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नए शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
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नए शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
अयोध्या। अपने बच्चों के भविष्य की बेहतरी के सपने संजोए अभिभावकों की जेब पर नए शैक्षिक सत्र में बोझ बढ़ने लगा है। अभिभावकों की जेबें स्कूलों की बढ़ी फीस से और ढीली होने वाली हैं।
शहर के सभी नामी स्कूलों ने अपनी फीस में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। इसके अलावा कॉपी-किताब, स्टेशनरी, ड्रेस, जूता-मोजा, यातायात शुल्क आदि में भी वृद्धि की गई है।
स्कूल प्रबंधन इंफ्राक्सट्रचर व टीचर के वेतन आदि का हवाला देते हुए इस वृद्धि को उचित बता रहे हैं। लेकिन पहले से ही अधिक शुल्क जमा कर पाने में असमर्थ अभिभावकों के लिए और संकट खड़ा हो गया है।
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बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए मजबूर और लाचार अभिभावक बढ़ी फीस देने को मजबूर हैं। इसको लेकर अभिभावकों में रोष तो है, लेकिन मजबूरी के चलते वे विवश हैं और खुलकर बोलने से भी कतराते हैं।
शुल्क के साथ ही स्कूलों ने ट्रांसपोर्ट, एडमीशन शुल्क आदि में वृद्धि की है। इसके अलावा निर्धारित दुकानों से ही किताब-कॉपी, ड्रेस आदि खरीदने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। जहां पर अभिभावकों को किसी प्रकार छूट भी देय नहीं है।
शहर के प्रतिष्ठित स्कूल जिंगल बेल एकेडमी के शुल्क में इस बार करीब नौ प्रतिशत का इजाफा किया गया है। शुल्क प्रारूप बाकायदा स्कूल की वेबसाइट पर दर्शाया गया है। सिर्फ प्रवेश शुल्क के नाम पर ही 25 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
यहां इस बार कक्षा छह की फीस 17300, कक्षा नौ की फीस 16700 से बढ़ाकर 18200 तिमाही कर दी गई है। किताबें भी निर्धारित दुकानों से ही मिलती है। जिसके लिए बच्चों को लिस्ट थमा दी जाती है।
मासिक फीस के साथ ही स्कूलों में एडमीशन, ट्यूशन फीस, कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास की फीस के साथ-साथ कई अन्य मदों में भी अभिभावकों की जेबें ढीली की जा रही हैं।
इस बार रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर एक हजार, एडमीशन शुल्क 25 हजार, कक्षा 11 काउंसलिंग मद में 450 रुपये, बोर्ड एग्जाम के लिए 1200, एलुमनी फंड के रूप में 500 रुपये लिए जा रहे हैं। प्रधानाचार्य अशोक तिवारी ने बताया कि नियमानुसार शुल्क में वृद्धि की गई है।
उदया पब्लिक स्कूल में इस बार सभी कक्षाओं के शुल्क में 8.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। स्कूल के चेयरमैन डॉ. चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि मानक व नियम-कानून को ध्यान में रखते हुए शुल्क दर में वृद्धि की गई है।
इसके अलावा बच्चों से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाता है। नए सत्र में अभिभावकों की जेब पर स्कूलों की फीस के साथ बच्चों के बस्ते का बोझ भी भारी पड़ने वाला है। कॉपी-किताबों की कीमतों में पिछले वर्ष के मुकाबले 20 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है।
शासन के निर्देश के बावजूद भी कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। वहीं यूनिफार्म की कीमतों में भी करीब 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है।
जिला अस्पताल के निकट स्थित एक किताब विक्रेता ने बताया कि इस बार कागज के दामों में बढ़ोत्तरी के कारण कॉपी-किताब के दाम में भी 10-15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
कॉपी व किताबों की कीमतें
कक्षा गतवर्ष की कीमत इस वर्ष
प्री प्राइमरी 2000 2500/3000
एक से पांच 3000 3500/4000
छह से आठ 3500 4000/4700
नौ से 12 5000 5500/6200
यूनिफॉर्म की कीमतें (एक सेट)
कक्षा गतवर्ष की कीमत इस बार
प्री प्राइमरी 350 500/700
एक से पांच 400 550/750
छह से आठ 500 650/850
नौ से 12 800 1000/1200
निजी विद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल कुमार सिंह व सचिव डॉ. चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार निजी स्कूलों में शुल्क आदि निर्धारण पर सरकार का कोई दखल नहीं है।
प्रतिवर्ष महंगाई में वृद्धि हो रही है। इसी के मद्देनजर शुल्क में 8 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जो नियम-कानून के दायरे में है। जिला विद्यालय निरीक्षक आरबी सिंह चौहान ने बताया कि निजी स्कूलों में शुल्क नियंत्रण को लेकर अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन कोई स्कूल कॉपी-किताब, ड्रेस आदि के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। शिकायत मिलने पर ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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अयोध्या। अपने बच्चों के भविष्य की बेहतरी के सपने संजोए अभिभावकों की जेब पर नए शैक्षिक सत्र में बोझ बढ़ने लगा है। अभिभावकों की जेबें स्कूलों की बढ़ी फीस से और ढीली होने वाली हैं।
