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एक माह में दो ग्रहण बन रहा शत्रुहंता योग
Updated Fri, 11 Aug 2017 01:04 AM IST
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भारत की बढे़गी साख, विरोधी होंगे परास्त : स्वामी हरिदयाल
अयोध्या। अगस्त में पड़ रहे दो ग्रहण एवं चार ग्रहों का एक राशि में मिलन पृथ्वी पर उथल-पुथल, राजनीतिक उतार-चढ़ाव के साथ-साथ भारत की प्रगति व विरोधियों की पराजय का योग बना रहा है। एक माह के भीतर दो ग्रहण पड़ने के कारण भारत में तमाम परिवर्तन होने के आसार हैं।
शनिधाम पीठाधीश्वर ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र बताते हैं कि अगस्त माह में दो ग्रहण होने के कारण विभिन्न योग बन रहे हैं। बताया कि, विगत सात अगस्त को चंद्रग्रहण लगा था, अब पुन: 21 अगस्त को सूर्यग्रहण लगने जा रहा है।
हालांकि ये भारत में दिखाई नहीं देगा, इसके बावजूद एक माह में दो ग्रहण के चलते कई शुभ व अशुभ प्रभाव होेंगे। स्वामी हरिदयाल मिश्र ने बताया कि, भाद्रपद अमावस्या 21 अगस्त को पूर्ण खग्रास सूर्यग्रहण लगाने जा रहा है। भारतीय समयानुसार 21 की रात्रि 09:21 बजे से रात्रि 02:34 बजे तक ग्रहण का काल होगा।
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ये ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। स्वामी हरिदयाल ने बताया कि, ग्रहण के समय वृष राशि में चार ग्रह राहु, शुक्र, चंद्रमा व मंगल होंगे। राहु-चंद्रमा के योग के चलते ग्रहण लग रहा है। वहीं मंगल का बैठना अशुभ माना जाता है। ग्रहों का ये योग अच्छा संकेत नहीं है।
इससे राजनीतिक उथल-पुथल, आंधी-तूफान, वर्षा आदि से जनहानि हो सकती है। हालांकि शुक्र ग्रह के होने के कारण शत्रुहंता योग भी बन रहा है। जिससे कि, भारत को आंख दिखा रहे चीन को पीछे हटना पड़ सकता है।
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अयोध्या। अगस्त में पड़ रहे दो ग्रहण एवं चार ग्रहों का एक राशि में मिलन पृथ्वी पर उथल-पुथल, राजनीतिक उतार-चढ़ाव के साथ-साथ भारत की प्रगति व विरोधियों की पराजय का योग बना रहा है। एक माह के भीतर दो ग्रहण पड़ने के कारण भारत में तमाम परिवर्तन होने के आसार हैं।
शनिधाम पीठाधीश्वर ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र बताते हैं कि अगस्त माह में दो ग्रहण होने के कारण विभिन्न योग बन रहे हैं। बताया कि, विगत सात अगस्त को चंद्रग्रहण लगा था, अब पुन: 21 अगस्त को सूर्यग्रहण लगने जा रहा है।
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हालांकि ये भारत में दिखाई नहीं देगा, इसके बावजूद एक माह में दो ग्रहण के चलते कई शुभ व अशुभ प्रभाव होेंगे। स्वामी हरिदयाल मिश्र ने बताया कि, भाद्रपद अमावस्या 21 अगस्त को पूर्ण खग्रास सूर्यग्रहण लगाने जा रहा है। भारतीय समयानुसार 21 की रात्रि 09:21 बजे से रात्रि 02:34 बजे तक ग्रहण का काल होगा।
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ये ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। स्वामी हरिदयाल ने बताया कि, ग्रहण के समय वृष राशि में चार ग्रह राहु, शुक्र, चंद्रमा व मंगल होंगे। राहु-चंद्रमा के योग के चलते ग्रहण लग रहा है। वहीं मंगल का बैठना अशुभ माना जाता है। ग्रहों का ये योग अच्छा संकेत नहीं है।
इससे राजनीतिक उथल-पुथल, आंधी-तूफान, वर्षा आदि से जनहानि हो सकती है। हालांकि शुक्र ग्रह के होने के कारण शत्रुहंता योग भी बन रहा है। जिससे कि, भारत को आंख दिखा रहे चीन को पीछे हटना पड़ सकता है।