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तीन देशों की यात्रा पर जाएगा रामलीला दल
Updated Thu, 05 Jul 2018 12:16 AM IST
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तीन देशों की यात्रा पर जाएगा रामलीला दल
अयोध्या। राम की वैश्विक यात्रा परियोजना के अंतर्गत अयोध्या शोध संस्थान के निर्देशन में रामलीला दल तीनों देशों की यात्रा पर जाएगा। यह यात्रा 18 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। इस यात्रा के दौरान रामलीला दल गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम में रामलीला का मंचन कर इन देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों के आदान-प्रदान का भी माध्यम बनेगा।
भारत सरकार ने देश में रामलीला मंचन की परंपरा के संरक्षण की योजना तैयार की है। कुछ ही दिन पूर्व भारत सरकार ने राम की वैश्विक यात्रा परियोजना को मंजूरी दी है। इसके लिए शासन ने 50 लाख का अनुदान भी प्रदान किया है। जिसके तहत रामलीला पर शोध सर्वेक्षण एवं प्रदर्शन किया जाएगा। रामलीला को वर्ष 2005 में विश्व की अमूर्त विरासत भी घोषित किया जा चुका है। इसी योजना के क्रम में यह यात्रा प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से फलीभूत होने जा रही इस योजना में अयोध्या की पारंपरिक रामलीला के श्रेष्ठ कलाकारों के दल को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रतिभाग के लिए भेजा जाएगा। राम संस्कृति की वैश्विक यात्रा के क्रम में रामलीला दल तीन देशाें में 18 जुलाई से 2 अगस्त तक रामलीला मंचन करेगा। दल सबसे पहले 18 जुलाई से 22 जुलाई तक त्रिनिडाड में रामलीला का मंचन करेगा। इसके बाद 23 से 29 जुलाई तक गुयाना में रामलीला मंचन के बाद दल 27 जुलाई से 2 अगस्त तक सूरीनाम में रामलीला का प्रदर्शन कर वापस होगा। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीर्थ ने बताया कि संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह के निर्देशन में 10 सदस्यीय रामलीला दल तीनों देशों की यात्रा पर जा रहा है। इसके लिए उत्कृष्ट कलाकारों का चयन उनके लीला कौशल के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
बैंकाक में हुनर दिखाएंगे भारतीय चित्रकार
थाईलैंड के बैंकाक में संचालित ललित कला महाविद्यालय में 5 जुलाई से प्रारंभ हो रही दस दिवसीय कार्यशाला में भारतीय चित्रकार अपना हुनर दिखाएंगे। इस कार्यशाला के लिए अयोध्या शोध संस्थान की ओर से अलग-अलग शैलियों में महारत रखने वाले पांच कलाकारों का चयन किया गया है। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीरथ ने बताया कि कलाकारों में उत्तरप्रदेश के बुदेंली चितैरा शैली के स्थापित कलाकार रोहित श्रीवास्तव, पश्चिम बंगाल के पेडुआ शैली के कलाकार नूरदीन, उड़ीसा के उड़िया पट्टशैली के बृजेश्वर पटनायक, तंजौर पेटिंग में महारथ हासिल करने वालें तमिलनाडु के टी स्वामीनाथन और तेलंगाना के चेरियाल पेंटिंग के नामी कलाकार डी नागेश्वारनाथ शामिल हैं। ये चित्रकार थाई कला सीखेंगं तो अवधी कला से भी थाईलैंडवासियों को रू-ब-रू कराएंगे।
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अयोध्या। राम की वैश्विक यात्रा परियोजना के अंतर्गत अयोध्या शोध संस्थान के निर्देशन में रामलीला दल तीनों देशों की यात्रा पर जाएगा। यह यात्रा 18 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। इस यात्रा के दौरान रामलीला दल गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम में रामलीला का मंचन कर इन देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों के आदान-प्रदान का भी माध्यम बनेगा।
भारत सरकार ने देश में रामलीला मंचन की परंपरा के संरक्षण की योजना तैयार की है। कुछ ही दिन पूर्व भारत सरकार ने राम की वैश्विक यात्रा परियोजना को मंजूरी दी है। इसके लिए शासन ने 50 लाख का अनुदान भी प्रदान किया है। जिसके तहत रामलीला पर शोध सर्वेक्षण एवं प्रदर्शन किया जाएगा। रामलीला को वर्ष 2005 में विश्व की अमूर्त विरासत भी घोषित किया जा चुका है। इसी योजना के क्रम में यह यात्रा प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से फलीभूत होने जा रही इस योजना में अयोध्या की पारंपरिक रामलीला के श्रेष्ठ कलाकारों के दल को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रतिभाग के लिए भेजा जाएगा। राम संस्कृति की वैश्विक यात्रा के क्रम में रामलीला दल तीन देशाें में 18 जुलाई से 2 अगस्त तक रामलीला मंचन करेगा। दल सबसे पहले 18 जुलाई से 22 जुलाई तक त्रिनिडाड में रामलीला का मंचन करेगा। इसके बाद 23 से 29 जुलाई तक गुयाना में रामलीला मंचन के बाद दल 27 जुलाई से 2 अगस्त तक सूरीनाम में रामलीला का प्रदर्शन कर वापस होगा। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीर्थ ने बताया कि संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह के निर्देशन में 10 सदस्यीय रामलीला दल तीनों देशों की यात्रा पर जा रहा है। इसके लिए उत्कृष्ट कलाकारों का चयन उनके लीला कौशल के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
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बैंकाक में हुनर दिखाएंगे भारतीय चित्रकार
थाईलैंड के बैंकाक में संचालित ललित कला महाविद्यालय में 5 जुलाई से प्रारंभ हो रही दस दिवसीय कार्यशाला में भारतीय चित्रकार अपना हुनर दिखाएंगे। इस कार्यशाला के लिए अयोध्या शोध संस्थान की ओर से अलग-अलग शैलियों में महारत रखने वाले पांच कलाकारों का चयन किया गया है। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीरथ ने बताया कि कलाकारों में उत्तरप्रदेश के बुदेंली चितैरा शैली के स्थापित कलाकार रोहित श्रीवास्तव, पश्चिम बंगाल के पेडुआ शैली के कलाकार नूरदीन, उड़ीसा के उड़िया पट्टशैली के बृजेश्वर पटनायक, तंजौर पेटिंग में महारथ हासिल करने वालें तमिलनाडु के टी स्वामीनाथन और तेलंगाना के चेरियाल पेंटिंग के नामी कलाकार डी नागेश्वारनाथ शामिल हैं। ये चित्रकार थाई कला सीखेंगं तो अवधी कला से भी थाईलैंडवासियों को रू-ब-रू कराएंगे।
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