{"_id":"5afefcc14f1c1bde408b642b","slug":"201526660289-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृति ही हमारी धरोहर : डा. प्रज्ञा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृति ही हमारी धरोहर : डा. प्रज्ञा
Updated Fri, 18 May 2018 09:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संस्कृति ही हमारी धरोहर : डॉ. प्रज्ञा
अयोध्या। संस्कृति का अर्थ है वह कार्य जो भलीभांति किया गया हो, विभूषित एवं अलंकृत हो। हमारी संस्कृति ही हमारी धरोहर है। यह विचार डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर ‘संस्कृत के संरक्षण में संग्रहालय का महत्व’ विषय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।
कहा कि भारतवर्ष का प्रारंभिक इतिहास एवं संस्कृति पुरातत्व में संरक्षित है। भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को लेकर चलती है। संग्रहालय में पुरातत्व वेत्ता द्वारा उत्खनित सभ्यता के अवशेषों को रखा जाता है जो समग्र इतिहास का निर्माण करती है। व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए डॉ. बांके बिहारी मणि त्रिपाठी ने संग्रहालय को ज्ञान का केंद्र बताते हुए कहा कि भवभूति जैसे साहित्यकारों ने भी वीथिका का उल्लेख अपने साहित्य में किया है। इस अवसर पर डॉ. राममूर्ति चौधरी व रामकृष्ण शास्त्री ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उपनिदेशक योगेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। संचालन वीथिका सहायक मानस तिवारी ने किया। इस अवसर पर अवनि कुमार शुक्ल, हनुमान प्रसाद मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, अंजनी सिन्हा सहित विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
विज्ञापन
अयोध्या। संस्कृति का अर्थ है वह कार्य जो भलीभांति किया गया हो, विभूषित एवं अलंकृत हो। हमारी संस्कृति ही हमारी धरोहर है। यह विचार डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर ‘संस्कृत के संरक्षण में संग्रहालय का महत्व’ विषय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।
कहा कि भारतवर्ष का प्रारंभिक इतिहास एवं संस्कृति पुरातत्व में संरक्षित है। भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को लेकर चलती है। संग्रहालय में पुरातत्व वेत्ता द्वारा उत्खनित सभ्यता के अवशेषों को रखा जाता है जो समग्र इतिहास का निर्माण करती है। व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए डॉ. बांके बिहारी मणि त्रिपाठी ने संग्रहालय को ज्ञान का केंद्र बताते हुए कहा कि भवभूति जैसे साहित्यकारों ने भी वीथिका का उल्लेख अपने साहित्य में किया है। इस अवसर पर डॉ. राममूर्ति चौधरी व रामकृष्ण शास्त्री ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उपनिदेशक योगेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। संचालन वीथिका सहायक मानस तिवारी ने किया। इस अवसर पर अवनि कुमार शुक्ल, हनुमान प्रसाद मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, अंजनी सिन्हा सहित विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
विज्ञापन