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बैंक हड़ताल से 350 करोड़ का लेनदेन हुआ प्रभावित
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अयोध्या में सिविल लाइंस में प्रदर्शन करते यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के पदाधिकारी व अन्य।
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। बैंकिंग उद्योग के अधिकारी व कर्मचारी के नौ संगठनों के संघ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन जिले के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर ताला लटका रहा। इसके चलते जिले में करीब 350 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण व जन विरोधी बैंकिंग व आर्थिक नीतियों के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन सोमवार को जिले के राष्ट्रीयकृत बैंकों की सभी शाखाएं बंद रही। को-ऑपरेटिव बैंक खुले रहे लेकिन उनका पूरा नैतिक समर्थन हड़ताल को रहा।
निजी बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए। इस दौरान यूनियन के नेताओं व पदाधिकारियों ने बैंकों के समक्ष प्रदर्शन कर नारेबाजी भी की। इसके बाद सभी जुलूस निकालकर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिविल लाइंस स्थित शाखा पर एकत्र हुए और यहां पर जनसभा की। सभा के संयोजक सुभाषचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि हड़ताल राष्ट्रीयकृत बैंकों को कॉरपोरेट घरानों व पूंजीपतियों से बचाने समेत जन विरोधी बैंकिंग व आर्थिक नीतियों के विरोध में है।
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सह संयोजक एसपी चौबे ने कहा कि हड़ताल देश के आर्थिक ढांचे को बचाने के लिए है। सभा की अध्यक्षता कर रहे अध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि अब हम सब सड़कों पर उतर आए हैं, सरकार को निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेना होगा। मंत्री डीसी टंडन ने कहा निजीकरण स्थायी नौकरियों पर हमला और बेरोजगारी पैदा करने वाला है।
सेंट्रल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री और यूएफबीयू के संयुक्त मंत्री केके रस्तोगी ने कहा कि निजीकरण से कृषि ऋण में कमी आएगी। सीमांत और छोटे किसान कृषि कार्य से बेदखल होंगे। साथ ही बैंकों की ग्रामीण शाखाएं बंद होगी और लघु बचत योजनाएं ध्वस्त हो जाएगी। सभा में महिला बैंककर्मी अमिता श्रीवास्तव के नेतृत्व में सुशीला, निधि पांडेय, प्रियंका, निशा, नलिनी आदि ने भी बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव की आलोचना की।
इस मौके पर स्टेट बैंक के डीजीएम रूपराम तिवारी, आरआर शर्मा, रामदास, आरएस उपाध्याय समेत अन्य बैंक कर्मी व अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, सेवानिवृत्त बैंककर्मियों के संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया। एसके सिंह ने बताया कि यदि बैंकों का निजीकरण हुआ तो पूंजीपति कभी भी पेंशन योजना बंद कर सकते हैं।
लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) राजेश कुमार ने बताया कि सोमवार राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी व कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जिले में करीब 350 करोड़ का लेन देन प्रभावित हुआ है। वहीं बैंक यूनियन के पदाधिकारियों ने 500 करोड़ के लेन देन ठप होने का दावा किया है। गुरुवार को महाशिवरात्रि के कारण और उसके बाद द्वितीय शनिवार व रविवार को बैंक बंद था।
ऐसे में जिले के अधिकांश एटीएम पहले ही खाली हो गए थे। कैश के लिए परेशान लोग सोमवार को बैंक खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब सुबह वह बैंक पहुंचे तो वहां हड़ताल का बोर्ड देखकर परेशान हो गए। सबसे ज्यादा परेशानी व्यापारियों को उठानी पड़ी, वह दो दिन का कैश जमा कराने के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक की शाखा पर कैश लेने के लिए आए हैदरगंज निवासी राजकुमार गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को वह पैसा नहीं निकाल पाए थे। आज आए तो पता चला कि बैंक में दो दिन की हड़ताल है। बेटे के पास पैसा भेजना था, अब यह बुधवार को ही संभव हो पाएगा। इंडियन ओवरसीज बैंक पर मिले बुद्धिपाल प्रजापति ने बताया कि शहर के कई एटीएम में गया लेकिन कहीं कैश नहीं मिला।
