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अयोध्या में इक्ष्वाकु वंशीय लोगों का होगा जमावड़ा
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:03 AM IST
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दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज कल, देश-विदेश से जुटेंगे विद्वान
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या इक्ष्वाकु वंशीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का गवाह बनने जा रही है। अयोध्या में होने वाले इस सम्मेलन से धार्मिक सौहार्द्र की मिसाल भी बुलंद होगी। दो दिवसीय ये अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन नेपाली संस्कृति परिषद के तत्वावधान में रामनगरी अयोध्या में पहली बार होने जा रहा है।
इसमें नेपाल, भूटान व म्यांमार सहित भारत के 20 राज्यों के हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, मुसलमान व ईसाई समुदाय के विद्वानों के साथ ही इक्ष्वाकु वंशज शामिल होंगे। जबकि मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश होंगे।
इक्ष्वाकु वंश प्राचीन भारत के शासकों का एक वंश है। इनकी उत्पत्ति सूर्यवंशियों से हुई थी। ये प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। रामायण और महाभारत में इन दोनों वंशों के अनेक प्रसिद्ध शासकों का उल्लेख है। ये वंश समस्त धर्मों के महापुरुषों से अनुप्राणित है।
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इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन के संयोजक दिनेश सोनी बताते हैं कि, ‘अयोध्या एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत व इक्ष्वाकु वंश’ विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 16 व 17 सितंबर को अयोध्या के बड़ाभक्तमाल मंदिर में होगा।
इसमें मुख्य वक्ता इंद्रेश जी होंगे। जबकि जिले के जनप्रतिनिधि व संत-धर्माचार्य भी सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भजन संध्या का भी आयोजन होगा।
मनु से हुआ सूर्यवंश का आरंभ
इक्ष्वाकु वंश प्राचीन भारत के शासकों का एक वंश है। इनकी उत्पत्ति सूर्यवंशियों से हुई थी। ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्रों में से एक मरीचि थे। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के पुत्र विवस्वान या सूर्य थे, विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु थे, जिनसे सूर्यवंश का आरंभ हुआ।
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या इक्ष्वाकु वंशीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का गवाह बनने जा रही है। अयोध्या में होने वाले इस सम्मेलन से धार्मिक सौहार्द्र की मिसाल भी बुलंद होगी। दो दिवसीय ये अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन नेपाली संस्कृति परिषद के तत्वावधान में रामनगरी अयोध्या में पहली बार होने जा रहा है।
इसमें नेपाल, भूटान व म्यांमार सहित भारत के 20 राज्यों के हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, मुसलमान व ईसाई समुदाय के विद्वानों के साथ ही इक्ष्वाकु वंशज शामिल होंगे। जबकि मुख्य वक्ता आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश होंगे।
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इक्ष्वाकु वंश प्राचीन भारत के शासकों का एक वंश है। इनकी उत्पत्ति सूर्यवंशियों से हुई थी। ये प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी। रामायण और महाभारत में इन दोनों वंशों के अनेक प्रसिद्ध शासकों का उल्लेख है। ये वंश समस्त धर्मों के महापुरुषों से अनुप्राणित है।
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इक्ष्वाकु वंशीय सम्मेलन के संयोजक दिनेश सोनी बताते हैं कि, ‘अयोध्या एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत व इक्ष्वाकु वंश’ विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 16 व 17 सितंबर को अयोध्या के बड़ाभक्तमाल मंदिर में होगा।
इसमें मुख्य वक्ता इंद्रेश जी होंगे। जबकि जिले के जनप्रतिनिधि व संत-धर्माचार्य भी सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे। सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भजन संध्या का भी आयोजन होगा।
मनु से हुआ सूर्यवंश का आरंभ
इक्ष्वाकु वंश प्राचीन भारत के शासकों का एक वंश है। इनकी उत्पत्ति सूर्यवंशियों से हुई थी। ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्रों में से एक मरीचि थे। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के पुत्र विवस्वान या सूर्य थे, विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु थे, जिनसे सूर्यवंश का आरंभ हुआ।