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7.82 करोड़ खर्च के बाद भी कूड़े से पटी राम की पैड़ी
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7.82 करोड़ खर्च के बाद भी कूड़े से पटी राम की पैड़ी
अयोध्या। दीपोत्सव से पूर्व 7.82 करोड़ खर्च कर सजाई-संवारी गई राम की पैड़ी की दुर्दशा एक बार फिर शुरू हो गई है। एक तरफ तो राम की पैड़ी की अविरलता के लिए 30 करोड़ का काम चल रहा है।
दूसरी तरफ पैड़ी परिसर की सफाई व्यवस्था दीपोत्सव के बाद करीब दो माह से ठप है। नगर निगम सफाई का ठीकरा सिंचाई विभाग पर फोड़ रहा है, जबकि सिंचाई विभाग यह जिम्मेदारी नगर निगम की मान रहा है।
खींचतान के चलते जगह-जगह गंदगी का साम्राज्य कायम है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, खुले मेनहोल, जलभराव सहित विचरण करते छुट्टा जानवर पैड़ी की दुर्दशा की कहानी बयां कर रहे हैं। इन सबके बीच रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।
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नवंबर माह में संपन्न हुए दीपोत्सव में राम की पैड़ी आकर्षण का केंद्र रही। 7.89 करोड़ खर्च कर राम की पैड़ी का सुंदरीकरण कराया गया था। पैड़ी परिसर में लेजर शो, 30 फिट की श्रीराम मूर्ति व 16 फिट की आराधना मुद्रा में हनुमान की मूर्ति का आकर्षण पूरे विश्व ने देखा।
यहां तीन लाख दीप जलाकर रामनगरी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपने नाम दर्ज कराया था, लेकिन वर्तमान में राम की पैड़ी दुर्दशा का शिकार हो गई है। यहां नगर निगम एवं सिंचाई विभाग के आपसी खींचतान के चलते झाड़ूू तक नहीं लग पा रही है।
पैड़ी परिसर में प्रवेश करते ही जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे नजर आते हैं। गांधी पार्क से लेकर शेषावतार मंदिर तक करीब आधा दर्जन खुले मेनहोल दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। परिसर में छुट्टा जानवर विचरण करते नजर आते हैं।
रोजाना सरयू में डुबकी लगाने वाले साधु-संत और स्थानीय निवासियों का कहना है कि दीपोत्सव के बाद से ही सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्थानीय निवासी महेंद्र शुक्ल बताते हैं कि नगर निगम पहले झाड़ू लगवाने के साथ कूड़ा उठवाता था, मगर अब सफाई कर्मचारी नहीं दिखते हैं।
प्रकाश व्यवस्था भी ध्वस्त है। महंत जयजयराम पाठक, संत बृजमंगल शुक्ला कहते हैं नागेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना, अभिषेक के लिए हमें गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है।
राम की पैड़ी पर पौराणिक नागेश्वरनाथ मंदिर से करीब 100 मीटर पहले की कूड़े का ढेर लगा है। मंदिर के आगे बढ़ने पर शेषावतार मंदिर पहुंचने से पूर्व ही कई स्थानों पर जलभराव व कूड़े का ढेर है। यह स्थिति तब है जब प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन को आते हैं।
गांधी आश्रम से लेकर लक्ष्मणघाट तक दीपोत्सव के दौरान मेनहोलों की मरम्मत कराई गई थी। जिनमें से अधिकांश टूट गए हैं। जिसके चलते हमेशा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्यों का आवागमन होता रहा है।
नगर निगम के मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक विमल मिश्र कहते हैं कि नियमित सफाई की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। वह अपने कर्मी लगाकर सफाई कराते रहे हैं। अब नहीं कराते तो हम क्या करें।
बावजूद इसके शासन-प्रशासन के आदेश पर हम समय-समय पर इमरजेंसी गैंग लगाकर पैड़ी परिसर व आसपास की सफाई कराते रहते हैं। सिंचाई विभाग के अभियंता मनोज सिंह कहते हैं कि सफाई कर्मी नगर निगम के पास है।
पैड़ी अयोध्या के धार्मिक गौरव की प्रतीक है। यहां नियमित झाड़ू व कूड़े का निस्तारण उनके सफाई गैंग का का है। रही बात सिंचाई विभाग की तो वर्तमान में सरयू नहर खंड का पैड़ी परिसर में काम चल रहा है, उसे सफाई कराना चाहिए।
सरयू तट पर महिलाओं के लिए बनाए गए करीब एक एक दर्जन प्रसाधन केंद्रों में से अधिकांश बदहाल हैं। चेंज रूम के आसपास भी गंदगी का ढेर लगा रहता है। यही नहीं छुट्टा जानवर भी प्रसाधन केंद्र में अपना शरण बना लेते हैं।
स्थानीय पंडा ओमप्रकाश बताते हैं कि सरयू स्नान को आने वाले महिलाओं के बनाए गए यह प्रशासन केंद्र बदहाल हैं। गंदगी के चलते महिलाओं को वस्त्र बदलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय-समय पर इन प्रसाधन केंद्रों की सफाई होनी चाहिए।
