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ध्वनि प्रदूषण बिगाड़ रहा लोगों की सेहत
Faizabad
Updated Thu, 29 May 2014 05:31 AM IST
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फैजाबाद। शहर की कॉलोनियां और मोहल्ले ध्वनि प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। तेज आवाज लोगों का सुख चैन छीन रहा है। आम आदमी की श्रवण शक्ति कमजोर हो रही है तो शरीर के तंत्रिकातंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। तेज आवाज के चलते लोगों में बेचैनी, घबराहट और हृदयरोग जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। अस्पताल, स्कूल, कचहरी जैसे स्थान शांत क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं। इन क्षेत्रों के लिए दिन के दौरान अधिकतम 50 डेसीबल से अधिक आवाज नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक आवाज होती है तो मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से ऐसे स्थानों पर तेज हार्न व प्रेशर हार्न बजाना मना रहता है। हालांकि बाइक से लेकर बड़े वाहनों में प्रेशर हार्न का चलन बढ़ा है। इसके चलते आवासीय कॉलोनियां भी ध्वनि प्रदूषण की गिरफ्त में आ गई हैं। घरों में तीव्र आवाज से बजने वाले साउंड व मनोरंजन के लिए प्रयुक्त होनी वाली टीवी सौ से सवा सौ डेसीबल आवाज पैदा करती हैं। जबकि इन क्षेत्रों के लिए दिन में 55 डेसीबल और रात्रि के समय 45 डेसीबल से अधिक आवाज नहीं होनी चाहिए। गर्मियों में चलने वाले कूलर और बिजली के अभाव में चलने वाले जनरेटर भी ध्वनि प्रदूषण के कारक के रूप में माने जाते हैं। कमर्शियल क्षेत्र के लिए आवाज की दर दिन में 65 और रात्रि में 55 डेसीबल निर्धारित है, लेकिन इन क्षेत्रों में 175 से 200 डेसीबल तक की आवाज सुनी जाती है।
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