{"_id":"5f998e748ebc3e9b966169f0","slug":"ayodhya-faizabad-news-lko547457259","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामनगरी के मंदिरों में धूमधाम से मनाई जाएगी बाल्मीकि जयंती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामनगरी के मंदिरों में धूमधाम से मनाई जाएगी बाल्मीकि जयंती
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अयोध्या। रामायण के रचयिता और विश्व के आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह प्रदेशभर में इस वर्ष धूमधाम से मनाया जायेगा। इसी कड़ी में रामनगरी के मंदिरों में भी बाल्मीकि जयंती को धूमधाम से मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस पावन दिन पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी भव्य समारोह होंगे। संस्कृति विभाग वाल्मीकि रामायण के मानवीय मूल्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा। भगवान श्रीराम, श्री हनुमान और रामायण से जुड़े मंदिरों, स्थलों का चयन कर रामायण पाठ व भजन कार्यक्रम का आयोजन होगा।
संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक व अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि सामाजिक, मानव और राष्ट्र मूल्यों की स्थापना के आदर्श हैं। इस वर्ष बाल्मीकि जयंती 31 अक्तूबर को भव्यता से मनाने की तैयारी है। जनमानस को जोड़ने के लिए महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों और मंदिरों पर दीप प्रज्जवलन व दीपदान के साथ लगातार 8, 12 या 24 घंटे का वाल्मीकि लिखित रामायण का पाठ का आयोजन किया जाएगा। महर्षि वाल्मीकि के बताए स्थल जिन्हें राम-जानकी मार्ग, राम वन गमन मार्ग सहित अन्य के रुप में जाना जाता है।
ऐसे संपूर्ण भारत में 280 स्थलों के रुप में आज भी मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में आज भी भारतीय संस्कृति के मूल्य तत्व व मान्यताएं सुरक्षित हैं। आयोजन के संबंध में देवरिया, जौनपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, बुलंदशहर को छोड़कर सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। इसी क्रम में रामनगरी के भी कई मंदिरों में दीपदान एवं भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। रामनगरी के ऐसे मंदिरों व स्थल की सूची तैयार की जा रही है।
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स्थलों व मंदिरों पर होने वाले कार्यक्रम कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए होंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि भव्य आयोजन के लिए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी तय होगी। प्रदेश के सभी जिलाधिकारी जिले के अन्य विभागों के सामंजस्य से अधिकारियों को निर्देशित कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करेंगे। हर जिलाधिकारी आयोजन के लिए अपने जिले से नोडल अधिकारी नामित करेंगे। जिनका मोबाइल नंबर, नाम, ईमेल आईडी संस्कृति विभाग के नोडल अधिकारी को ई-मेल करेंगे।
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संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक व अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि सामाजिक, मानव और राष्ट्र मूल्यों की स्थापना के आदर्श हैं। इस वर्ष बाल्मीकि जयंती 31 अक्तूबर को भव्यता से मनाने की तैयारी है। जनमानस को जोड़ने के लिए महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों और मंदिरों पर दीप प्रज्जवलन व दीपदान के साथ लगातार 8, 12 या 24 घंटे का वाल्मीकि लिखित रामायण का पाठ का आयोजन किया जाएगा। महर्षि वाल्मीकि के बताए स्थल जिन्हें राम-जानकी मार्ग, राम वन गमन मार्ग सहित अन्य के रुप में जाना जाता है।
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ऐसे संपूर्ण भारत में 280 स्थलों के रुप में आज भी मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में आज भी भारतीय संस्कृति के मूल्य तत्व व मान्यताएं सुरक्षित हैं। आयोजन के संबंध में देवरिया, जौनपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, बुलंदशहर को छोड़कर सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। इसी क्रम में रामनगरी के भी कई मंदिरों में दीपदान एवं भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। रामनगरी के ऐसे मंदिरों व स्थल की सूची तैयार की जा रही है।
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स्थलों व मंदिरों पर होने वाले कार्यक्रम कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए होंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि भव्य आयोजन के लिए जनप्रतिनिधियों की भागीदारी तय होगी। प्रदेश के सभी जिलाधिकारी जिले के अन्य विभागों के सामंजस्य से अधिकारियों को निर्देशित कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करेंगे। हर जिलाधिकारी आयोजन के लिए अपने जिले से नोडल अधिकारी नामित करेंगे। जिनका मोबाइल नंबर, नाम, ईमेल आईडी संस्कृति विभाग के नोडल अधिकारी को ई-मेल करेंगे।