बैंक आया तो यहां नारेबाजी हो रही थी। अयोध्या के रायगंज निवासी रिटायर्ड कर्मी विमलेश अवस्थी ने बताया कि पारिवारिक कार्य से वाराणसी जाना है, पैसा निकालने बैंक आए तो पता चला कि हड़ताल है। एटीएम भी खाली हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा पर मिले राजकुमार ने बताया कि आंख का ऑपरेशन कराया है, दवा आदि के लिए पैसे चाहिए थे लेकिन हड़ताल के चलते पैसा नहीं मिल पाया। एटीएम में भी रकम नहीं है।
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण व जन विरोधी बैंकिंग व आर्थिक नीतियों के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन सोमवार को जिले के राष्ट्रीयकृत बैंकों की सभी शाखाएं बंद रही। को-ऑपरेटिव बैंक खुले रहे लेकिन उनका पूरा नैतिक समर्थन हड़ताल को रहा।
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निजी बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए। इस दौरान यूनियन के नेताओं व पदाधिकारियों ने बैंकों के समक्ष प्रदर्शन कर नारेबाजी भी की। इसके बाद सभी जुलूस निकालकर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिविल लाइंस स्थित शाखा पर एकत्र हुए और यहां पर जनसभा की। सभा के संयोजक सुभाषचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि हड़ताल राष्ट्रीयकृत बैंकों को कॉरपोरेट घरानों व पूंजीपतियों से बचाने समेत जन विरोधी बैंकिंग व आर्थिक नीतियों के विरोध में है।
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सह संयोजक एसपी चौबे ने कहा कि हड़ताल देश के आर्थिक ढांचे को बचाने के लिए है। सभा की अध्यक्षता कर रहे अध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि अब हम सब सड़कों पर उतर आए हैं, सरकार को निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेना होगा। मंत्री डीसी टंडन ने कहा निजीकरण स्थायी नौकरियों पर हमला और बेरोजगारी पैदा करने वाला है।
सेंट्रल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री और यूएफबीयू के संयुक्त मंत्री केके रस्तोगी ने कहा कि निजीकरण से कृषि ऋण में कमी आएगी। सीमांत और छोटे किसान कृषि कार्य से बेदखल होंगे। साथ ही बैंकों की ग्रामीण शाखाएं बंद होगी और लघु बचत योजनाएं ध्वस्त हो जाएगी। सभा में महिला बैंककर्मी अमिता श्रीवास्तव के नेतृत्व में सुशीला, निधि पांडेय, प्रियंका, निशा, नलिनी आदि ने भी बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव की आलोचना की।
इस मौके पर स्टेट बैंक के डीजीएम रूपराम तिवारी, आरआर शर्मा, रामदास, आरएस उपाध्याय समेत अन्य बैंक कर्मी व अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, सेवानिवृत्त बैंककर्मियों के संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया। एसके सिंह ने बताया कि यदि बैंकों का निजीकरण हुआ तो पूंजीपति कभी भी पेंशन योजना बंद कर सकते हैं।
लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) राजेश कुमार ने बताया कि सोमवार राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी व कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जिले में करीब 350 करोड़ का लेन देन प्रभावित हुआ है। वहीं बैंक यूनियन के पदाधिकारियों ने 500 करोड़ के लेन देन ठप होने का दावा किया है। गुरुवार को महाशिवरात्रि के कारण और उसके बाद द्वितीय शनिवार व रविवार को बैंक बंद था।
ऐसे में जिले के अधिकांश एटीएम पहले ही खाली हो गए थे। कैश के लिए परेशान लोग सोमवार को बैंक खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब सुबह वह बैंक पहुंचे तो वहां हड़ताल का बोर्ड देखकर परेशान हो गए। सबसे ज्यादा परेशानी व्यापारियों को उठानी पड़ी, वह दो दिन का कैश जमा कराने के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक की शाखा पर कैश लेने के लिए आए हैदरगंज निवासी राजकुमार गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को वह पैसा नहीं निकाल पाए थे। आज आए तो पता चला कि बैंक में दो दिन की हड़ताल है। बेटे के पास पैसा भेजना था, अब यह बुधवार को ही संभव हो पाएगा। इंडियन ओवरसीज बैंक पर मिले बुद्धिपाल प्रजापति ने बताया कि शहर के कई एटीएम में गया लेकिन कहीं कैश नहीं मिला।
बैंक आया तो यहां नारेबाजी हो रही थी। अयोध्या के रायगंज निवासी रिटायर्ड कर्मी विमलेश अवस्थी ने बताया कि पारिवारिक कार्य से वाराणसी जाना है, पैसा निकालने बैंक आए तो पता चला कि हड़ताल है। एटीएम भी खाली हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा पर मिले राजकुमार ने बताया कि आंख का ऑपरेशन कराया है, दवा आदि के लिए पैसे चाहिए थे लेकिन हड़ताल के चलते पैसा नहीं मिल पाया। एटीएम में भी रकम नहीं है।

अयोध्या में पंजाब नेशनल बैंक पर प्रदर्शन करते बैंक कर्मी।- फोटो : FAIZABAD