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एएसआई की कई तहरीरों पर पुलिस ने मारी कुंडली
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2015 10:24 PM IST
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आचार्य नरेंद्र देव कोठी परिसर में हुए रेस्टोरेंट के अवैध निर्माण हुई सीज की कार्रवाई के साथ ही दर्जनभर से ज्यादा मामले सामने आ गए हैं।
इसमें पुरातत्व विभाग ने संरक्षित इमारतों व स्थलों के निषिद्ध क्षेत्र में निर्माण करने वालों के खिलाफ पुलिस को कई तहरीरें दीं लेकिन वह इसे दबाए बैठी है।
अवैध निर्माण ढहाने की जिम्मेदारी जिस अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के कंधे पर है, वह भी चुप्पी साधे हुए है। हाल यह है कि डीएम व एसएसपी को भी पुरातत्व विभाग ने सूचना दी लेकिन अवैध निर्माणकर्ताओं पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
नगर कोतवाली, फतेहगंज और अयोध्या कोतवाली में पुरातत्व विभाग की ओर से कुल 20 तहरीरें दी गई लेकिन हाल यह रहा कि नवाबी युग की संरक्षित ऐतिहासिक विरासतों पर कब्जा होता रहा और पुलिस निष्क्रिय बनी रही।
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नगर कोतवाली में 14 तहरीर, अयोध्या कोतवाली में पांच तहरीर और फतेहगंज चौकी में एक तहरीर दी गई है। चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि उन तहरीरों पर कोतवाली और चौकी की प्राप्ति की बाबत मुहर भी लगी है, बावजूद इसके पुलिस का चुप्पी मारे बैठे रहना उसकी कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना रहा है।
इन सभी तहरीरों की सूचना एएफडीए के साथ ही डीएम और एसएसपी को भी दी गई लेकिन ऐतिहासिक सौंदर्य को दागदार बनाने वालों के हाथ इतने लंबे और पहुंच इतनी ज्यादा है कि किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कहीं पर नींव खोदकर मकान बना लिया गया तो कहीं पर नवनिर्माण के नाम पर दो तला मकान तन गया। हद तो तब हो गई जबकि मुतवल्ली और महंत भी अवैध निर्माण व कब्जे में शामिल हो गए हैं।
बहूबेगम मकबरे व हाजी इकबाल मस्जिद के मुतवल्ली और मणिपर्वत के महंत ने भी ऐतिहासिक व धार्मिक गौरवबोधहीनता का परिचय देते हुए जहां दांव मिला, वहीं हाथ मार लिया।
पुरातत्व विभाग ने इन तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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इसमें पुरातत्व विभाग ने संरक्षित इमारतों व स्थलों के निषिद्ध क्षेत्र में निर्माण करने वालों के खिलाफ पुलिस को कई तहरीरें दीं लेकिन वह इसे दबाए बैठी है।
अवैध निर्माण ढहाने की जिम्मेदारी जिस अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण के कंधे पर है, वह भी चुप्पी साधे हुए है। हाल यह है कि डीएम व एसएसपी को भी पुरातत्व विभाग ने सूचना दी लेकिन अवैध निर्माणकर्ताओं पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
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नगर कोतवाली, फतेहगंज और अयोध्या कोतवाली में पुरातत्व विभाग की ओर से कुल 20 तहरीरें दी गई लेकिन हाल यह रहा कि नवाबी युग की संरक्षित ऐतिहासिक विरासतों पर कब्जा होता रहा और पुलिस निष्क्रिय बनी रही।
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नगर कोतवाली में 14 तहरीर, अयोध्या कोतवाली में पांच तहरीर और फतेहगंज चौकी में एक तहरीर दी गई है। चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि उन तहरीरों पर कोतवाली और चौकी की प्राप्ति की बाबत मुहर भी लगी है, बावजूद इसके पुलिस का चुप्पी मारे बैठे रहना उसकी कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना रहा है।
इन सभी तहरीरों की सूचना एएफडीए के साथ ही डीएम और एसएसपी को भी दी गई लेकिन ऐतिहासिक सौंदर्य को दागदार बनाने वालों के हाथ इतने लंबे और पहुंच इतनी ज्यादा है कि किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कहीं पर नींव खोदकर मकान बना लिया गया तो कहीं पर नवनिर्माण के नाम पर दो तला मकान तन गया। हद तो तब हो गई जबकि मुतवल्ली और महंत भी अवैध निर्माण व कब्जे में शामिल हो गए हैं।
बहूबेगम मकबरे व हाजी इकबाल मस्जिद के मुतवल्ली और मणिपर्वत के महंत ने भी ऐतिहासिक व धार्मिक गौरवबोधहीनता का परिचय देते हुए जहां दांव मिला, वहीं हाथ मार लिया।
पुरातत्व विभाग ने इन तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।