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शिक्षा मित्रों ने फिर ठप कर दी बुनियादी शिक्षा
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:33 AM IST
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विद्यालयों में बंद मिला ताला तो कहीं ठप रही पढ़ाई
सीन 1
बच्चों को न मिला भोजन न हुई पढ़ाई
शहर के प्राइमरी पाठशाला रामनगर में बच्चों को नहीं पता था कि गुरुजी हड़ताल पर हैं। यहां समायोजित शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। नौकरी जाने के बाद भी कोई इंतजाम नहीं था। लिहाजा सुबह आठ बजे से बच्चे आए और भोजन व पढ़ाई ठप देख लौटने को मजबूर हुए।
सीन 2
रीडगंज प्राइमरी स्कूल बंद रहा ताला
रीडगंज प्राइमरी स्कूल में सुबह से गुरुवार को ताला बंद था। शिक्षा विभाग का दावा था कि यहां के बच्चों को एकल होने के नाते पास के जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाया गया, मगर वहां ताला खुला होने के बाद भी दोपहर 12 बजे सन्नाटा था। सुबह आए बच्चे वापस होने को मजबूर बताए गए।
सीन 3
स्कूल में ताला देख बच्चे हुए वापस
शहर के अंगुरीबाग प्राथमिक स्कूल में भी सुबह से ताला बंद रहा। पड़ोस के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ बच्चे आए थे, मगर ताला बंद देख 10 बजे तक चले गए। एक अभिभावक का कहना था है फिर शिक्षा मित्रों की हड़ताल शुरू होने से बच्चों का भविष्य चौपट होगा।
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फैजाबाद। शिक्षामित्रों ने पखवारे बाद फिर बुनियादी शिक्षा-व्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। उनकी हड़ताल से जिले में 40 फीसदी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई ठप प्राय दिखी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर समायोजित शिक्षकों की नौकरी जाने के बाद भी शहर के 42 स्कूलों में से इन्हीं के भरोसे एकल चल रहे 30 स्कूलों में कोई वैकल्पिक इंतजाम न होने से ताला बंद रहा।
पिछली सपा सरकार ने जिले के कुल 1539 प्राथमिक स्कूलों में 1992 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर तैनाती दी थी। तीन साल से इन शिक्षकों ने यहां बुनियादी शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए जीतोड़ मेहनत की। मगर टीईटी अधिनियम के तहत समायोजन न होने से शिक्षकों को कहीं का नहीं छोड़ा है।
उनके परिवार की हालत बेहद चिंतनीय हो गई है। इस बीच राज्य सरकार ने आश्वासन देकर एक अगस्त को आंदोलन तो समाप्त करा दिया। मगर नौकरी बचाने को लेकर कोई अध्यादेश जारी करने के बजाय नौकरी समाप्त कर दी गई और पुन: मूल पद शिक्षामित्र बना दिया। शिक्षामित्र को 10 हजार प्रतिमाह मानदेय देने के प्रस्ताव से नाराज शिक्षामित्रों ने गुरुवार को हड़ताल कर दी।
इससे जिलेभर में बुनियादी शिक्षा बेपटरी हो गई। शहर के रामनगर, नाका, जनौरा, मकबरा, रीडगंज, सहादतगंज प्रथम, अब्बू सराय, फतेहगंज, बेगमगंज गढैया, अंगुरीबाग, हसनू कटरा, धारालरोड आदि के एकल शिक्षकों ने सुबह से ही आंदोलन की राह पकड़ ली। ऐसे में इन सभी जगह ताला बंद रहा। शिक्षकों के पास ही स्कूलों की चाभियां थीं।
स्कूलों में ताला लगने की शासन को भेजी रिपोर्ट : बीएसए
प्रभारी बीएसए संजय कुमार ने बताया कि हड़ताल का सैकड़ों स्कूलों में असर रहा। हालांकि जहां एक ही परिसर में प्राइमरी स्कूल हैं, वहां जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को प्राइमरी भी देखने को कहा गया था।
शहर में कुल 13 स्कूल बंद होने की रिपोर्ट मिली है, इसे शासन को भेजा जा रहा है। शासन से सभी शिक्षामित्रों का ब्योरा मांगा गया है। कुछ लोग हस्ताक्षर बनाए हुए पाए गए हैं, तो कुछ लोग सीधे आंदोलन में हिस्सा लेने चले गए हैं।
