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नहीं हुआ केंद्र निर्धारण, बोर्ड परीक्षा में हो सकता है विलंब
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अयोध्या। बोर्ड परीक्षा फार्म भरे जाने व पोर्टल पर विद्यालयों की ओर से समस्त सूचनाएं अपलोड करने के बाद भी अभी तक यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों का निर्धारण नहीं हुआ। इसकी वजह से माना जा रहा है कि इस बार बोर्ड परीक्षा में विलंब हो सकता है। कोरोना संक्रमण व फरवरी, मार्च में प्रस्तावित चुनाव में इसमें बड़ी बाधा माना जा रहा है। वहीं, परीक्षा को लेकर कोई जानकारी न होने से छात्र एवं अभिभावकों में भी उहापोह की स्थिति है।
जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग के 24 राजकीय, 50 सहायता प्राप्त विद्यालयों सहित 469 विद्यालय संचालित हैं। यहां वर्तमान सत्र में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में 45080 एवं 38625 संस्थागत एवं 239 व 957 व्यक्तिगत विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कोरोना संक्रमण के बीच इन दिनों तमाम मानकों के तहत कक्षाएं भी शुरू की गई हैं। लेकिन बोर्ड परीक्षा को लेकर कवायद ठंडे बस्ते में नजर आ रही है। गतवर्षों में अक्तूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक केंद्र निर्धारण की नीति जारी हो जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक नीति जारी नहीं हो सकी है। इसके पीछे बड़ा कारण कोविड-19 को भी माना जा रहा है।
यदि संक्रमण को देखते हुए शारीरिक दूरी के आधार पर केंद्रों का निर्धारण होगा तो धारण क्षमता कम पडने से केंद्रों की संख्या में इजाफा करना पड़ेगा। इससे सत्यापन आदि में लंबा समय लगने व काफी संख्या में मैन पावर व अतिरिक्त खर्च बढ़ने के आसार भी रहेंगे। जबकि गतवर्षों में यह समस्त कार्य नवंबर तक प्रत्येक दशा में पूर्ण हो जाते थे। ऐसे में अभी तक केंद्रों के निर्धारण व परीक्षा का शेड्यूल न बनने से छात्र, अभिभावक सहित विद्यालय प्रबंधन में असमंजस है।
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इस तरह होता है निर्धारण
गतवर्षों में बोर्ड परीक्षा फार्म भरने के उपरांत हाईस्कूल व इंटर मीडिएट के पंजीकृत कुल विद्यार्थियों का विवरण उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर विद्यालय स्तर से ही ऑनलाइन फीड किया जाता रहा है। साथ ही विद्यालय के कमरे, पहुंच मार्ग, सीसीटीवी, राउटर, वाइस रिकॉर्डर, शौचालय, पेयजल, कमरों की धारण क्षमता व संख्या सहित तमाम आधारभूत सुविधाओं का विवरण भी पोर्टल पर फीड किया जाता था। इसी आधार पर ऑनलाइन केंद्र का निर्धारण शासन की ओर से किया जाता था।
इसके उपरांत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की बैठक में सभी केंद्रों के भौतिक सत्यापन कराए जाने के बाद अंतिम केंद्र निर्धारण के लिए बोर्ड को संस्तुति की जाती थी। जिसके आधार पर अंतिम केंद्र निर्धारण किया जाता था। नवंबर तक उत्तर पुस्तिकाएं भी जिले को प्रेषित किया जाता था। प्रैक्टिकल भी प्रारंभ हो जाते थे। इस बार जिले स्तर से विद्यालयों से संबंधित सूचनाएं प्रेषित की जा चुकी हैं, छात्रों का विवरण भी फीड किया जा चुका है, लेकिन अभी तक ऑनलाइन केंद्र निर्धारण ही नहीं हो सका है। जिससे प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना भी है कि प्रक्रिया में विलंब से परीक्षा अप्रैल तक टलने की आशंका है। फिर भी अंतिम निर्णय भविष्य के गर्त में है।