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अयोध्या। दीपोत्सव से पूर्व 7.82 करोड़ खर्च कर सजाई-संवारी गई राम की पैड़ी की दुर्दशा एक बार फिर शुरू हो गई है। एक तरफ तो राम की पैड़ी की अविरलता के लिए 30 करोड़ का काम चल रहा है।
दूसरी तरफ पैड़ी परिसर की सफाई व्यवस्था दीपोत्सव के बाद करीब दो माह से ठप है। नगर निगम सफाई का ठीकरा सिंचाई विभाग पर फोड़ रहा है, जबकि सिंचाई विभाग यह जिम्मेदारी नगर निगम की मान रहा है।
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खींचतान के चलते जगह-जगह गंदगी का साम्राज्य कायम है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, खुले मेनहोल, जलभराव सहित विचरण करते छुट्टा जानवर पैड़ी की दुर्दशा की कहानी बयां कर रहे हैं। इन सबके बीच रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।
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नवंबर माह में संपन्न हुए दीपोत्सव में राम की पैड़ी आकर्षण का केंद्र रही। 7.89 करोड़ खर्च कर राम की पैड़ी का सुंदरीकरण कराया गया था। पैड़ी परिसर में लेजर शो, 30 फिट की श्रीराम मूर्ति व 16 फिट की आराधना मुद्रा में हनुमान की मूर्ति का आकर्षण पूरे विश्व ने देखा।
यहां तीन लाख दीप जलाकर रामनगरी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपने नाम दर्ज कराया था, लेकिन वर्तमान में राम की पैड़ी दुर्दशा का शिकार हो गई है। यहां नगर निगम एवं सिंचाई विभाग के आपसी खींचतान के चलते झाड़ूू तक नहीं लग पा रही है।
पैड़ी परिसर में प्रवेश करते ही जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे नजर आते हैं। गांधी पार्क से लेकर शेषावतार मंदिर तक करीब आधा दर्जन खुले मेनहोल दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। परिसर में छुट्टा जानवर विचरण करते नजर आते हैं।
रोजाना सरयू में डुबकी लगाने वाले साधु-संत और स्थानीय निवासियों का कहना है कि दीपोत्सव के बाद से ही सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्थानीय निवासी महेंद्र शुक्ल बताते हैं कि नगर निगम पहले झाड़ू लगवाने के साथ कूड़ा उठवाता था, मगर अब सफाई कर्मचारी नहीं दिखते हैं।
प्रकाश व्यवस्था भी ध्वस्त है। महंत जयजयराम पाठक, संत बृजमंगल शुक्ला कहते हैं नागेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना, अभिषेक के लिए हमें गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है।
राम की पैड़ी पर पौराणिक नागेश्वरनाथ मंदिर से करीब 100 मीटर पहले की कूड़े का ढेर लगा है। मंदिर के आगे बढ़ने पर शेषावतार मंदिर पहुंचने से पूर्व ही कई स्थानों पर जलभराव व कूड़े का ढेर है। यह स्थिति तब है जब प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन को आते हैं।
गांधी आश्रम से लेकर लक्ष्मणघाट तक दीपोत्सव के दौरान मेनहोलों की मरम्मत कराई गई थी। जिनमें से अधिकांश टूट गए हैं। जिसके चलते हमेशा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्यों का आवागमन होता रहा है।
नगर निगम के मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक विमल मिश्र कहते हैं कि नियमित सफाई की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। वह अपने कर्मी लगाकर सफाई कराते रहे हैं। अब नहीं कराते तो हम क्या करें।
बावजूद इसके शासन-प्रशासन के आदेश पर हम समय-समय पर इमरजेंसी गैंग लगाकर पैड़ी परिसर व आसपास की सफाई कराते रहते हैं। सिंचाई विभाग के अभियंता मनोज सिंह कहते हैं कि सफाई कर्मी नगर निगम के पास है।
पैड़ी अयोध्या के धार्मिक गौरव की प्रतीक है। यहां नियमित झाड़ू व कूड़े का निस्तारण उनके सफाई गैंग का का है। रही बात सिंचाई विभाग की तो वर्तमान में सरयू नहर खंड का पैड़ी परिसर में काम चल रहा है, उसे सफाई कराना चाहिए।
सरयू तट पर महिलाओं के लिए बनाए गए करीब एक एक दर्जन प्रसाधन केंद्रों में से अधिकांश बदहाल हैं। चेंज रूम के आसपास भी गंदगी का ढेर लगा रहता है। यही नहीं छुट्टा जानवर भी प्रसाधन केंद्र में अपना शरण बना लेते हैं।
स्थानीय पंडा ओमप्रकाश बताते हैं कि सरयू स्नान को आने वाले महिलाओं के बनाए गए यह प्रशासन केंद्र बदहाल हैं। गंदगी के चलते महिलाओं को वस्त्र बदलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय-समय पर इन प्रसाधन केंद्रों की सफाई होनी चाहिए।