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सीन 1
बच्चों को न मिला भोजन न हुई पढ़ाई
शहर के प्राइमरी पाठशाला रामनगर में बच्चों को नहीं पता था कि गुरुजी हड़ताल पर हैं। यहां समायोजित शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहा है। नौकरी जाने के बाद भी कोई इंतजाम नहीं था। लिहाजा सुबह आठ बजे से बच्चे आए और भोजन व पढ़ाई ठप देख लौटने को मजबूर हुए।
सीन 2
रीडगंज प्राइमरी स्कूल बंद रहा ताला
रीडगंज प्राइमरी स्कूल में सुबह से गुरुवार को ताला बंद था। शिक्षा विभाग का दावा था कि यहां के बच्चों को एकल होने के नाते पास के जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाया गया, मगर वहां ताला खुला होने के बाद भी दोपहर 12 बजे सन्नाटा था। सुबह आए बच्चे वापस होने को मजबूर बताए गए।
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सीन 3
स्कूल में ताला देख बच्चे हुए वापस
शहर के अंगुरीबाग प्राथमिक स्कूल में भी सुबह से ताला बंद रहा। पड़ोस के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ बच्चे आए थे, मगर ताला बंद देख 10 बजे तक चले गए। एक अभिभावक का कहना था है फिर शिक्षा मित्रों की हड़ताल शुरू होने से बच्चों का भविष्य चौपट होगा।
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फैजाबाद। शिक्षामित्रों ने पखवारे बाद फिर बुनियादी शिक्षा-व्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। उनकी हड़ताल से जिले में 40 फीसदी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई ठप प्राय दिखी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर समायोजित शिक्षकों की नौकरी जाने के बाद भी शहर के 42 स्कूलों में से इन्हीं के भरोसे एकल चल रहे 30 स्कूलों में कोई वैकल्पिक इंतजाम न होने से ताला बंद रहा।
पिछली सपा सरकार ने जिले के कुल 1539 प्राथमिक स्कूलों में 1992 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर तैनाती दी थी। तीन साल से इन शिक्षकों ने यहां बुनियादी शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए जीतोड़ मेहनत की। मगर टीईटी अधिनियम के तहत समायोजन न होने से शिक्षकों को कहीं का नहीं छोड़ा है।
उनके परिवार की हालत बेहद चिंतनीय हो गई है। इस बीच राज्य सरकार ने आश्वासन देकर एक अगस्त को आंदोलन तो समाप्त करा दिया। मगर नौकरी बचाने को लेकर कोई अध्यादेश जारी करने के बजाय नौकरी समाप्त कर दी गई और पुन: मूल पद शिक्षामित्र बना दिया। शिक्षामित्र को 10 हजार प्रतिमाह मानदेय देने के प्रस्ताव से नाराज शिक्षामित्रों ने गुरुवार को हड़ताल कर दी।
इससे जिलेभर में बुनियादी शिक्षा बेपटरी हो गई। शहर के रामनगर, नाका, जनौरा, मकबरा, रीडगंज, सहादतगंज प्रथम, अब्बू सराय, फतेहगंज, बेगमगंज गढैया, अंगुरीबाग, हसनू कटरा, धारालरोड आदि के एकल शिक्षकों ने सुबह से ही आंदोलन की राह पकड़ ली। ऐसे में इन सभी जगह ताला बंद रहा। शिक्षकों के पास ही स्कूलों की चाभियां थीं।
स्कूलों में ताला लगने की शासन को भेजी रिपोर्ट : बीएसए
प्रभारी बीएसए संजय कुमार ने बताया कि हड़ताल का सैकड़ों स्कूलों में असर रहा। हालांकि जहां एक ही परिसर में प्राइमरी स्कूल हैं, वहां जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को प्राइमरी भी देखने को कहा गया था।
शहर में कुल 13 स्कूल बंद होने की रिपोर्ट मिली है, इसे शासन को भेजा जा रहा है। शासन से सभी शिक्षामित्रों का ब्योरा मांगा गया है। कुछ लोग हस्ताक्षर बनाए हुए पाए गए हैं, तो कुछ लोग सीधे आंदोलन में हिस्सा लेने चले गए हैं।