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शिया समुदाय का रोजा आज से, सुन्नी का पहला दिन कल
Updated Thu, 17 May 2018 12:06 AM IST
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रमजान मुबारक, चांद दिखा, पहला रोजा आज
फैजाबाद। रमजान-उल-मुबारक का चांद का एलान होते ही रमजान की इबादत केलिए मस्जिदें भी गुलजार होने लगीं। बाजार की रौनक भी अपने शबाब पर थीं। एक ओर सहरी और इफ्तार का बंदोबस्त करती महिलाएं तो दूसरी ओर सिर पर टोपी लगाए तरावीह के लिए मस्जिदों की ओर जाने की ललक। हालांकि चांद दिखने के लेकर देर शाम तक शिया व सुन्नी समुदाय अलग-अलग दावे करते रहे। बाद में रमजान माह गुरुवार से मनाने की बात सामने आई है।
इस्लामिक माह शाबान की 29 तारीख यानि 16 मई को रमजान-उल-मुबारक का चांद देखने के लिये हर कोई व्याकुल था। रमजान के मुकददस चांद केदीदार केलिए आसमान में लोगों की निगाह टिकी हुई थी। शहर के पुराने इलाकों में घर की छतों पर चांद का दीदार करने की ललक साफ दिखाई दे रही थी। रमजान का चांद दिखने का एलान होते ही रोजेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
शिया धर्मगुरु मौलाना शमीम हैदरी सहर पेश नमाज हैदरी मस्जिद ने बताया कि चेन्नई में चांद देखने की तस्दीक हुई है। गुरुवार से पहला रोजा शुरू होगा। सुन्नी समुदाय के मुफ्ती बादशाह खान का कहना है कि चांद दिख गया है, रोजा गुरुवार से होगा। इसी के साथ तराबीर की नमाज मस्जिद मुगरलपुरा, सरायकोफ्ता समेत कई अन्य मस्जिदों में हुई। जबकि सुन्नी धर्मगुरु शहर काजी मौलाना शमशुल कमर कादरी व टाटशाह मस्जिद के मुतवल्ली मो. गुलाम ने बताया है कि फिलहाल कहीं से चांद दिखने की बात तस्दीक नहीं हो पाई है। शहर काजी ने बताया है कि मुस्लिम समुदाय के लोग निर्धारित अरबी माह के नवें माह रमजान में एक माह तक रोजे रखते हैं। यह धर्म के अनुसार यह एक जरूरी कार्य है। सुन्नी संप्रदाय के लोग रात्रि के समय विशेष नमाज तरावीह अदा करते हैं। इसके अलावा फर्ज नमाजों का एहतिमाम करने के साथ नफली नमाज भी पढ़ी जाती है। शहर काजी बताते इस माह में खासतौर पर एक सबाब का 70 गुना अधिक सबाब मिलता है।
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फैजाबाद। रमजान-उल-मुबारक का चांद का एलान होते ही रमजान की इबादत केलिए मस्जिदें भी गुलजार होने लगीं। बाजार की रौनक भी अपने शबाब पर थीं। एक ओर सहरी और इफ्तार का बंदोबस्त करती महिलाएं तो दूसरी ओर सिर पर टोपी लगाए तरावीह के लिए मस्जिदों की ओर जाने की ललक। हालांकि चांद दिखने के लेकर देर शाम तक शिया व सुन्नी समुदाय अलग-अलग दावे करते रहे। बाद में रमजान माह गुरुवार से मनाने की बात सामने आई है।
इस्लामिक माह शाबान की 29 तारीख यानि 16 मई को रमजान-उल-मुबारक का चांद देखने के लिये हर कोई व्याकुल था। रमजान के मुकददस चांद केदीदार केलिए आसमान में लोगों की निगाह टिकी हुई थी। शहर के पुराने इलाकों में घर की छतों पर चांद का दीदार करने की ललक साफ दिखाई दे रही थी। रमजान का चांद दिखने का एलान होते ही रोजेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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शिया धर्मगुरु मौलाना शमीम हैदरी सहर पेश नमाज हैदरी मस्जिद ने बताया कि चेन्नई में चांद देखने की तस्दीक हुई है। गुरुवार से पहला रोजा शुरू होगा। सुन्नी समुदाय के मुफ्ती बादशाह खान का कहना है कि चांद दिख गया है, रोजा गुरुवार से होगा। इसी के साथ तराबीर की नमाज मस्जिद मुगरलपुरा, सरायकोफ्ता समेत कई अन्य मस्जिदों में हुई। जबकि सुन्नी धर्मगुरु शहर काजी मौलाना शमशुल कमर कादरी व टाटशाह मस्जिद के मुतवल्ली मो. गुलाम ने बताया है कि फिलहाल कहीं से चांद दिखने की बात तस्दीक नहीं हो पाई है। शहर काजी ने बताया है कि मुस्लिम समुदाय के लोग निर्धारित अरबी माह के नवें माह रमजान में एक माह तक रोजे रखते हैं। यह धर्म के अनुसार यह एक जरूरी कार्य है। सुन्नी संप्रदाय के लोग रात्रि के समय विशेष नमाज तरावीह अदा करते हैं। इसके अलावा फर्ज नमाजों का एहतिमाम करने के साथ नफली नमाज भी पढ़ी जाती है। शहर काजी बताते इस माह में खासतौर पर एक सबाब का 70 गुना अधिक सबाब मिलता है।
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