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525 करोड़ रूपये से एयरपोर्ट के लिए ली जाएगी 80 हेक्टेयर भूमि
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अयोध्या। प्रस्तावित श्रीराम एयरपोर्ट की जमीन को लेकर राजस्व विभाग ने अंतिम सर्वे का काम पूरा कर लिया है। एयरपोर्ट के लिए पहले चरण में 525 करोड़ रुपये में लगभग 80 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण या क्रय किया जाएगा। यह जमीनें एयरपोर्ट के पास स्थित दो गांवों की हैं। सर्वे के बाद रेट तय करके जिला प्रशासन ने अनुमोदन के लिए पत्र शासन को भेज दिया है।
अनुमोदन मिलने के बाद किसानों से जमीनों की रजिस्ट्री का काम शुरू हो जाएगा। जमीन की व्यवस्था के लिए चार सौ करोड़ रुपये यहां पहले से उपलब्ध है। एयरपोर्ट के विकसित होने से रामनगरी के साथ ही पूरे इलाके के विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
हवाई पट्टी को सिविल एयरपोर्ट के रूप में विकसित किए जाने को लेकर सांसद लल्लू सिंह प्रयासरत हैं। इसे आरसीएस योजना के तहत विकसित किए जाने का मास्टर प्लान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पहले ही तैयार कर लिया है। लंबी प्रक्रिया के बाद एयरपोर्ट के लिए अब अंतिम रूप तहसील की टीम ने जमीन के सर्वे के साथ ही भूमि का मूल्यांकन करके रिपोर्ट दे दी।
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एयरपोर्ट के विस्तार के लिए तीन चरणों में कुल लगभग 464 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है। मौजूदा समय में हवाई पट्टी के कब्जे में लगभग 177.62 एकड़ भूमि उपलब्ध है। शेष जमीन की व्यवस्था अधिग्रहण या क्रय करके किए जाने का प्रस्ताव है। यह जमीनें हवाई पट्टी के इर्दगिर्द तीन गांवों की हैं।
इनमें एयरपोर्ट से सटे जनौरा, गंजा और धर्मपुर सहादत शामिल हैं लेकिन प्रशासन ने पहले चरण में केवल दो गांवों जनौरा और गंजा की जमीन का सर्वे कराया है। इन दो गांवों के किसानों ने अपनी जमीन देने की सहमति प्रदान कर दी थी लेकिन धर्मपुर सहादत गांव के किसानों ने अपनी जमीन देने की सहमति नहीं दी थी।
इसलिए इस गांव की जमीन का सर्वे और मूल्यांकन नहीं कराया गया। जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के लिए पहले चरण में गंजा और जनौरा की लगभग 80 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया है। जमीन के क्रय या अधिग्रहण के साथ इस पर मौजूद भवन और पेड़ों पर कुल लगभग 525 करोड़ रुपये का खर्च आने वाला है।
इसमें कुछ जमीन ग्राम समाज और शिक्षा विभाग की है इसका पुनर्ग्रहण किया जाएगा। इन जमीनों का सर्किल रेट के हिसाब से मूल्यांकन करके अनुमोदन के लिए पत्र शासन को भेज दिया गया। अनुमोदन के बाद किसानों से जमीन की रजिस्ट्री का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पहले चरण में एयरपोर्ट से उड़ेंगे छोटे विमान
श्रीराम एयरपोर्ट के विस्तार के बाद पहले छोटे विमान उड़ाने की योजना है। इसके तहत एटीआर 72 क्यू/400 विमान शामिल हैं। यह 72 से 78 सीटर होते हैं। जिला प्रशासन ने इसी के मद्देनजर पहले चरण में 80 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की है। इसे किसानों से अधिग्रहण या क्रय की जाएगी।
प्रशस्त होगा पर्यटन और विकास का मार्ग
एयरपोर्ट के विस्तार से क्षेत्र का विकास ही नहीं होगा बल्कि रामनगरी अयोध्या सीधे देश के विभिन्न क्षेत्रों से वायु मार्ग से जुड़ जाएगी। यहां श्रद्धालु और पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। पर्यटन का और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। देश-विदेश में रहने वाले आसपास के कई जिलों फैजाबाद, सुल्तानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर, बस्ती, गोंडा सहित अन्य जिलों के लोगों को सीधे यहां पहुंचने के लिए वायु मार्ग की सुविधा मिलेगी।
क्या है आरसीएस योजना
यह ज्यादा से ज्यादा लोगों को वायुमार्ग से यात्रा के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। नागर विमानन मंत्रालय ने इसके लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की यह योजना लागू की गई है। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों के एयरपोर्ट को जोड़ा जाता है।
प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए तहसील की टीम ने अंतिम रूप से सर्वे और मूल्यांकन कर लिया है। पहले चरण में दो गांवों की 80 हेक्टेयर भूमि के साथ भवन और पेड़ों का कुल मूल्यांकन 525 करोड़ रूपये किया गया है। शासन स्तर से भी इतनी जमीन से काम चल जाना माना गया है। इसे शासन को भेजा गया है। इसके वापस आने के साथ ही किसानों से जमीनों की रजिस्ट्री शुरू करा दी जाएगी।