शहर के सभी नामी स्कूलों ने अपनी फीस में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। इसके अलावा कॉपी-किताब, स्टेशनरी, ड्रेस, जूता-मोजा, यातायात शुल्क आदि में भी वृद्धि की गई है।
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स्कूल प्रबंधन इंफ्राक्सट्रचर व टीचर के वेतन आदि का हवाला देते हुए इस वृद्धि को उचित बता रहे हैं। लेकिन पहले से ही अधिक शुल्क जमा कर पाने में असमर्थ अभिभावकों के लिए और संकट खड़ा हो गया है।
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बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए मजबूर और लाचार अभिभावक बढ़ी फीस देने को मजबूर हैं। इसको लेकर अभिभावकों में रोष तो है, लेकिन मजबूरी के चलते वे विवश हैं और खुलकर बोलने से भी कतराते हैं।
शुल्क के साथ ही स्कूलों ने ट्रांसपोर्ट, एडमीशन शुल्क आदि में वृद्धि की है। इसके अलावा निर्धारित दुकानों से ही किताब-कॉपी, ड्रेस आदि खरीदने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। जहां पर अभिभावकों को किसी प्रकार छूट भी देय नहीं है।
शहर के प्रतिष्ठित स्कूल जिंगल बेल एकेडमी के शुल्क में इस बार करीब नौ प्रतिशत का इजाफा किया गया है। शुल्क प्रारूप बाकायदा स्कूल की वेबसाइट पर दर्शाया गया है। सिर्फ प्रवेश शुल्क के नाम पर ही 25 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
यहां इस बार कक्षा छह की फीस 17300, कक्षा नौ की फीस 16700 से बढ़ाकर 18200 तिमाही कर दी गई है। किताबें भी निर्धारित दुकानों से ही मिलती है। जिसके लिए बच्चों को लिस्ट थमा दी जाती है।
मासिक फीस के साथ ही स्कूलों में एडमीशन, ट्यूशन फीस, कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास की फीस के साथ-साथ कई अन्य मदों में भी अभिभावकों की जेबें ढीली की जा रही हैं।
इस बार रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर एक हजार, एडमीशन शुल्क 25 हजार, कक्षा 11 काउंसलिंग मद में 450 रुपये, बोर्ड एग्जाम के लिए 1200, एलुमनी फंड के रूप में 500 रुपये लिए जा रहे हैं। प्रधानाचार्य अशोक तिवारी ने बताया कि नियमानुसार शुल्क में वृद्धि की गई है।
उदया पब्लिक स्कूल में इस बार सभी कक्षाओं के शुल्क में 8.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। स्कूल के चेयरमैन डॉ. चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि मानक व नियम-कानून को ध्यान में रखते हुए शुल्क दर में वृद्धि की गई है।
इसके अलावा बच्चों से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाता है। नए सत्र में अभिभावकों की जेब पर स्कूलों की फीस के साथ बच्चों के बस्ते का बोझ भी भारी पड़ने वाला है। कॉपी-किताबों की कीमतों में पिछले वर्ष के मुकाबले 20 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है।
शासन के निर्देश के बावजूद भी कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। वहीं यूनिफार्म की कीमतों में भी करीब 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है।
जिला अस्पताल के निकट स्थित एक किताब विक्रेता ने बताया कि इस बार कागज के दामों में बढ़ोत्तरी के कारण कॉपी-किताब के दाम में भी 10-15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
कॉपी व किताबों की कीमतें
कक्षा गतवर्ष की कीमत इस वर्ष
प्री प्राइमरी 2000 2500/3000
एक से पांच 3000 3500/4000
छह से आठ 3500 4000/4700
नौ से 12 5000 5500/6200
यूनिफॉर्म की कीमतें (एक सेट)
कक्षा गतवर्ष की कीमत इस बार
प्री प्राइमरी 350 500/700
एक से पांच 400 550/750
छह से आठ 500 650/850
नौ से 12 800 1000/1200
निजी विद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल कुमार सिंह व सचिव डॉ. चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार निजी स्कूलों में शुल्क आदि निर्धारण पर सरकार का कोई दखल नहीं है।
प्रतिवर्ष महंगाई में वृद्धि हो रही है। इसी के मद्देनजर शुल्क में 8 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जो नियम-कानून के दायरे में है। जिला विद्यालय निरीक्षक आरबी सिंह चौहान ने बताया कि निजी स्कूलों में शुल्क नियंत्रण को लेकर अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन कोई स्कूल कॉपी-किताब, ड्रेस आदि के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। शिकायत मिलने पर ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी।