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विस्तार के बजाय घटती जा रही एनडी विवि की सीटें

Lucknow Bureau Updated Thu, 15 Mar 2018 12:00 AM IST
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बढ़ने के बजाय घट रहीं एनडी विश्वविद्यालय की सीटें
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फैजाबाद/कुमारगंज। नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की सीटें बढ़ने बजाय घट रही हैं। जहां चार साल पहले बीएससी एजी, हाट्रिकल्चर, होम साइंस, बीएफएससी, बीवीएससी समेत बीटेक की विभिन्न कक्षाओं में 450 सीटें थीं, वहां अब घटकर 286 सीटें रह गई हैं। स्नातकोत्तर में भी तीन साल पहले 234 सीट थी, जो घटकर अब 173 रह गई हैं। यही हाल एग्रीकल्टर व वेटनरी में पीएचडी का है। जहां 62 सीटों से घटकर अब 39 सीटें बची है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे शिक्षकों की कमी बता रहा है, मगर छात्रों में घटती सीटों को लेकर निराशा है। मामले में नए कुलपति ने अब समीक्षा कर प्रगति की रणनीति बनाने की तैयारी की है।
शोध शिक्षा एवं प्रसार को शीर्ष तक पहुंचाने वाले पूर्वांचल के एक मात्र नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज लगातार अपनी चमक खोता जा रहा है । कभी कृषि वर्ग के छात्रों की पहली पसंद होने वाले इस विश्वविद्यालय में चार वर्षों में छात्र संख्या में काफी कमी आई है। विश्वविद्यालय में पर्याप्त टीचिंग स्टाफ न होने की वजह से समस्त शैक्षिक क्रियाकलाप प्रभावित हो रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में चार वर्षों में छात्र संख्या में काफी कमी आई है। वर्ष 2013-14 में स्नातक के सभी विभागों में जहां 450 छात्रों ने प्रवेश लिया था। वहीं 2017-18 में केवल 346 छात्रों ने ही प्रवेश लिया। इसमें आजमगढ़ कैंपस के नाम पर बढ़ीं 60 सीटें शामिल हैं। जबकि चार साल पहले इसका अस्तित्व नहीं था। सबसे बड़ी कमी बीटेक विभाग में आई है, जहां 38 के सापेक्ष केवल तीन छात्र ही रह गए है। इसी प्रकार मैकेनिकल इजीनियरिंग में भी 40 के सापेक्ष केवल चार छात्र ही रह गए है। कृषि विश्वविद्यालय में परास्नातक स्तर पर भी छात्र संख्या में भारी कमी आई है। शिक्षा सत्र 2013-14 में एमएससी एजी में जहां 175 सीट थी, वहीं अब घटकर सत्र 2017-18 में केवल 152 रह गई है। गृह विज्ञान में भी 10 के सापेक्ष केवल तीन व बीएससी होम्स में 22 के सापेक्ष 18 छात्रों ने ही प्रवेश लिया। यही नहीं विश्वविद्यालय के शोध छात्रों की संख्या भी काफी घटी है। वर्ष 2014 में 59 के सापेक्ष 2017-18 में केवल 39 ने नामांकन कराया है।

छात्रों को खल रही शिक्षकों की कमी और उपेक्षा
विवि की बीएससी प्रथम वर्ष का छात्रा अभिलाषा सिंह का कहना है कि सभी विषयों के टीचर न होने पर पढ़ाई बाधित होती है। इससे परेशानी होती है। आगे का लक्ष्य निर्धारित करने में समस्या आती है।

विवि के शोध छात्र अतुल यादव का कहना है कि सीटें घटने के पीछे छात्र उपेक्षा व गिरती साख है। विश्वविद्यालय में छात्रों की उपेक्षा होती है, शैक्षिक माहौल बिगड़ता जा रहा है और पर्याप्त टीचिंग स्टाफ भी नहीं है।

एमएससी गह विज्ञान तृतीय वर्ष की छात्रा स्वप्निल सिंह का कहना है कि टीचर की कमी की वजह से शिक्षण प्रभावित होता है परंतु नए कुलपति जी काफी पॉजिटिव हैं। आशा है कि समस्या शीघ्र की हल हो जाएगी।

शोध छात्र धीरज यादव का कहना है कि काफी मेहनत के बाद ही विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल पाता है । परंतु खराब शैक्षिक माहौल टारगेट पूरा करने में बाधक होता है। नए कुलपति जी से काफी उम्मीद है।

आजमगढ़ में खुले बीएससी एजी कैंपस में लगा ताला
नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय की ओर से आजमगढ़ जिले में बीएससी (एजी) का कोर्स 2015-16 में शुरू किया गया। मगर नैक मूल्यांकन टीम ने दौरा किया तो वहां के हालात बेहद खराब मिले। मौके पर सिर्फ भवन था, न शिक्षक तैनात थे न ही संसाधन। ऐसे में आजमगढ़ कैंपस नाम से 60 सीटें अब कुमारगंज स्थित विश्वविद्यालय परिसर में चल रही है। आजमगढ़ में ताला लग गया है।

स्नातक कक्षाओं की सीटों का घटता क्रम
विषय 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18
बीएससी (एजी) 130 130 128 125 121
बीएससी (हार्टिकल्चर) 61 61 60 40 39
बीएससी (होमसाइंस) 50 53 44 33 15
बीएफ एससी 35 35 34 22 23
बीवीएससी 0 39 81 0 51
बीटेक (कृषि इंजीनियरिंग) 96 92 58 49 30
बीटेक (सीएस) 38 22 25 27 03
बीटेक (मैकेनिकल ईंजीनियरिंग) 40 38 35 28 04
कुल सीटें 450 470 465 324 286

स्नातकोत्तर सीटों का घटता क्रम
विषय 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18
एसएससी एजी 175 206 188 134 152
एसएससी होम साईंस 04 10 13 01 03
एमवी साइंस 22 18 13 13 18
कुल 201 234 214 148 173

शोध पाठ्यक्रमों की सीटों का घटता क्रम
पीएचडी 59 62 45 33 39


योजनाबद्ध तरीके से होगा सुधार
अभी पदभार संभालने के बाद एक माह का समय भी नहीं बीत पाया है। बारी-बारी समस्त समस्याओं का रिव्यू किया जा रहा है। घटती सीटों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। इसके लिए जल्द ही विश्वविद्यालय प्रशासन की मीटिंग को बुलाकर सीटों के घटने का कारण जानकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।- प्रो. जेएस संधू, कुलपति, एनडी विश्वविद्यालय

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