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दिेशों में भी बढ़ रही गुरुकुल की स्वीकार्यता: कानिटकर
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:48 PM IST
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उत्तर प्रदेश में खुलेंगे आठ नए गुरुकुल
अयोध्या। प्रदेश में शिक्षण मंडल की प्रेरणा से आठ नए गुरुकुल काशी, बुंदेलखंड समेत अन्य जगहों पर खुलने जा रहे हैं। उत्तरप्रदेश में अभी 16 गुरुकुल संचालित हो रहे हैं। भारतीय गुरुकुल की लोकप्रियता एवं स्वीकार्यता विदेशों में भी बढ़ रही है।
इसी वर्ष अप्रैल माह में उज्जैन में हुए गुरुकुल सम्मेलन में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण दिखा। इस सम्मेलन में देश के 868 गुरुकुलों व विदेश के 16 देशों जैसे नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, इंडानेशिया, कतर आदि के करीब 85 गुरुकुलों ने शिरकत की।
यह जानकारी अयोध्या पहुंचे भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय मंत्री मुकुल कानिटकर ने सोमवार को दी। भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय मंत्री मुकुल कानिटकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यूनिवर्सिटी में हो रहे रिसर्च पर भी हमारा ध्यान है।
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इसके लिए हमने रिसर्च फॉर रिसर्चजन्स फाउंडेशन का गठन किया है। बताया कि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच देश में 30 हजार लोगों को पीएचडी प्रदान की गई है। ऐसे में पीएचडी का स्तर प्रभावित हो रहा है, इसके लिए भी कार्य किए जा रहे हैं।
फाउंडेशन द्वारा देश के 40 विश्वविद्यालयों के साथ एक एमओयू किया जा रहा है। जिसमें फैजाबाद के अवध विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के आठ विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन्हें कार्यशालाएं आयोजित रिसर्च के लिए सुझाव दिए जाएंगे।
अनुसंधान के लिए 600 रिसर्च क्षेत्रों की सूची भी तैयारी की जा रही है। इसके जरिए पूरे देश भर के विशेषज्ञों के साथ पीएचडी करने का मौका मिलेगा। भारतीय शिक्षण मंडल गुरुकुल शिक्षा पद्धति को युगानुकूल बनाने के लिए प्रयासरत है।
कहा कि, शिक्षण मंडल की प्रेरणा से चल रहे गुरुकुलों में वेद, विज्ञान, योग, कला व कृषि शिक्षा तो दी ही जा रही है। यहां के छात्र कम्प्यूटर व लैपटॉप भी चला रहे हैं।
कहा कि, 29 अक्तूबर से 2 नवंबर तक बंगलूरू में पांच दिनों का आचार्य स्वाध्याय वर्ग आयोजित होने जा रहा है। जो आचार्य इसमें चुने जाएंगे उनको साल भर का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
हमारा प्रयास है कि गुरुकुल में शिक्षा प्रदान कर रहे आचार्यों को आजीविका का संकट न हो। इसके लिए आचार्य योग क्षेम निधि बनाने की भी योजना है। अभी 500 आचार्यों का चयन कर उनको निर्धारित राशि उपलब्ध करायी जाएगी।
मुकुल कानिटकर ने बताया कि गुरुकुल के छात्र को अब डिग्री की चिंता नहीं रहेगी। एनआईओएस (नेशन इंडिया ओपन स्कूल) बोर्ड में अब भारतीय ज्ञान परंपरा की शुरूआत हो गई है। बोर्ड ने छह विषयों वेद, दर्शन, योग, गणित, विज्ञान एवं ज्योतिष को शामिल कर लिया है।
यदि कोई छात्र गुरुकुल में रहते हुए भी डिग्री लेना चाहते हैं तो वे बिना स्कूल जाएं हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें एनआईओएस बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
वे यहां विषय चुनकर परीक्षा दे सकते हैं। साथ ही महर्षि सांदिपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान में भी गुरुकुलों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए वेद विद्यालयों को अधिकार देने की मांग केंद्र सरकार से की गई है। शीघ्र ही सरकार यह मांग पूरी कर लेगी इसकी पूरी उम्मीद है।
कानिटकर ने बताया कि बताया कि शीघ्र ही भारतीय भाषाओं में ई-मेल की व्यवस्था होगी। 29 सितंबर को विज्ञान भवन दिल्ली में शैक्षिक नेतृत्व पर गोष्ठी आयोजित की जाएगी। जिसमें देश भर के 400 कुलपति शामिल होंगे।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नई व्यवस्था का शुभारंभ करेंगे। बताया कि देवनागरी सहित भारत की 8 स्क्रिप्ट कन्नड़, गुजराती, बंग्ला आदि में ईमेल संभव हो सकेगा। इसी भाषा में वेबसाइट बनाने की भी सुविधा होगी।
