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राम केवल नाम ही नही महामंत्र भी है : मोरारी बापू

Sat, 29 Dec 2018 01:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Dec 2018 01:00 AM IST
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राम केवल नाम ही नही महामंत्र भी है : मोरारी बापू
राम केवल नाम ही नही महामंत्र भी है : मोरारी बापू
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अयोध्या। बड़ा भक्तमाल की बगिया में अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास संत मोरारी बापू ने राम कथा स्रद्म रसपान कराते हुए कहा कि राम केवल नाम ही नहीं महामंत्र भी है। राम कथा साधन नहीं साध्य है। राम नाम के जापक को किसी का शोषण नहीं करना चाहिए ।

कथा को विस्तार देते हुए बापू ने कहा कि जिसको विवाद करना है वह करेगा ही। कुछ बातें शास्त्रों में नहीं होती, संतों के अंत:करण में होती हैं। कहा कि जगत गुण-अवगुण मिश्रित हैं। इसमें से गुण चुनना है। विश्व में हम एकता कैसे लाएंगे, जब हम राम एवं सीता में भेद करेंगे।
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वस्तुत: राम एवं सीता में कोई अंतर नहीं, कोई भेद नही। बापू भक्तों को श्री राधे जै राधे, जै-जै राधे....का भजनामृत पान कराने लगे तो कथा श्रोता झूम उठे। बापू कहते हैं, शिव जी ने माता सती से कहा मैंने आप से एक चोरी की।
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मैं और काक भुशुण्डि जी गुरु शिष्य ज्योतिषि बनकर प्रभु राम जी का दर्शन करने गए थे। नामकरण का समय आया। गुरु वशिष्ठ जी ने जिसका नाम लेने से विश्व को विश्राम मिलेगा उसका नाम राम रखा। विश्व का जो पालन पोषण करेगा उसका नाम भरत होगा।

जिसके स्मरण से शत्रुओं का नाश होगा उसका नाम शत्रुघ्न होगा। जो जगत का आधार है, राम जी का अतिसय प्रिय है उसका नाम लक्ष्मण रखा। इस पुनीत अवसर पर श्री महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज सहित बड़ी संख्या में कथा स्रोता भक्त कथा मृत पान करते रहे ।

रामकथा का गान किया जाता है। जो प्रेम करेगा वह गाए बिना नहीं रह सकता। गायन की एक पंक्ति ही नहीं बल्कि दो आखर रा और म ही पर्याप्त है। ध्यान से सुनो तो पूरा जगत ही रामायण गा रहा है।

हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा... मीरा ने गाया क्यों कि प्रेम किया था, कबीर ने गाया, नरसी व तुलसी ने गाया। नानक व निजामुद्दीन औलिया ने भी गाया। गायन एक कला है।

बापू ने कहा कि मीरा ने नृत्य कर, नानक ने गाकर, महावीर ने मौन रहकर व बुद्ध ने ज्ञान से प्रभु को पाया। मोरारी बापू ने कथा के दौरान तीर्थों को स्वच्छ रखने की अपील कथा श्रोताओं से की।

कहा की तीर्थ तो स्वच्छ है हीं मानसिक तौर पर स्वच्छता जरूरी है। स्वच्छता के प्रति साधु मुख्यमंत्री कटिबद्ध हैं। सफाई बहुत जरूरी है, सफाई हो भी रही है, लेकिन स्वच्छता मन की होनी चाहिए।

कहा कि धर्म क्षेत्र में आने से तेज बढ़ता है, मैं तो अयोध्या आता हूं तो मेरा तेज बढ़ जाता है। बापू कहते हैं कभी भी साधु की निंदा मत करो। भेष की कभी आलोचना नही करना चाहिए।

साधु 16 कला का होता है। सब राम नाम पीकर बैठे हैं। सत पर जब बिंदी लग जाती है तब वो संत हो जाता है। जब कोई साधु से कथा सुनता है तो उसके पुरखे नृत्य करने लगते हैं। बापू ने गाया- आवारा हूं, गर्दिश में आसमान का तारा हूँ... तो भक्त निहाल हो उठे।


कहा कि आवारा का मतलब फकीर है। पंडित के मुख से कथा सुनोगे तो सर से ऊपर होकर निकल जायेगी। विद्वान से सुनेंगे तो समझ में नहीं आएगा, कथा साधु से सुननी चाहिए।
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