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172 बड़े अस्पतालों में नहीं है आग से बचाव के इंतजाम
Updated Sun, 20 May 2018 11:04 PM IST
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172 अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम नहीं
फैजाबाद। अस्पतालों में आए दिन हो रही आगजनी की घटनाओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेफिक्र दिख रहा है। केजीएमयू लखनऊ और कोलकाता हादसे के बाद शासन ने सभी अस्पतालों में आग से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं लेकिन जिले के ही 172 बड़े निजी अस्पतालों में आग से बचाव की व्यवस्था नहीं है। ये अस्पताल बिना फायर विभाग की एनओसी लिए चल रहे हैं। यही नहीं करीब 500 क्लीनिक भी फायर विभाग के मानक की कसौटी के विपरीत संचालित हो रहे हैं।
जिले में बेड युक्त कुल 178 निजी अस्पताल हैं, जो काफी लंबे समय से संचालित हैं। फायर विभाग के अनुसार शहर के देवा हॉस्पिटल, हर्षण ह्रदय संस्थान, जगत हॉस्पिटल, अवध नर्सिंग होम, यशलोक हॉस्पिटल व चिरंजीवी हास्पिटल ने ही अग्निशमन की मानक के अनुसार व्यवस्था करके एनओसी प्राप्त किया है। शेष 172 निजी अस्पताल में आग से बचाव की व्यवस्था रामभरोसे ही है। यहां कहीं-कहीं नाम मात्र के सिलेंडर जंक खाते देखे जा सकते हैं।
इसके अलावा बिना बेड के कुल क्लीनिकों की संख्या भी करीब 500 है। यहां भी मानक के अनुसार न तो आग से बचाव की कोई व्यवस्था है, न ही किसी प्रकार की एनओसी। बीते सत्र में भी फायर विभाग ने कुछ अस्पतालों को अग्निशमन की व्यवस्था करके एनओसी प्राप्त करने के लिए नोटिस दिया था। लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। न तो अस्पताल संचालकों ने इसमें कोई रुचि ली, न ही जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई की। इनमें भी कई नर्सिंग होम गली कूचे में व रिहायशी इलाकों में संचालित हो रहे हैं। जहां विषम परिस्थितियों में फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती। किन परिस्थितियों में इनका पंजीकरण नियम-कानून ताख पर रखकर किया जा रहा है, यह समझ से परे है। खास बात यह है कि फायर विभाग को सभी अस्पतालों की सूची प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार मांगने के बावजूद भी सभी नर्सिंग होम की सूची स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं दी गई, जिससे कार्रवाई कर पाने में असुविधा हो रही है।
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क्या है नियम..
फायर एक्सटिंग्यूशर, होजरील का निर्माण, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर्स सिस्टम, टेरिस टैंक का एरिया के हिसाब से निर्माण, डाउनकमर का प्रावधान, मैन्युअली ऑपरेटेड फायर अलार्म सिस्टम, मल्टीस्टोरी अस्पताल में 50 हजार लीटर क्षमता का भूमिगत टैंक, विद्युत चालित पंप, वेटराइजर की व्यवस्था, नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया एवं भवन विकास उपविधि के अनुसार भवन की संरचना आदि। इसके अलावा संकरी गलियों में नर्सिंग होम नहीं होना चाहिए, हर साल फायर उपकरणों की जांच हो, पांच मीटर से ऊंची बिल्डिंग में लैंडिंग वॉल्ब हो।
जिले के 178 में से सिर्फ छह निजी अस्पतालों ने ही फायर विभाग से एनओसी ली है। अन्य अस्पताल प्रबंधकों की ओर से कोई रुचि नहीं ली गई। हाल में ही सात अस्पतालों को नोटिस भी दिया गया है। जिले के कुल अस्पतालों की सूची के लिए सीएमओ को भी पत्र लिखा जा रहा है।-राजकिशोर राय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी फैजाबाद
फायर विभाग करे कार्रवाई
जिन अस्पतालों ने अभी एनओसी नहीं प्राप्त की है, उन पर अग्निशमन विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें स्वास्थ्य विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है।-डॉ. सीबी द्विवेदी, प्रभारी सीएमओ फैजाबाद