-जेपी सिंह, भूमि अध्याप्ति अधिकारी, अयोध्या
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अनुमोदन मिलने के बाद किसानों से जमीनों की रजिस्ट्री का काम शुरू हो जाएगा। जमीन की व्यवस्था के लिए चार सौ करोड़ रुपये यहां पहले से उपलब्ध है। एयरपोर्ट के विकसित होने से रामनगरी के साथ ही पूरे इलाके के विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
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हवाई पट्टी को सिविल एयरपोर्ट के रूप में विकसित किए जाने को लेकर सांसद लल्लू सिंह प्रयासरत हैं। इसे आरसीएस योजना के तहत विकसित किए जाने का मास्टर प्लान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पहले ही तैयार कर लिया है। लंबी प्रक्रिया के बाद एयरपोर्ट के लिए अब अंतिम रूप तहसील की टीम ने जमीन के सर्वे के साथ ही भूमि का मूल्यांकन करके रिपोर्ट दे दी।
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एयरपोर्ट के विस्तार के लिए तीन चरणों में कुल लगभग 464 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है। मौजूदा समय में हवाई पट्टी के कब्जे में लगभग 177.62 एकड़ भूमि उपलब्ध है। शेष जमीन की व्यवस्था अधिग्रहण या क्रय करके किए जाने का प्रस्ताव है। यह जमीनें हवाई पट्टी के इर्दगिर्द तीन गांवों की हैं।
इनमें एयरपोर्ट से सटे जनौरा, गंजा और धर्मपुर सहादत शामिल हैं लेकिन प्रशासन ने पहले चरण में केवल दो गांवों जनौरा और गंजा की जमीन का सर्वे कराया है। इन दो गांवों के किसानों ने अपनी जमीन देने की सहमति प्रदान कर दी थी लेकिन धर्मपुर सहादत गांव के किसानों ने अपनी जमीन देने की सहमति नहीं दी थी।
इसलिए इस गांव की जमीन का सर्वे और मूल्यांकन नहीं कराया गया। जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के लिए पहले चरण में गंजा और जनौरा की लगभग 80 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया है। जमीन के क्रय या अधिग्रहण के साथ इस पर मौजूद भवन और पेड़ों पर कुल लगभग 525 करोड़ रुपये का खर्च आने वाला है।
इसमें कुछ जमीन ग्राम समाज और शिक्षा विभाग की है इसका पुनर्ग्रहण किया जाएगा। इन जमीनों का सर्किल रेट के हिसाब से मूल्यांकन करके अनुमोदन के लिए पत्र शासन को भेज दिया गया। अनुमोदन के बाद किसानों से जमीन की रजिस्ट्री का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पहले चरण में एयरपोर्ट से उड़ेंगे छोटे विमान
श्रीराम एयरपोर्ट के विस्तार के बाद पहले छोटे विमान उड़ाने की योजना है। इसके तहत एटीआर 72 क्यू/400 विमान शामिल हैं। यह 72 से 78 सीटर होते हैं। जिला प्रशासन ने इसी के मद्देनजर पहले चरण में 80 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की है। इसे किसानों से अधिग्रहण या क्रय की जाएगी।
प्रशस्त होगा पर्यटन और विकास का मार्ग
एयरपोर्ट के विस्तार से क्षेत्र का विकास ही नहीं होगा बल्कि रामनगरी अयोध्या सीधे देश के विभिन्न क्षेत्रों से वायु मार्ग से जुड़ जाएगी। यहां श्रद्धालु और पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। पर्यटन का और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। देश-विदेश में रहने वाले आसपास के कई जिलों फैजाबाद, सुल्तानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर, बस्ती, गोंडा सहित अन्य जिलों के लोगों को सीधे यहां पहुंचने के लिए वायु मार्ग की सुविधा मिलेगी।
क्या है आरसीएस योजना
यह ज्यादा से ज्यादा लोगों को वायुमार्ग से यात्रा के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। नागर विमानन मंत्रालय ने इसके लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की यह योजना लागू की गई है। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों के एयरपोर्ट को जोड़ा जाता है।
प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए तहसील की टीम ने अंतिम रूप से सर्वे और मूल्यांकन कर लिया है। पहले चरण में दो गांवों की 80 हेक्टेयर भूमि के साथ भवन और पेड़ों का कुल मूल्यांकन 525 करोड़ रूपये किया गया है। शासन स्तर से भी इतनी जमीन से काम चल जाना माना गया है। इसे शासन को भेजा गया है। इसके वापस आने के साथ ही किसानों से जमीनों की रजिस्ट्री शुरू करा दी जाएगी।
-जेपी सिंह, भूमि अध्याप्ति अधिकारी, अयोध्या