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अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने दिया इस्तीफा

Wed, 01 Jun 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2022 11:51 PM IST
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Avadh University Vice Chancellor Prof. Ravi Shankar Singh resigned
अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने मंगलवार रात अचानक इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उनकी जगह प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भईया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार नियमित नियुक्ति होने तक के लिए सौंपा।
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इस संदर्भ में विश्वविद्यालय का कहना है कि प्रो. रविशंकर सिंह ने मंगलवार रात निजी कारणों से कुलाधिपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जबकि सूत्र बताते हैं कि उनके खिलाफ आरोपों की लंबी फेहरिस्त को देखते हुए उनसे इस्तीफा लिया गया है।
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विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन के सभागार में बुधवार सुबह वर्तमान कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने नवागत कुलप्रति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को कार्यभार सौंपा।
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मौके पर कुलसचिव उमानाथ, वित्त अधिकारी प्रो. चयन कुमार मिश्र, मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. नीलम पाठक, डॉ. संग्राम सिंह, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।
सूत्रों के अनुसार पूर्व कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने स्वयं इस्तीफा नहीं सौंपा बल्कि अवैध नियुक्तियों, दीपोत्सव के नाम पर वसूली जैसी शिकायतों की लंबी फेहरिस्त को देखते हुए मंगलवार रात ही उन्हें राजभवन तलब कर इस्तीफा ले लिया गया।
इसको लेकर साकेत महाविद्यालय के एसोसिएट प्रो. जनमेजय तिवारी, अयोध्या भाजपा जिला मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री भारत सरकार को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी।
उनका आरोप था कि प्रो. रविशंकर सिंह ने न केवल पूर्व कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित के कार्यकाल की तमाम योजनाओं पर पानी फेर दिया बल्कि भारत और दक्षिण कोरिया के मध्य हुए एक समझौते को भी कुलपति और उनके ओएसडी ने जानबूझकर खत्म कर दिया।
उनका आरोप था कि उन्होंने विश्वविद्यालय में कई फर्जी नियुक्तियां कराईं। इस प्रकरण में विज्ञापन से लेकर चयन तक की संपूर्ण प्रक्रिया विसंगतिपूर्ण व मनमानी से भरी रही।

इसमें मेरिट के सामान्य सिद्धांत को दरकिनार कर दिया गया। इन नियुक्तियों पर रोक लगाते हुए संपूर्ण चयन-प्रक्रिया की न्यायिक जांच करवाकर दोष सिद्ध पाए जाने पर संबंधित को दंडित करते हुए न्याय की की मांग की गई थी।
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