{"_id":"5fd75e2e8ebc3e3d57440599","slug":"ayodhya-faizabad-news-lko554727896","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामनगरी में बिखरने लगी रामविवाहोत्सव की छटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामनगरी में बिखरने लगी रामविवाहोत्सव की छटा
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अयोध्या। रामनगरी में रामविवाहोत्सव की छटा बिखरने लगी है। रामनगरी के मंदिरों में विवाह उत्सव की तैयारी तेज हो गयी है। 20 अगस्त को रामनगरी के दर्जनों मंदिरों से भव्य रामबारात भी निकाली जाएगी। दशरथ महल बड़ास्थान में सोमवार को रामकथा के साथ सात दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ। रामकथा का शुभारंभ मंदिर के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने व्यासपीठ की पूजा व आरती कर किया।
उन्होंने प्रवचन सत्र में रामनाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि उल्टा नाम जपते-जपते बाल्मीकि जी ब्रह्म के समान हो गए। नाम स्मरण करते-करते भक्त प्रह्लाद भक्त शिरोमणि हो गए। राम नाम का सतत स्मरण भव सागर से पार कराता है। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने बताया कि विवाहोत्सव के क्रम में प्रतिदिन अपराहन तीन से छह बजे तक रामकथा का आयोजन होगा जबकि रात्रि आठ से 11 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा। बताया कि उत्सव में विवाह से संबंधित जितने में संस्कार होते हैं उनका पारंपरिक आयोजन होता है। रामविवाह उत्सव के साथ ही राम कलेवा का भी भव्य आयोजन होता है। भगवान को छप्पर प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
मंदिर से 20 अगस्त को पूरे राजसी वैभव के साथ भव्य रामबारात भी निकाली जाएगी। इसी तरह रामनगरी के अन्य मंदिरों में भी रामविवाहोत्सव को लेकर तैयारी तेज हो गयी हैं। रंगमहल में प्राचीन काष्ठ का मंडप तैयार हो चुका है। इसी मंडप में विवाह की रस्में निभाई जाएंगी,विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसी तरह जानकी महल ट्रस्ट में फुलवारी लीला व रामकलेवा का आयोजन भव्यता की बानगी होता है। विअहुति भवन में भी रामविवाह की विशिष्ट परंपरा है। श्रीरामबल्लभाकुंज, लक्ष्मण किला, रसमोद कुंज सहित रामनगरी के अन्य मंदिरों में विवाहोत्सव की छटा बिखरने लगी है। हालांकि इस वर्ष कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए संतों ने विवाहोत्सव मनाने का निर्णय लिया है।
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सोमवती अमावस्या पर उमड़े भक्त
सोमवती अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्घालु-भक्तों ने पावन सलिला सरयू में स्नान-दान कर विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना किया। सोमवार व अमावस्या के दुर्लभ संयोग में भक्त पूजा-अर्चना को लेकर उत्साहित नजर आए। शिवमंदिरों में खासी भीड़ दिखी। नागेश्वरनाथ व क्षीरेश्वरनाथ में दर्शन-पूजन को भक्तों का तांता लगा रहा। यहीं नहीं रामलला, कनक भवन व हनुमानगढ़ी में दरबार में भी भक्तों का तांता लगा रहा। हनुमानगढ़ी पूरे दिन भक्तों की भीड़ से पटा रहा। इस बार सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही योग रहा। वहीं विवाहित महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा की। महिलाओं द्वारा पीपल के पेड़ को दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा कर पेड़ के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा कर मनौती मांगी गयी।
खरमास आज से, नहीं होंगे शुभ कार्य
15 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो रहा है। ऐसे में खरमास के दौरान शुभ कार्यों का निषेध रहेगा। इस बार 15 दिसंबर से 20 अप्रैल तक मांगलिक कार्यक्रम नहीं हो पाएंगे। पंडित कौशल्यानंदन बताते हैं कि इस दौरान चल अचल संपत्ति या वस्तुओं की खरीद बिक्री पर कोई दोष नहीं होगा। बताया कि 15 दिसंबर से 13 जनवरी तक खरमास लग रहा है, खरमास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी से गुरू अस्त हो जाएगा जो कि 17 फरवरी तक चलेगा। वहीं 11 फरवरी से 20 अप्रैल तक शुक्र अस्त रहेगा। इन दशाओं में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। ऐसे में 20 अप्रैल के बाद ही मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।
