुरू होते ही संघ अध्यक्ष ने कुछ सदस्यों पर आरोप लगाया कि वह आंदोलन को कमजोर करने में लगे हैं और जिला व पुलिस प्रशासन को बार की गुप्त बातें बता रहे हैं।
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इस पर बैठक में उन वकीलों का नाम खुलासा करने की मांग हुई। बार अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने उपाध्यक्ष का नाम लेते हुए उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस को 44 वकीलों की सूची सौंपी है। वह बराबर आंदोलन को कमजोर करने में लगे हुए हैं। इस पर अधिकतर वकीलों ने उपाध्यक्ष को संघ की सदस्यता से निष्कासित करने की मांग की।
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इस पर संघ अध्यक्ष ने उन्हें छह माह के लिए संघ की सदस्यता से निष्कासित करने की घोषणा की। अध्यक्ष ने बताया कि वह खुद प्रकरण की जांच करेंगे और इसमें संलिप्त होने की बात सामने आई तो सदस्यता से बर्खास्तगी की कार्रवाई करेंगे।
कार्रवाई पर ओम प्रकाश तिवारी का कहना है कि बार काउंसिल के मॉडल बायलाज के मुताबिक चुनाव न होने पाए इसीलिए बार अध्यक्ष ने बंगला ढहवाकर 40 वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। बार नियमावली में बिना किसी प्रावधान के उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई।
अपने गांव के पड़ोसी को नीचा दिखाने के लिए पूरे सत्र बार अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए लगातार न्यायिक कार्य से विरत रखा। यह कार्रवाई बार अध्यक्ष की विक्षिप्तता का प्रमाण है।