{"_id":"5b43aace4f1c1b97468b577b","slug":"181531161294-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरयू किनारे 50 एकड़ पर होगी खस व केवड़ा की खेती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरयू किनारे 50 एकड़ पर होगी खस व केवड़ा की खेती
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
50 एकड़ पर होगी खस व केवड़ा की खेती
फैजाबाद। केंद्र सरकार के गंगा हरितमा अभियान 2018 के तहत सरयू के किनारे बेकार पड़ी भूमि में जल्द ही खस व केवड़ा की फसलें लहलहायेंगी। वन विभाग ने सरयू के किनारे स्थित चार ब्लॉकों के एक-एक गांव का चयन कर लिया है। प्रत्येक गांव में 12.5 एकड़ पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पांच वर्षों तक खेती का कार्य वन विभाग, उद्यान विभाग, ग्राम विकास विभाग व अवध विश्वविद्यालय सम्मिलित रूप से करेगा। इसके उपरांत खेती का जिम्मा ग्रामीणों को सौंप दिया जाएगा।
पूरी योजना का मकसद किसानों की आय दुगनी करने व नदी के किनारे हो रहे भू-स्खलन को रोकना है। फिलहाल पूरा ब्लॉक के आलापुर ग्रामसभा में इसका कार्य शुरू भी हो चुका है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष सुगंध व सुरस विकास केंद्र कन्नौज से एमओयू किया था। इसमें अवध विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ इत्र बनाने की मशीन लगने का समझौता हुआ था।
मौजूदा समय में यह कार्य प्रगति पर है। जल्द ही फूलों से सेंट बनाने की मशीन विश्वविद्यालय कैंपस में लग जाएगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय खस की खेती कराने के लिए भी तैयार है। हालांकि पूरी योजना का नोडल विभाग वन विभाग है। वन विभाग की ओर से केंद्र सरकार की योजना के अधीन सरयू के किनारे स्थित गांवों का चयन कर भूमि विश्वविद्यालय को दी जाएगी।
विज्ञापन
इसमें विश्वविद्यालय अपनी देखरेख में खस व केवड़े की खेती कराएगा। वन विभाग की ओर से सरयू के किनारे स्थित मवई, मया, पूरा व सोहावल ब्लॉक का चयन हुआ है। इसमें पूरा ब्लॉक के आलापुर गांव में योजना परवान चढ़नी शुरू हो गई है। इसके लिए पांच हेक्टेयर में 55 सौ पौधे, खस, केवड़ा, लेमन ग्रास सहित बायो मेडिकल से संबंधित लगाए जाएंगे।
शेष तीन ब्लॉकों में गांवों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। चार ब्लॉकों के एक-एक गांव के चयन के बाद वन विभाग व उद्यान विभाग का कार्य पौधरोपण व उसकी देखरेख का होगा। साथ ही अवध विश्वविद्यालय सुंगध व सुरस विकास विभाग के सहयोग से खस व केवड़ा की खेती कराएगा।
खस व केवड़े का कई रूपों में हो सकता है प्रयोग
डीएफओ डॉ. रवि कुमार सिंह बताते हैं कि खस एक महत्वपूर्ण घास है। यह नदियों की कटान को रोकने में सहायक होने के साथ इत्र, सेंट बनाने में प्रयोग की जाती है। साथ ही इसका इस्तेमाल विकार व उदर रोगों में भी किया जाता है।
केंद्र सरकार के गंगा हरितमा अभियान 2018 के तहत सरयू के किनारे 50 एकड़ में बागवानी के साथ खस, केवड़ा, लेमन ग्रास सहित बायो मेडिकल से संबंधित पौधों की खेती की जाएगी। इसमें वन विभाग नोडल विभाग के रूप में रहेगा। साथ ही उद्यान, ग्राम विकास विभाग व अवध विश्वविद्यालय की देखरेख में पूरी योजना परवान चढ़ेगी। - डॉ. रवि कुमार सिंह, डीएफओ, फैजाबाद
विज्ञापन
फैजाबाद। केंद्र सरकार के गंगा हरितमा अभियान 2018 के तहत सरयू के किनारे बेकार पड़ी भूमि में जल्द ही खस व केवड़ा की फसलें लहलहायेंगी। वन विभाग ने सरयू के किनारे स्थित चार ब्लॉकों के एक-एक गांव का चयन कर लिया है। प्रत्येक गांव में 12.5 एकड़ पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पांच वर्षों तक खेती का कार्य वन विभाग, उद्यान विभाग, ग्राम विकास विभाग व अवध विश्वविद्यालय सम्मिलित रूप से करेगा। इसके उपरांत खेती का जिम्मा ग्रामीणों को सौंप दिया जाएगा।
पूरी योजना का मकसद किसानों की आय दुगनी करने व नदी के किनारे हो रहे भू-स्खलन को रोकना है। फिलहाल पूरा ब्लॉक के आलापुर ग्रामसभा में इसका कार्य शुरू भी हो चुका है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष सुगंध व सुरस विकास केंद्र कन्नौज से एमओयू किया था। इसमें अवध विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ इत्र बनाने की मशीन लगने का समझौता हुआ था।
विज्ञापन
मौजूदा समय में यह कार्य प्रगति पर है। जल्द ही फूलों से सेंट बनाने की मशीन विश्वविद्यालय कैंपस में लग जाएगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय खस की खेती कराने के लिए भी तैयार है। हालांकि पूरी योजना का नोडल विभाग वन विभाग है। वन विभाग की ओर से केंद्र सरकार की योजना के अधीन सरयू के किनारे स्थित गांवों का चयन कर भूमि विश्वविद्यालय को दी जाएगी।
विज्ञापन
इसमें विश्वविद्यालय अपनी देखरेख में खस व केवड़े की खेती कराएगा। वन विभाग की ओर से सरयू के किनारे स्थित मवई, मया, पूरा व सोहावल ब्लॉक का चयन हुआ है। इसमें पूरा ब्लॉक के आलापुर गांव में योजना परवान चढ़नी शुरू हो गई है। इसके लिए पांच हेक्टेयर में 55 सौ पौधे, खस, केवड़ा, लेमन ग्रास सहित बायो मेडिकल से संबंधित लगाए जाएंगे।
शेष तीन ब्लॉकों में गांवों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। चार ब्लॉकों के एक-एक गांव के चयन के बाद वन विभाग व उद्यान विभाग का कार्य पौधरोपण व उसकी देखरेख का होगा। साथ ही अवध विश्वविद्यालय सुंगध व सुरस विकास विभाग के सहयोग से खस व केवड़ा की खेती कराएगा।
खस व केवड़े का कई रूपों में हो सकता है प्रयोग
डीएफओ डॉ. रवि कुमार सिंह बताते हैं कि खस एक महत्वपूर्ण घास है। यह नदियों की कटान को रोकने में सहायक होने के साथ इत्र, सेंट बनाने में प्रयोग की जाती है। साथ ही इसका इस्तेमाल विकार व उदर रोगों में भी किया जाता है।
केंद्र सरकार के गंगा हरितमा अभियान 2018 के तहत सरयू के किनारे 50 एकड़ में बागवानी के साथ खस, केवड़ा, लेमन ग्रास सहित बायो मेडिकल से संबंधित पौधों की खेती की जाएगी। इसमें वन विभाग नोडल विभाग के रूप में रहेगा। साथ ही उद्यान, ग्राम विकास विभाग व अवध विश्वविद्यालय की देखरेख में पूरी योजना परवान चढ़ेगी। - डॉ. रवि कुमार सिंह, डीएफओ, फैजाबाद