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उन्होंने प्रवचन सत्र में रामनाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि उल्टा नाम जपते-जपते बाल्मीकि जी ब्रह्म के समान हो गए। नाम स्मरण करते-करते भक्त प्रह्लाद भक्त शिरोमणि हो गए। राम नाम का सतत स्मरण भव सागर से पार कराता है। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने बताया कि विवाहोत्सव के क्रम में प्रतिदिन अपराहन तीन से छह बजे तक रामकथा का आयोजन होगा जबकि रात्रि आठ से 11 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा। बताया कि उत्सव में विवाह से संबंधित जितने में संस्कार होते हैं उनका पारंपरिक आयोजन होता है। रामविवाह उत्सव के साथ ही राम कलेवा का भी भव्य आयोजन होता है। भगवान को छप्पर प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
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मंदिर से 20 अगस्त को पूरे राजसी वैभव के साथ भव्य रामबारात भी निकाली जाएगी। इसी तरह रामनगरी के अन्य मंदिरों में भी रामविवाहोत्सव को लेकर तैयारी तेज हो गयी हैं। रंगमहल में प्राचीन काष्ठ का मंडप तैयार हो चुका है। इसी मंडप में विवाह की रस्में निभाई जाएंगी,विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसी तरह जानकी महल ट्रस्ट में फुलवारी लीला व रामकलेवा का आयोजन भव्यता की बानगी होता है। विअहुति भवन में भी रामविवाह की विशिष्ट परंपरा है। श्रीरामबल्लभाकुंज, लक्ष्मण किला, रसमोद कुंज सहित रामनगरी के अन्य मंदिरों में विवाहोत्सव की छटा बिखरने लगी है। हालांकि इस वर्ष कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए संतों ने विवाहोत्सव मनाने का निर्णय लिया है।
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सोमवती अमावस्या पर उमड़े भक्त
सोमवती अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्घालु-भक्तों ने पावन सलिला सरयू में स्नान-दान कर विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना किया। सोमवार व अमावस्या के दुर्लभ संयोग में भक्त पूजा-अर्चना को लेकर उत्साहित नजर आए। शिवमंदिरों में खासी भीड़ दिखी। नागेश्वरनाथ व क्षीरेश्वरनाथ में दर्शन-पूजन को भक्तों का तांता लगा रहा। यहीं नहीं रामलला, कनक भवन व हनुमानगढ़ी में दरबार में भी भक्तों का तांता लगा रहा। हनुमानगढ़ी पूरे दिन भक्तों की भीड़ से पटा रहा। इस बार सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही योग रहा। वहीं विवाहित महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा की। महिलाओं द्वारा पीपल के पेड़ को दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा कर पेड़ के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा कर मनौती मांगी गयी।
खरमास आज से, नहीं होंगे शुभ कार्य
15 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो रहा है। ऐसे में खरमास के दौरान शुभ कार्यों का निषेध रहेगा। इस बार 15 दिसंबर से 20 अप्रैल तक मांगलिक कार्यक्रम नहीं हो पाएंगे। पंडित कौशल्यानंदन बताते हैं कि इस दौरान चल अचल संपत्ति या वस्तुओं की खरीद बिक्री पर कोई दोष नहीं होगा। बताया कि 15 दिसंबर से 13 जनवरी तक खरमास लग रहा है, खरमास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी से गुरू अस्त हो जाएगा जो कि 17 फरवरी तक चलेगा। वहीं 11 फरवरी से 20 अप्रैल तक शुक्र अस्त रहेगा। इन दशाओं में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। ऐसे में 20 अप्रैल के बाद ही मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।