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सौहार्द से अयोध्या में बनाएं भव्य राममंदिर-AMBEDKAR NAGAR
Updated Thu, 16 Nov 2017 10:46 PM IST
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अयोध्या। अयोध्या विवाद का सर्वमान्य हल निकालने को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने गुरुवार को मुकदमे के पक्षकारों समेत संत-धर्माचार्यों से मुलाकात की। कहा कि सौहार्र्द से अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का रास्ता निकल सकता है। वे एक नए अध्याय लिखने का प्रयास करने आए हैं। कहा कि विवाद हल होने में समय लग सकता है, लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि अयोध्या के संतों के मार्गदर्शन में हम यह विवाद हल कराने में कामयाब होंगे।
श्रीश्री रविशंकर अपराह्न 11:40 बजे सीधे मणिरामदास जी की छावनी पहुंचे और श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने रामलला का दर्शन और हनुमानगढ़ी में पूजन-अर्चन किया। यहां से श्रीश्री का काफिला सीधे निर्मोही अखाड़ा पहुंचा, जहां उन्होंने सौहार्र्द से राम मंदिर निर्माण की उम्मीद जताई। इसके बाद रविशंकर बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी से मिलने टेढ़ीबाजार पहुंचे। इकबाल ने अयोध्या विवाद के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम विकल्प माना। कहा, श्रीश्री ने उनसे राम मंदिर निर्माण को लेकर न कोई फार्मूला बताया न ही किसी तरह के सहयोग की बात कही। इसके बाद रविशंकर ने बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब से काफी देर बंद कमरे में मुलाकात की। हाजी महबूब ने कहा कि श्रीश्री के पास कोई फार्मूला नहीं था, हमने साफ कह दिया कि जहां हमारी मस्जिद थी उतनी जगह छोड़कर मंदिर बने हमें कोई आपत्ति नहीं है। इस पर अगर वे समझौता चाहते हैं तो तैयार हैं, वरना सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें।
संतों से की गुप्त चर्चा, कहा-राम मंदिर ही विकल्प
श्रीश्री रविशंकर का पहला पड़ाव मणिरामदास की छावनी थी, यहां से महंत नृत्यगोपाल दास के साथ दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय पहुंचें। यहां एक बंद कमरे में करीब 15 मिनट तक अयोध्या के संतों के साथ वार्ता की। बाहर निकलने पर श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि अयोध्या के संतों के मार्गदर्शन में विवाद हल कराने में कामयाब होंगे। महंत नृत्यगोपाल दास ने आध्यात्मिक गुरू श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात के बाद कहा कि श्रीश्री को हमारी शुभकामनाएं हैं कि वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर कराने में सफल हों। इस दौरान नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, महंत सियाकिशोरी शरण, रामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत शशिकांत दास सहित अन्य संतों ने श्रीश्री का अयोध्या में स्वागत किया।
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हनुमानगढ़ी व रामलला के दरबार में टेका माथा
श्रीश्री रविशंकर ने दोपहर 1:00 बजे रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। इसके बाद हनुमानगढ़ी पहुंचे और अपनी श्रद्धा निवेदित की। रामलला के दर्शन के बाद श्रीश्री ने कहा कि अभी वे सिर्फ लोगों से मिलने आए हैं। तीन माह बाद कोशिश रंग लाती दिखेगी। यहां से उत्तरतोताद्रिमठ पहुंचे श्रीश्री ने लंच और विश्राम किया। मीडिया से बातचीत में कहा कि भले ही अभी दोनों पक्ष उनकी मध्यस्थता को लेकर गर्मजोशी नहीं दिखा रहे हैं लेकिन शीघ्र ही सभी एक साथ दिखेंगे।
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श्रीश्री रविशंकर अपराह्न 11:40 बजे सीधे मणिरामदास जी की छावनी पहुंचे और श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने रामलला का दर्शन और हनुमानगढ़ी में पूजन-अर्चन किया। यहां से श्रीश्री का काफिला सीधे निर्मोही अखाड़ा पहुंचा, जहां उन्होंने सौहार्र्द से राम मंदिर निर्माण की उम्मीद जताई। इसके बाद रविशंकर बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी से मिलने टेढ़ीबाजार पहुंचे। इकबाल ने अयोध्या विवाद के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम विकल्प माना। कहा, श्रीश्री ने उनसे राम मंदिर निर्माण को लेकर न कोई फार्मूला बताया न ही किसी तरह के सहयोग की बात कही। इसके बाद रविशंकर ने बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब से काफी देर बंद कमरे में मुलाकात की। हाजी महबूब ने कहा कि श्रीश्री के पास कोई फार्मूला नहीं था, हमने साफ कह दिया कि जहां हमारी मस्जिद थी उतनी जगह छोड़कर मंदिर बने हमें कोई आपत्ति नहीं है। इस पर अगर वे समझौता चाहते हैं तो तैयार हैं, वरना सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें।
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संतों से की गुप्त चर्चा, कहा-राम मंदिर ही विकल्प
श्रीश्री रविशंकर का पहला पड़ाव मणिरामदास की छावनी थी, यहां से महंत नृत्यगोपाल दास के साथ दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय पहुंचें। यहां एक बंद कमरे में करीब 15 मिनट तक अयोध्या के संतों के साथ वार्ता की। बाहर निकलने पर श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि अयोध्या के संतों के मार्गदर्शन में विवाद हल कराने में कामयाब होंगे। महंत नृत्यगोपाल दास ने आध्यात्मिक गुरू श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात के बाद कहा कि श्रीश्री को हमारी शुभकामनाएं हैं कि वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर कराने में सफल हों। इस दौरान नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, महंत सियाकिशोरी शरण, रामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत शशिकांत दास सहित अन्य संतों ने श्रीश्री का अयोध्या में स्वागत किया।
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हनुमानगढ़ी व रामलला के दरबार में टेका माथा
श्रीश्री रविशंकर ने दोपहर 1:00 बजे रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। इसके बाद हनुमानगढ़ी पहुंचे और अपनी श्रद्धा निवेदित की। रामलला के दर्शन के बाद श्रीश्री ने कहा कि अभी वे सिर्फ लोगों से मिलने आए हैं। तीन माह बाद कोशिश रंग लाती दिखेगी। यहां से उत्तरतोताद्रिमठ पहुंचे श्रीश्री ने लंच और विश्राम किया। मीडिया से बातचीत में कहा कि भले ही अभी दोनों पक्ष उनकी मध्यस्थता को लेकर गर्मजोशी नहीं दिखा रहे हैं लेकिन शीघ्र ही सभी एक साथ दिखेंगे।