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भैंसों की नस्ल सुधारने की आड़ में घपला

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Faizabad
Faizabad Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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फैजाबाद/कुमारगंज। नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पूर्वांचल के जनपदों में भैंसों के नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के नाम पर मिले तीन करोड़ रुपये में बड़ा घपला किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत आए धन की इस कदर हेराफेरी की गई कि साधारण भैंसों को नस्लीय प्रजाति (मुर्रा) बता दिया गया। उन भैंसों का डीएनए टेस्ट कराया गया, तो वैज्ञानिकों के कारनामे की पोल खुल गई। नतीजतन, वैज्ञानिकों के इस कृत्य से नाराज आईसीएआर ने परियोजना बिहार प्रांत को सौंप दी।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने पूर्वांचल के जनपदों के किसानों व पशुपालकों के हितार्थ एक बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजना ‘नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन बफैलो’ वर्ष 2001 में नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय को सौंपी थी। परियोजना का उद्देश्य पूर्वांचल में भैंसों की नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना था। इसके तहत संतति परीक्षण कर मुर्रा नस्ल के भैंसे का चयन किया जाना था। इन भैंसों से प्रजनन करा मुर्रा प्रजाति की मादा भैंसों की संख्या में इजाफा कराना था। मुर्रा नस्ल की भैंसों के जरिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलता। आईसीएआर की यह परियोजना लगभग तीन करोड़ रुपये की थी। परियोजना में कृषि विवि के पशुपालन एवं पशुचिकित्सा महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. वीके सिंह मुख्य अन्वेषक तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशांत श्रीवास्तव सहायक अन्वेषक नियुक्त किए। परियोजना लगभग दस वर्षों तक चलती रही, मगर अपने उद्देश्यों से कतई दूर रही। वजह यह कि परियोजना के वैज्ञानिकों की ओर से प्रतिवर्ष की वार्षिक रिपोर्ट में जो आंकड़े प्रस्तुत किए जाते रहे, वह सत्यता से परे रहे। बीते वर्ष जब आईसीएआर ने भैंसों का डीएनए टेस्ट कराया, जिन्हें नस्लीय और मुर्रा प्रजाति का बताया गया था, तो उनमें मुर्रा के लक्षण ही नहीं मिले। वैज्ञानिकों के इस कृत्य पर आईसीएआर ने कड़ी आपत्ति जता परियोजना सितंबर 2011 में बंद कर दी। अंतत: अब उक्त परियोजना को बिहार प्रांत के किसी विवि को स्थानांतरित कर दी गई। इसकी पुष्टि अधिष्ठाता पशुपालन डाॅ. हरिनाम सिंह भी करते हैं। बताया कि अब उक्त परियोजना को आईसीएआर ने छीन कर बिहार को सौंप दिया है।
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