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बीएसए कार्यालय पर चौथे दिन भी जारी रहा शिक्षामित्रों का धरना
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:46 PM IST
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अध्यादेश के लिए शिक्षामित्रों ने शुरू की भूख हड़ताल
फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द किए जाने से आहत शिक्षामित्रों का प्रदर्शन चौथे दिन पूरे शबाब पर रहा। हजारों शिक्षामित्रों ने संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा हिंसा पर सख्त कार्रवाई किए जाने का निर्देश दिए जाने के बाद शनिवार को धरना हिंसक रूप नहीं ले सका।
किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन ने भी कमर कस ली थी। रविवार को सांसद का घेराव किए जाने की रूपरेखा तय की गई। चार दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद शिक्षामित्रों ने आंदोलन की राह पकड़ ली।
चौथे दिन भी बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्र भारी तादाद में सुबह से एकत्र होने लगे। इस बीच सुबह से कामकाज भी खासा प्रभावित रहा। एक दिन पूर्व बीएसए शुधा शांडिल्य के साथ व्यवहार से कर्मचारी भलीभांति वाकिफ थे, इससे लोग भयभीत नजर आए।
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सरकार से सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के दिए गए निर्देश को ध्यान में रखकर भारी तादाद में पुलिस बल व पीएसी धरनास्थल पर सुबह ही तैनात कर दी गई थी। पुलिस सुबह से ही चप्पे-चप्पे पर नजर रखे रही और किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए तैयार दिखी।
हालांकि तमाम शिक्षामित्र बीच-बीच में योगी मुर्दाबाद, मोदी मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। शनिवार को प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह ने कहा कि सरकार जब तक संसद से कानून बनाकर अध्यादेश नहीं लाएगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सीएल मिश्र को सौंपा। प्रदर्शन के चौथे दिन शिक्षामित्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसमें अरुण सिंह, महेश कुमार, किरण श्रीवास्तव, रीता सिंह, साधना मिश्र, ममता पांडेय, शशिकला, राम प्रताप आदि शामिल हुए।
जिलाध्यक्ष अनुज सिंह ने कहा कि अध्यापक पद के नीचे किसी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गेश मिश्रा ने कहा कि शिक्षामित्रों को अध्यापक बनाये रखने के लिए हर लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
संजय सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों के समायोजन बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा। अटेवा के जिलाध्यक्ष अंजनी ओझा और मंत्री अभिनव सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार इन्हीं अध्यापकों के चुनाव अधिकारी रहते हुए बनी है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को यूपी चुनाव को भी अवैध घोषित करना चाहिए।
इस मौके पर रामजी द्विवेदी, अरबिंद दुबे, राजेश मिश्रा, अरुण सिंह, अनिल पांडेय, अशोक वर्मा, ओमप्रकाश यादव, प्रमोद सिंह, राजेंद्र निषाद, राजेश तिवारी, सचिव भरत सिंह, आशीष सिंह, रामदर्शन यादव, गौरीशंकर पांडेय, विजय वर्मा, आदिल खान, कमलजीत कुमार, दीपिका निगम, किरन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
आज घेरेंगे सांसद का आवास
मीडिया प्रभारी अनूप द्विवेदी ने बताया कि शिक्षामित्र रविवार को सांसद लल्लू सिंह के आवास का घेराव करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिक्षामित्रों के भविष्य को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शिक्षामित्रों से उनके रोजगार को बरकरार रखने का वादा किया था। जिस तरह से तमिलनाडु सरकार ने जलीकट्टु को बरकरार रखने के लिए विधेयक पास किया, उसी तरह योगी, मोदी सरकार भी शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए अध्यादेश लेकर आये।
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फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द किए जाने से आहत शिक्षामित्रों का प्रदर्शन चौथे दिन पूरे शबाब पर रहा। हजारों शिक्षामित्रों ने संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा हिंसा पर सख्त कार्रवाई किए जाने का निर्देश दिए जाने के बाद शनिवार को धरना हिंसक रूप नहीं ले सका।
किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए प्रशासन ने भी कमर कस ली थी। रविवार को सांसद का घेराव किए जाने की रूपरेखा तय की गई। चार दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किए जाने के बाद शिक्षामित्रों ने आंदोलन की राह पकड़ ली।
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चौथे दिन भी बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्र भारी तादाद में सुबह से एकत्र होने लगे। इस बीच सुबह से कामकाज भी खासा प्रभावित रहा। एक दिन पूर्व बीएसए शुधा शांडिल्य के साथ व्यवहार से कर्मचारी भलीभांति वाकिफ थे, इससे लोग भयभीत नजर आए।
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सरकार से सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के दिए गए निर्देश को ध्यान में रखकर भारी तादाद में पुलिस बल व पीएसी धरनास्थल पर सुबह ही तैनात कर दी गई थी। पुलिस सुबह से ही चप्पे-चप्पे पर नजर रखे रही और किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए तैयार दिखी।
हालांकि तमाम शिक्षामित्र बीच-बीच में योगी मुर्दाबाद, मोदी मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। शनिवार को प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह ने कहा कि सरकार जब तक संसद से कानून बनाकर अध्यादेश नहीं लाएगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सीएल मिश्र को सौंपा। प्रदर्शन के चौथे दिन शिक्षामित्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसमें अरुण सिंह, महेश कुमार, किरण श्रीवास्तव, रीता सिंह, साधना मिश्र, ममता पांडेय, शशिकला, राम प्रताप आदि शामिल हुए।
जिलाध्यक्ष अनुज सिंह ने कहा कि अध्यापक पद के नीचे किसी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गेश मिश्रा ने कहा कि शिक्षामित्रों को अध्यापक बनाये रखने के लिए हर लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
संजय सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों के समायोजन बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा। अटेवा के जिलाध्यक्ष अंजनी ओझा और मंत्री अभिनव सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार इन्हीं अध्यापकों के चुनाव अधिकारी रहते हुए बनी है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को यूपी चुनाव को भी अवैध घोषित करना चाहिए।
इस मौके पर रामजी द्विवेदी, अरबिंद दुबे, राजेश मिश्रा, अरुण सिंह, अनिल पांडेय, अशोक वर्मा, ओमप्रकाश यादव, प्रमोद सिंह, राजेंद्र निषाद, राजेश तिवारी, सचिव भरत सिंह, आशीष सिंह, रामदर्शन यादव, गौरीशंकर पांडेय, विजय वर्मा, आदिल खान, कमलजीत कुमार, दीपिका निगम, किरन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
आज घेरेंगे सांसद का आवास
मीडिया प्रभारी अनूप द्विवेदी ने बताया कि शिक्षामित्र रविवार को सांसद लल्लू सिंह के आवास का घेराव करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिक्षामित्रों के भविष्य को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शिक्षामित्रों से उनके रोजगार को बरकरार रखने का वादा किया था। जिस तरह से तमिलनाडु सरकार ने जलीकट्टु को बरकरार रखने के लिए विधेयक पास किया, उसी तरह योगी, मोदी सरकार भी शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए अध्यादेश लेकर आये।