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फैजाबाद। अस्पतालों में आए दिन हो रही आगजनी की घटनाओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेफिक्र दिख रहा है। केजीएमयू लखनऊ और कोलकाता हादसे के बाद शासन ने सभी अस्पतालों में आग से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं लेकिन जिले के ही 172 बड़े निजी अस्पतालों में आग से बचाव की व्यवस्था नहीं है। ये अस्पताल बिना फायर विभाग की एनओसी लिए चल रहे हैं। यही नहीं करीब 500 क्लीनिक भी फायर विभाग के मानक की कसौटी के विपरीत संचालित हो रहे हैं।
जिले में बेड युक्त कुल 178 निजी अस्पताल हैं, जो काफी लंबे समय से संचालित हैं। फायर विभाग के अनुसार शहर के देवा हॉस्पिटल, हर्षण ह्रदय संस्थान, जगत हॉस्पिटल, अवध नर्सिंग होम, यशलोक हॉस्पिटल व चिरंजीवी हास्पिटल ने ही अग्निशमन की मानक के अनुसार व्यवस्था करके एनओसी प्राप्त किया है। शेष 172 निजी अस्पताल में आग से बचाव की व्यवस्था रामभरोसे ही है। यहां कहीं-कहीं नाम मात्र के सिलेंडर जंक खाते देखे जा सकते हैं।
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इसके अलावा बिना बेड के कुल क्लीनिकों की संख्या भी करीब 500 है। यहां भी मानक के अनुसार न तो आग से बचाव की कोई व्यवस्था है, न ही किसी प्रकार की एनओसी। बीते सत्र में भी फायर विभाग ने कुछ अस्पतालों को अग्निशमन की व्यवस्था करके एनओसी प्राप्त करने के लिए नोटिस दिया था। लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। न तो अस्पताल संचालकों ने इसमें कोई रुचि ली, न ही जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई की। इनमें भी कई नर्सिंग होम गली कूचे में व रिहायशी इलाकों में संचालित हो रहे हैं। जहां विषम परिस्थितियों में फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती। किन परिस्थितियों में इनका पंजीकरण नियम-कानून ताख पर रखकर किया जा रहा है, यह समझ से परे है। खास बात यह है कि फायर विभाग को सभी अस्पतालों की सूची प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार मांगने के बावजूद भी सभी नर्सिंग होम की सूची स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं दी गई, जिससे कार्रवाई कर पाने में असुविधा हो रही है।
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क्या है नियम..
फायर एक्सटिंग्यूशर, होजरील का निर्माण, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर्स सिस्टम, टेरिस टैंक का एरिया के हिसाब से निर्माण, डाउनकमर का प्रावधान, मैन्युअली ऑपरेटेड फायर अलार्म सिस्टम, मल्टीस्टोरी अस्पताल में 50 हजार लीटर क्षमता का भूमिगत टैंक, विद्युत चालित पंप, वेटराइजर की व्यवस्था, नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया एवं भवन विकास उपविधि के अनुसार भवन की संरचना आदि। इसके अलावा संकरी गलियों में नर्सिंग होम नहीं होना चाहिए, हर साल फायर उपकरणों की जांच हो, पांच मीटर से ऊंची बिल्डिंग में लैंडिंग वॉल्ब हो।
जिले के 178 में से सिर्फ छह निजी अस्पतालों ने ही फायर विभाग से एनओसी ली है। अन्य अस्पताल प्रबंधकों की ओर से कोई रुचि नहीं ली गई। हाल में ही सात अस्पतालों को नोटिस भी दिया गया है। जिले के कुल अस्पतालों की सूची के लिए सीएमओ को भी पत्र लिखा जा रहा है।-राजकिशोर राय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी फैजाबाद
फायर विभाग करे कार्रवाई
जिन अस्पतालों ने अभी एनओसी नहीं प्राप्त की है, उन पर अग्निशमन विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें स्वास्थ्य विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है।-डॉ. सीबी द्विवेदी, प्रभारी सीएमओ फैजाबाद