केंद्र निर्धारण के लिए जिला स्तर से समस्त तैयारियां की जा चुकी हैं। बच्चों व विद्यालयों से संबंधित विवरण भी पोर्टल पर फीड किया जा चुका है। ऑनलाइन केंद्र निर्धारण में विलंब हो रहा है। इससे परीक्षा में विलंब होने के आसार हैं। शासन से निर्देश मिलते ही अनुपालन किया जाएगा।
-डॉ आरबी सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक, अयोध्या
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जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग के 24 राजकीय, 50 सहायता प्राप्त विद्यालयों सहित 469 विद्यालय संचालित हैं। यहां वर्तमान सत्र में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में 45080 एवं 38625 संस्थागत एवं 239 व 957 व्यक्तिगत विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कोरोना संक्रमण के बीच इन दिनों तमाम मानकों के तहत कक्षाएं भी शुरू की गई हैं। लेकिन बोर्ड परीक्षा को लेकर कवायद ठंडे बस्ते में नजर आ रही है। गतवर्षों में अक्तूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक केंद्र निर्धारण की नीति जारी हो जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक नीति जारी नहीं हो सकी है। इसके पीछे बड़ा कारण कोविड-19 को भी माना जा रहा है।
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यदि संक्रमण को देखते हुए शारीरिक दूरी के आधार पर केंद्रों का निर्धारण होगा तो धारण क्षमता कम पडने से केंद्रों की संख्या में इजाफा करना पड़ेगा। इससे सत्यापन आदि में लंबा समय लगने व काफी संख्या में मैन पावर व अतिरिक्त खर्च बढ़ने के आसार भी रहेंगे। जबकि गतवर्षों में यह समस्त कार्य नवंबर तक प्रत्येक दशा में पूर्ण हो जाते थे। ऐसे में अभी तक केंद्रों के निर्धारण व परीक्षा का शेड्यूल न बनने से छात्र, अभिभावक सहित विद्यालय प्रबंधन में असमंजस है।
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इस तरह होता है निर्धारण
गतवर्षों में बोर्ड परीक्षा फार्म भरने के उपरांत हाईस्कूल व इंटर मीडिएट के पंजीकृत कुल विद्यार्थियों का विवरण उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर विद्यालय स्तर से ही ऑनलाइन फीड किया जाता रहा है। साथ ही विद्यालय के कमरे, पहुंच मार्ग, सीसीटीवी, राउटर, वाइस रिकॉर्डर, शौचालय, पेयजल, कमरों की धारण क्षमता व संख्या सहित तमाम आधारभूत सुविधाओं का विवरण भी पोर्टल पर फीड किया जाता था। इसी आधार पर ऑनलाइन केंद्र का निर्धारण शासन की ओर से किया जाता था।
इसके उपरांत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की बैठक में सभी केंद्रों के भौतिक सत्यापन कराए जाने के बाद अंतिम केंद्र निर्धारण के लिए बोर्ड को संस्तुति की जाती थी। जिसके आधार पर अंतिम केंद्र निर्धारण किया जाता था। नवंबर तक उत्तर पुस्तिकाएं भी जिले को प्रेषित किया जाता था। प्रैक्टिकल भी प्रारंभ हो जाते थे। इस बार जिले स्तर से विद्यालयों से संबंधित सूचनाएं प्रेषित की जा चुकी हैं, छात्रों का विवरण भी फीड किया जा चुका है, लेकिन अभी तक ऑनलाइन केंद्र निर्धारण ही नहीं हो सका है। जिससे प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना भी है कि प्रक्रिया में विलंब से परीक्षा अप्रैल तक टलने की आशंका है। फिर भी अंतिम निर्णय भविष्य के गर्त में है।
केंद्र निर्धारण के लिए जिला स्तर से समस्त तैयारियां की जा चुकी हैं। बच्चों व विद्यालयों से संबंधित विवरण भी पोर्टल पर फीड किया जा चुका है। ऑनलाइन केंद्र निर्धारण में विलंब हो रहा है। इससे परीक्षा में विलंब होने के आसार हैं। शासन से निर्देश मिलते ही अनुपालन किया जाएगा।
-डॉ आरबी सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक, अयोध्या