अभी ई-मेल में हम रोमन लिपि लिखते हैं, इसके जरिए देवनागरी लिपि का प्रयोग हो सकेगा। इस दौरान वशिष्ठ गुरुकुल अयोध्या के संरक्षक अधिकारी राजकुमार दास, दिलीप सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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अयोध्या। प्रदेश में शिक्षण मंडल की प्रेरणा से आठ नए गुरुकुल काशी, बुंदेलखंड समेत अन्य जगहों पर खुलने जा रहे हैं। उत्तरप्रदेश में अभी 16 गुरुकुल संचालित हो रहे हैं। भारतीय गुरुकुल की लोकप्रियता एवं स्वीकार्यता विदेशों में भी बढ़ रही है।
इसी वर्ष अप्रैल माह में उज्जैन में हुए गुरुकुल सम्मेलन में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण दिखा। इस सम्मेलन में देश के 868 गुरुकुलों व विदेश के 16 देशों जैसे नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, इंडानेशिया, कतर आदि के करीब 85 गुरुकुलों ने शिरकत की।
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यह जानकारी अयोध्या पहुंचे भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय मंत्री मुकुल कानिटकर ने सोमवार को दी। भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय मंत्री मुकुल कानिटकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यूनिवर्सिटी में हो रहे रिसर्च पर भी हमारा ध्यान है।
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इसके लिए हमने रिसर्च फॉर रिसर्चजन्स फाउंडेशन का गठन किया है। बताया कि अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच देश में 30 हजार लोगों को पीएचडी प्रदान की गई है। ऐसे में पीएचडी का स्तर प्रभावित हो रहा है, इसके लिए भी कार्य किए जा रहे हैं।
फाउंडेशन द्वारा देश के 40 विश्वविद्यालयों के साथ एक एमओयू किया जा रहा है। जिसमें फैजाबाद के अवध विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के आठ विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन्हें कार्यशालाएं आयोजित रिसर्च के लिए सुझाव दिए जाएंगे।
अनुसंधान के लिए 600 रिसर्च क्षेत्रों की सूची भी तैयारी की जा रही है। इसके जरिए पूरे देश भर के विशेषज्ञों के साथ पीएचडी करने का मौका मिलेगा। भारतीय शिक्षण मंडल गुरुकुल शिक्षा पद्धति को युगानुकूल बनाने के लिए प्रयासरत है।
कहा कि, शिक्षण मंडल की प्रेरणा से चल रहे गुरुकुलों में वेद, विज्ञान, योग, कला व कृषि शिक्षा तो दी ही जा रही है। यहां के छात्र कम्प्यूटर व लैपटॉप भी चला रहे हैं।
कहा कि, 29 अक्तूबर से 2 नवंबर तक बंगलूरू में पांच दिनों का आचार्य स्वाध्याय वर्ग आयोजित होने जा रहा है। जो आचार्य इसमें चुने जाएंगे उनको साल भर का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
हमारा प्रयास है कि गुरुकुल में शिक्षा प्रदान कर रहे आचार्यों को आजीविका का संकट न हो। इसके लिए आचार्य योग क्षेम निधि बनाने की भी योजना है। अभी 500 आचार्यों का चयन कर उनको निर्धारित राशि उपलब्ध करायी जाएगी।
मुकुल कानिटकर ने बताया कि गुरुकुल के छात्र को अब डिग्री की चिंता नहीं रहेगी। एनआईओएस (नेशन इंडिया ओपन स्कूल) बोर्ड में अब भारतीय ज्ञान परंपरा की शुरूआत हो गई है। बोर्ड ने छह विषयों वेद, दर्शन, योग, गणित, विज्ञान एवं ज्योतिष को शामिल कर लिया है।
यदि कोई छात्र गुरुकुल में रहते हुए भी डिग्री लेना चाहते हैं तो वे बिना स्कूल जाएं हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें एनआईओएस बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
वे यहां विषय चुनकर परीक्षा दे सकते हैं। साथ ही महर्षि सांदिपनी वेद विद्या प्रतिष्ठान में भी गुरुकुलों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए वेद विद्यालयों को अधिकार देने की मांग केंद्र सरकार से की गई है। शीघ्र ही सरकार यह मांग पूरी कर लेगी इसकी पूरी उम्मीद है।
कानिटकर ने बताया कि बताया कि शीघ्र ही भारतीय भाषाओं में ई-मेल की व्यवस्था होगी। 29 सितंबर को विज्ञान भवन दिल्ली में शैक्षिक नेतृत्व पर गोष्ठी आयोजित की जाएगी। जिसमें देश भर के 400 कुलपति शामिल होंगे।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नई व्यवस्था का शुभारंभ करेंगे। बताया कि देवनागरी सहित भारत की 8 स्क्रिप्ट कन्नड़, गुजराती, बंग्ला आदि में ईमेल संभव हो सकेगा। इसी भाषा में वेबसाइट बनाने की भी सुविधा होगी।
अभी ई-मेल में हम रोमन लिपि लिखते हैं, इसके जरिए देवनागरी लिपि का प्रयोग हो सकेगा। इस दौरान वशिष्ठ गुरुकुल अयोध्या के संरक्षक अधिकारी राजकुमार दास, दिलीप सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।