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हाईटेक होगा शोध संस्थान, ऑनलाइन देख सकेंगे रामलीलाएं

Fri, 20 Sep 2019 10:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2019 10:57 PM IST
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ayodhya Research institute to be high-tech
अयोध्या शोध संस्थान की प्रस्तावित डिजाइन। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। अयोध्या शोध संस्थान अब हाईटेक होगा। इसके लिए योगी सरकार ने 17 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। साथ ही 4.50 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं।
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इस धनराशि से अयोध्या शोध संस्थान की अनवरत होने वाली रामलीला समेत विश्व के 30 देशों की रामलीलाओं का मंचन लोग ऑनलाइन देख सकेंगे। यही नहीं अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत समेत शोध संस्थान में विश्व भर की रखी पांडुलिपियों व कलाकृतियों से भी रूबरू हो सकेंगे। जल्द ही संस्थान का डिजिटलाइजेशन होगा, साथ ही सुविधाओं के विस्तार पर काम शुरू होगा।
अयोध्या शोध संस्थान दो साल पहले बदहाली से जूझ रहा था। यहां होने वाली अनवरत रामलीला से सपा सरकार ने हाथ खींच लिया था, जिससे बंद करना पड़ा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की कमान संभालते ही अयोध्या शोध संस्थान में बंद पड़ी रामलीला का अनवरत मंचन शुरू कराकर नहीं ऊर्जा दी।
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इसके बाद एंटीक सामानों को सजाने का काम तेज हुआ। अभी कुछ ही दिनों पूर्व अयोध्या शोध संस्थान में कोदंड राम की 7 फीट की प्रतिमा की स्थापना भी मुख्यमंत्री ने की थी। यह वास्तुकला का नायाब नमूना है। इसी दौरान ही उन्होंने अयोध्या शोध संस्थान को हाईटेक करने व इसके विस्तार की योजना बनाने का निर्देश दिया था।
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अयोध्या संस्थान में इंडोनेशिया, अमेरिका, त्रिनिडाड, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सूरीनाम, रूस, लाओस, फिजी आदि देशों की रामलीला सामग्रियों का संग्रह व हस्तशिल्प में देश के विभिन्न कोने से रामकथा का संकलन, टेरोकोटा के माध्यम से विभिन्न शैलियों में रामकथा अंकन तथा विभिन्न चित्र शैलियों में रामकथा का चित्रांकन आकर्षण का केंद्र है। लोग इन्हें अब ऑनलाइन देख सकेंगे।
संस्थान के पुस्तकालय में प्रतिवर्ष लगभग 40 शोधार्थी शोधपरक सर्वेक्षण कार्य करते हैं। पुस्तकालय में अयोध्या के हेंस बेकर, अवध गजेटियर, विभिन्न प्रदेश के गजेटियर तथा तुलसी कृत लगभग 200 ग्रंथ शोधार्थियों हेतु उपलब्ध हैं।

इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य, इतिहास, पुराण, वेद, संहिता तथा विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग 150 रामायण पुस्तकालय में उपलब्ध हैं। एक साथ 70 पाठक प्रतिदिन पुस्तकालय में अध्ययन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त पुस्तकालय में अथ सत्योपाख्यान, बाल्मीकि रामायण, तुलसी कृत रामायण, हनुमत संहिता, कवितावली, रामायण तुलसीकृत, अयोध्या महात्मय इत्यादि ऐतिहासिक पांडुलिपि संस्थान की पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
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