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एससी एसटी एक्ट में कोर्ट ने किया रिमांड निरस्त
Updated Wed, 12 Sep 2018 11:32 PM IST
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एससी एसटी एक्ट में कोर्ट ने निरस्त किया रिमांड
फैजाबाद। एससीएसटी एक्ट में गिरफ्तारी सीओ बीकापुर अरविंद चौरसिया को महंगी पड़ी। कोर्ट ने उनकी ओर से की गई 14 दिवस के न्यायिक रिमांड पर आरोपी को देने की याचना निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके पर अविलंब रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट तनवीर अहमद की कोर्ट से हुआ।
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता सईद खान ने बताया कि इनायतनगर थाने के एक गांव के रहने वाले अनिल कुमार गुप्ता व विशाल गुप्ता के खिलाफ गांव की ही एक दलित किशोरी के पिता ने रिपोर्ट लिखाई थी।
आरोप था कि उसकी लड़की 9 सितंबर को गोबर फेंकने जा रही थी। उस समय उसके साथ अश्लील हरकत की गई और जाति सूचक गालियां दी गईं। मालूम हो सात साल तक की सजा के मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है।
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दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए में भी ऐसे मामलों में गिरफ्तारी पर रोक है और गिरफ्तारी बहुत जरूरी होने की दशा में व्यवस्था है कि उनके आरोपियों को नोटिस दिया जाए और गिरफ्तारी के कारण का केस डायरी में स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
मामले की विवेचना सीओ बीकापुर अरविंद चौरसिया कर रहे हैं। उन्होंने आरोपी को गिरफ्तारी के पहले कोई नोटिस नहीं दिया। गिरफ्तारी के लिए जो कारण लिखा उसमें कहा गया कि आरोपी वादी को जान से मारने की धमकी दे रहा हैं, फिर वारदात कर सकते हैं।
मुकदमे में सुलह करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। जबकि केस डायरी में पहले से लिखा है कि आरोपी फरार हैं। कोर्ट ने इसी आधार पर न्यायिक रिमांड पर आरोपी को देने की अर्जी निरस्त कर दी।
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फैजाबाद। एससीएसटी एक्ट में गिरफ्तारी सीओ बीकापुर अरविंद चौरसिया को महंगी पड़ी। कोर्ट ने उनकी ओर से की गई 14 दिवस के न्यायिक रिमांड पर आरोपी को देने की याचना निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके पर अविलंब रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट तनवीर अहमद की कोर्ट से हुआ।
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता सईद खान ने बताया कि इनायतनगर थाने के एक गांव के रहने वाले अनिल कुमार गुप्ता व विशाल गुप्ता के खिलाफ गांव की ही एक दलित किशोरी के पिता ने रिपोर्ट लिखाई थी।
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आरोप था कि उसकी लड़की 9 सितंबर को गोबर फेंकने जा रही थी। उस समय उसके साथ अश्लील हरकत की गई और जाति सूचक गालियां दी गईं। मालूम हो सात साल तक की सजा के मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है।
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दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए में भी ऐसे मामलों में गिरफ्तारी पर रोक है और गिरफ्तारी बहुत जरूरी होने की दशा में व्यवस्था है कि उनके आरोपियों को नोटिस दिया जाए और गिरफ्तारी के कारण का केस डायरी में स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
मामले की विवेचना सीओ बीकापुर अरविंद चौरसिया कर रहे हैं। उन्होंने आरोपी को गिरफ्तारी के पहले कोई नोटिस नहीं दिया। गिरफ्तारी के लिए जो कारण लिखा उसमें कहा गया कि आरोपी वादी को जान से मारने की धमकी दे रहा हैं, फिर वारदात कर सकते हैं।
मुकदमे में सुलह करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। जबकि केस डायरी में पहले से लिखा है कि आरोपी फरार हैं। कोर्ट ने इसी आधार पर न्यायिक रिमांड पर आरोपी को देने की अर्जी निरस्त कर दी।