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नए भारत निर्माण का विजन है इक्ष्वाकुवंशीय सम्मेलन : इन्द्रेश
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:31 AM IST
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रामनगरी अयोध्या में दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ
अयोध्या। राष्ट्रभक्ति ही भारत की ताकत है। दुनिया के अधिकांश देशों में राम के नाम पर कुछ न कुछ जरूर है, अयोध्या में आयोजित ये इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन नए भारत के निर्माण की दिशा तय करेगा। ये बातें आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश जी ने कहीं।
वे अयोध्या के बड़ा भक्तमाल में नेपाली संस्कृति परिषद के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
इंद्रेश जी ने कहा कि, सभी धर्मों को एकसाथ मिलकर जीवन जीने के रास्ते पर लाया जा सकता है और ऐसे सर्वपंथीय सम्मेलन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कहा कि, नए भारत के निर्माण का विजन है इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन।
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उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं, एक जन, एक परंपराओं व एक पूर्वजों के हैं। इक्ष्वाकु ने प्रथम राज्य बनाया, जिसमें अत्याचार, अन्याय नहीं था, सभी प्रसन्न थे, प्राणियों में सद्भाव था इसी को भारत कहा गया।
सम्मेलन में मो. इरफान ने कहा कि, हम मुसलमान, ईसाई, सिख एवं हिंदू बाद में हैं पहले भारतीय हैं। उन्होंने मंच से संस्कृत के कुछ श्लोक एवं गायत्री मंत्र पढ़े तो अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब पुष्ट हुई।
जगद्गुरु संतोषी महाराज ने कहा कि, सबसे बड़ी समस्या भिन्नता है। राम की भक्ति के साथ राष्ट्र की भक्ति भी जरूरी है। अपने घर से सबसे पहले भारतीय संस्कृति, एकता, सभ्यता के ज्ञान का बोध कराना होगा।
भारतीय संस्कृति सर्वधर्म के सम्मान की सीख देती है। भिक्षुक शीलसागर ने कहा कि, इक्ष्वाकु भारत का पहला वंश है। भगवान राम भी इसी वंश के थे। सम्मेलन का संचालन नेपाली संस्कृति परिषद के महासचिव नारायण शर्मा ने किया।
सम्मेलन को महंत सिया किशोरी शरण, ईश्वर चैतन्य, ज्ञानी गुरुजीत सिंह, महंत अवधेश दास सहित अन्य ने भी संबोधित किया। नेपाली संस्कृति परिषद के अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने अतिथियों का स्वागत किया।
सम्मेलन में मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता, हर्क बहादुर, सुरेश जैन, जगनैन सिंह, निशेंद्र मोहन मिश्र, विजय बहादुर सिंह, नितिन चतुर्वेदी के अलावा नेपाल सहित देश के विभिन्न प्रांतों से विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
26 को अयोध्या पहुंचेगी गौ सेवा सद्भावना पदयात्रा
गौ सेवा व गौभक्ति की भावना विकसित करने के लिए मोहम्मद फैज द्वारा गौ सेवा सद्भावना पदयात्रा रायपुर से निकाली गई है। 12 हजार किलोमीटर की इस पदयात्रा में अब तक 1800 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी है। पदयात्रा नवरात्र पर 26 सितंबर को अयोध्या पहुंच सकती है।
राममंदिर का निर्माण सांप्रदायिक आस्थाओं से ऊपर : आशीष कुमार
अयोध्या। इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन में राष्ट्रीय ईसाई संघ के पदाधिकारी डॉ. आशीष कुमार सिंह मैसी ने कहा कि, अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर धार्मिक और सांप्रदायिक आस्थाओं से ऊपर है। कहा कि, ये निर्विवाद सत्य है कि सनातन विरासत का केंद्र अयोध्या ही है।
राम जन्मभूमि भी यही है, इसलिए मंदिर भी यहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि, मोदी जी एवं योगी जी के प्रयासों से ये वातावरण निर्मित होने लगा है। इसी की कोख से उपजे भाव के कारण ही आज मुस्लिम एवं ईसाई भी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पक्षधर बन रहे हैं।
