{"_id":"126-87269","slug":"Faizabad-87269-126","type":"story","status":"publish","title_hn":"फैजाबाद कानपुर इंटरसिटी की रैक पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फैजाबाद कानपुर इंटरसिटी की रैक पहुंची
Faizabad
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
फैजाबाद। उत्तर रेलवे की ओर से फैजाबाद-कानपुर के बीच इंटरसिटी दौड़ाने की कवायद शनिवार को तेज दिखी। वाशिंग लाइन की कमियों को दूर करने के लिए जहां इंजीयिरिंग का निर्माण विभाग मुस्तैदी से जुटा रहा, वहीं रविवार को आने वाले इंटरसिटी के कोच एक दिन पहले ही शनिवार को आ गए। वाशिंग लाइन को रविवार को फिट करके स्टेशन अधीक्षक और कोचिंग डिपो कार्यालय के हवाले करने की उम्मीदें हैं। वाशिंग लाइन पर पिट बनाने का कार्य अभी भी पूरा नहीं हो सका है। अब इसे धीरे धीरे बनाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार नार्दर्न रेलवे के पास अपने कोच न होने पर उसने नए कोचों को उत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) से उधार में लिया है। डेढ़-दो महीने बाद इनके स्थान पर फैजाबाद-दिल्ली की तरह उत्तर रेलवे पुराने कोचों को यहां भेजेगा। स्टेशन अधीक्षक जीपी सिंह और सीडीओ बीपी मिश्र ने इंटर सिटी के दस कोच फैजाबाद आने की बात कही। कोचे एनएफआर की होने और बाद में वापस होने के सवाल पर कहा, पहले आने तो दीजिए। आने के बाद वापस कौन भेजता है। कोच किसी भी रेलवे के हों, अब नहीं जाने वाली। उधर सीनियर सेक्शन इंजीनियर एसआरआर रिजवी वाशिंग लाइन को ओके कराने की मशक्कत में जुटे रहे।
गैंगमैन नई पटरियों का नट-बोल्ट कसते तो मजदूर वाशिंग लाइन की सफाई करते रहे। पिट ढालने के लिए पुराने ईंटों से बनाए जा रहे पिलर के सवाल पर कहा कि यह सही है कि पिलर नई ईटों का बनना था। दो दिन पहले आए मंडल अभियंता-पंचम फखरुद्दीन ने भी पुरानी ईट के पिलरों को देखा था। ऐसा धन कम मिलने की वजह से हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार नार्दर्न रेलवे के पास अपने कोच न होने पर उसने नए कोचों को उत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) से उधार में लिया है। डेढ़-दो महीने बाद इनके स्थान पर फैजाबाद-दिल्ली की तरह उत्तर रेलवे पुराने कोचों को यहां भेजेगा। स्टेशन अधीक्षक जीपी सिंह और सीडीओ बीपी मिश्र ने इंटर सिटी के दस कोच फैजाबाद आने की बात कही। कोचे एनएफआर की होने और बाद में वापस होने के सवाल पर कहा, पहले आने तो दीजिए। आने के बाद वापस कौन भेजता है। कोच किसी भी रेलवे के हों, अब नहीं जाने वाली। उधर सीनियर सेक्शन इंजीनियर एसआरआर रिजवी वाशिंग लाइन को ओके कराने की मशक्कत में जुटे रहे।
विज्ञापन
गैंगमैन नई पटरियों का नट-बोल्ट कसते तो मजदूर वाशिंग लाइन की सफाई करते रहे। पिट ढालने के लिए पुराने ईंटों से बनाए जा रहे पिलर के सवाल पर कहा कि यह सही है कि पिलर नई ईटों का बनना था। दो दिन पहले आए मंडल अभियंता-पंचम फखरुद्दीन ने भी पुरानी ईट के पिलरों को देखा था। ऐसा धन कम मिलने की वजह से हो रहा है।
विज्ञापन