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नोटबंदी के बाद डाकघरों में खुले 6787 खाते
फैजाबाद
Updated Sat, 26 Nov 2016 10:19 PM IST
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फैजाबाद-शनिवार को डाकघर में अपने खाते खुलवाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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हजार व पांच सौ के नोट बंद होने के बाद बैंकों में उमड़ी भीड़ व अफरातफरी का फायदा डाकघरों को मिल रहा है। इससे पहले कमोबेश सन्नाटे में डूबे रहने वाले डाकघरों में रौनक आ गई है। खाता खुलवाने के लिए पहले डाक कर्मियों को पापड़ बेलने पड़ते थे लेकिन नौ नवंबर से लोग खुद-ब-खुद खाता खोलने के लिए कतार में हैं।
फैजाबाद व अंबेडकरनगर जिले में दो प्रधान डाकघर सहित 88 उप डाकघर हैं। प्रधान डाकघर फैजाबाद और अंबेडकरनगर मुख्यालय में है। आठ नवंबर के पहले डाकघरों में खाता खुलने की गति बेहद कमजोर थी। नवंबर माह में अभी तक कुल 7103 नए खाते खोले गए हैं।
एक नवंबर से आठ नवंबर के बीच 316 खाते खुल थे जबकि नौ नवंबर से 26 नवंबर के बीच 6787 नए खाते खुल गए। डाक घरों में बचत खाता खोलने के प्रति इतनी ज्यादा रुचि पहली बार देखी जा रही है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी आबादी काफी अधिक है जो कि घर में रखे जरूरत के रुपयों को नगद के रूप में अपने पास ही रखती है।
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जानकार बताते हैं कि जब नोटबंदी लागू हुई तो इन रुपयों के सदुपयोग के लिए ग्रामीणों ने खुद के खाता खुलवाने को प्राथमिकता दी। इसी वजह से कमोबेश सन्नाटे में रहने वाले डाकघरों की चकल्लस बढ़ गई है।
दोनों प्रधान डाकघर कार्यालय से लेकर विभिन्न उप डाकघरों में खूब खाते खुल रहे हैं। डाक कर्मियों को लक्ष्य पूरा करने के लिए जगह-जगह कैंप लगाने पड़ते थे लेकिन अब लोग स्वत: खाता खुलवाने के लिए प्रेरित हुए हैं। गांव के साथ ही शहर के लोग भी डाकघरों में खाता खुलवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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फैजाबाद व अंबेडकरनगर जिले में दो प्रधान डाकघर सहित 88 उप डाकघर हैं। प्रधान डाकघर फैजाबाद और अंबेडकरनगर मुख्यालय में है। आठ नवंबर के पहले डाकघरों में खाता खुलने की गति बेहद कमजोर थी। नवंबर माह में अभी तक कुल 7103 नए खाते खोले गए हैं।
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एक नवंबर से आठ नवंबर के बीच 316 खाते खुल थे जबकि नौ नवंबर से 26 नवंबर के बीच 6787 नए खाते खुल गए। डाक घरों में बचत खाता खोलने के प्रति इतनी ज्यादा रुचि पहली बार देखी जा रही है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी आबादी काफी अधिक है जो कि घर में रखे जरूरत के रुपयों को नगद के रूप में अपने पास ही रखती है।
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जानकार बताते हैं कि जब नोटबंदी लागू हुई तो इन रुपयों के सदुपयोग के लिए ग्रामीणों ने खुद के खाता खुलवाने को प्राथमिकता दी। इसी वजह से कमोबेश सन्नाटे में रहने वाले डाकघरों की चकल्लस बढ़ गई है।
दोनों प्रधान डाकघर कार्यालय से लेकर विभिन्न उप डाकघरों में खूब खाते खुल रहे हैं। डाक कर्मियों को लक्ष्य पूरा करने के लिए जगह-जगह कैंप लगाने पड़ते थे लेकिन अब लोग स्वत: खाता खुलवाने के लिए प्रेरित हुए हैं। गांव के साथ ही शहर के लोग भी डाकघरों में खाता खुलवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।