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अयोध्या। राष्ट्रभक्ति ही भारत की ताकत है। दुनिया के अधिकांश देशों में राम के नाम पर कुछ न कुछ जरूर है, अयोध्या में आयोजित ये इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन नए भारत के निर्माण की दिशा तय करेगा। ये बातें आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश जी ने कहीं।
वे अयोध्या के बड़ा भक्तमाल में नेपाली संस्कृति परिषद के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
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इंद्रेश जी ने कहा कि, सभी धर्मों को एकसाथ मिलकर जीवन जीने के रास्ते पर लाया जा सकता है और ऐसे सर्वपंथीय सम्मेलन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कहा कि, नए भारत के निर्माण का विजन है इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन।
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उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं, एक जन, एक परंपराओं व एक पूर्वजों के हैं। इक्ष्वाकु ने प्रथम राज्य बनाया, जिसमें अत्याचार, अन्याय नहीं था, सभी प्रसन्न थे, प्राणियों में सद्भाव था इसी को भारत कहा गया।
सम्मेलन में मो. इरफान ने कहा कि, हम मुसलमान, ईसाई, सिख एवं हिंदू बाद में हैं पहले भारतीय हैं। उन्होंने मंच से संस्कृत के कुछ श्लोक एवं गायत्री मंत्र पढ़े तो अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब पुष्ट हुई।
जगद्गुरु संतोषी महाराज ने कहा कि, सबसे बड़ी समस्या भिन्नता है। राम की भक्ति के साथ राष्ट्र की भक्ति भी जरूरी है। अपने घर से सबसे पहले भारतीय संस्कृति, एकता, सभ्यता के ज्ञान का बोध कराना होगा।
भारतीय संस्कृति सर्वधर्म के सम्मान की सीख देती है। भिक्षुक शीलसागर ने कहा कि, इक्ष्वाकु भारत का पहला वंश है। भगवान राम भी इसी वंश के थे। सम्मेलन का संचालन नेपाली संस्कृति परिषद के महासचिव नारायण शर्मा ने किया।
सम्मेलन को महंत सिया किशोरी शरण, ईश्वर चैतन्य, ज्ञानी गुरुजीत सिंह, महंत अवधेश दास सहित अन्य ने भी संबोधित किया। नेपाली संस्कृति परिषद के अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने अतिथियों का स्वागत किया।
सम्मेलन में मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता, हर्क बहादुर, सुरेश जैन, जगनैन सिंह, निशेंद्र मोहन मिश्र, विजय बहादुर सिंह, नितिन चतुर्वेदी के अलावा नेपाल सहित देश के विभिन्न प्रांतों से विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
26 को अयोध्या पहुंचेगी गौ सेवा सद्भावना पदयात्रा
गौ सेवा व गौभक्ति की भावना विकसित करने के लिए मोहम्मद फैज द्वारा गौ सेवा सद्भावना पदयात्रा रायपुर से निकाली गई है। 12 हजार किलोमीटर की इस पदयात्रा में अब तक 1800 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी है। पदयात्रा नवरात्र पर 26 सितंबर को अयोध्या पहुंच सकती है।
राममंदिर का निर्माण सांप्रदायिक आस्थाओं से ऊपर : आशीष कुमार
अयोध्या। इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन में राष्ट्रीय ईसाई संघ के पदाधिकारी डॉ. आशीष कुमार सिंह मैसी ने कहा कि, अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर धार्मिक और सांप्रदायिक आस्थाओं से ऊपर है। कहा कि, ये निर्विवाद सत्य है कि सनातन विरासत का केंद्र अयोध्या ही है।
राम जन्मभूमि भी यही है, इसलिए मंदिर भी यहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि, मोदी जी एवं योगी जी के प्रयासों से ये वातावरण निर्मित होने लगा है। इसी की कोख से उपजे भाव के कारण ही आज मुस्लिम एवं ईसाई भी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पक्षधर बन रहे हैं।