{"_id":"597f77d94f1c1b56128b4633","slug":"161501525977-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देव प्रतिमाओं पर टैक्स से संतों में आक्रोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देव प्रतिमाओं पर टैक्स से संतों में आक्रोश
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएम मोदी से करमुक्त करने की उठाई मांग
अयोध्या। संगमरमर से निर्मित देव प्रतिमाओं पर जीएसटी लगने पर रामनगरी के संतों ने आक्रोश व्यक्त किया है। अयोध्या के चरणपादुका मंदिर में महंत लक्ष्मणदास की अध्यक्षता में बैठक कर संतों ने भगवान को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल देव प्रतिमाओं को करमुक्त करने की मांग उठाई है।
बैठक में जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि आस्था पर टैक्स व पूजा पर पहरा नहीं होना चाहिए। डॉ. रामानंद दास ने कहा कि, भाजपा सरकार एक तरफ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करती है तो दूसरी तरफ देव प्रतिमाओं पर कर लगा दिया है। सरकार को जीएसटी का स्वरूप बदलना चाहिए।
नाका हनुमानगढ़ी के पुजारी रामदास ने कहा कि, देवी-देवताओं की मूर्ति पर कर कतई नहीं होना चाहिए। व्यापार पर टैक्स तो समझ में आता है लेकिन धर्म पर टैक्स आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि, देव प्रतिमाओं की खरीद मुख्यत: दान के धन से होती है जो कि सामाजिक समुदायों के योगदान से एकत्र होता है। ऐसे में इस पर टैक्स लेना उचित नहीं है।
विज्ञापन
मूर्तियां बनाने वाली श्री आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति कलाकार संस्था के अध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने भी देव प्रतिमाओं पर कर को चिंतनीय बताते हुए कहा कि हाल ही में लगे जीएसटी से समस्त मूर्तिकार चिंतित हैं तथा उनकी रोजी रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
ऐसे में मूर्तियों को करमुक्त रखना चाहिए। बैठक में मौजूद महंत माधवदास, महंत रामचंद्रदास, महंत दिनेश दास, महंत अशोक दास, महंत रामकृपाल दास, संतरामदास, आचार्य रामदेवदास शास्त्री सहित अन्य ने केंद्र सरकार से तत्काल देव प्रतिमाओं को टैक्स मुक्त करने की मांग की।
विज्ञापन
अयोध्या। संगमरमर से निर्मित देव प्रतिमाओं पर जीएसटी लगने पर रामनगरी के संतों ने आक्रोश व्यक्त किया है। अयोध्या के चरणपादुका मंदिर में महंत लक्ष्मणदास की अध्यक्षता में बैठक कर संतों ने भगवान को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल देव प्रतिमाओं को करमुक्त करने की मांग उठाई है।
बैठक में जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि आस्था पर टैक्स व पूजा पर पहरा नहीं होना चाहिए। डॉ. रामानंद दास ने कहा कि, भाजपा सरकार एक तरफ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करती है तो दूसरी तरफ देव प्रतिमाओं पर कर लगा दिया है। सरकार को जीएसटी का स्वरूप बदलना चाहिए।
विज्ञापन
नाका हनुमानगढ़ी के पुजारी रामदास ने कहा कि, देवी-देवताओं की मूर्ति पर कर कतई नहीं होना चाहिए। व्यापार पर टैक्स तो समझ में आता है लेकिन धर्म पर टैक्स आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि, देव प्रतिमाओं की खरीद मुख्यत: दान के धन से होती है जो कि सामाजिक समुदायों के योगदान से एकत्र होता है। ऐसे में इस पर टैक्स लेना उचित नहीं है।
विज्ञापन
मूर्तियां बनाने वाली श्री आदि गौड़ ब्राह्मण मूर्ति कलाकार संस्था के अध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने भी देव प्रतिमाओं पर कर को चिंतनीय बताते हुए कहा कि हाल ही में लगे जीएसटी से समस्त मूर्तिकार चिंतित हैं तथा उनकी रोजी रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
ऐसे में मूर्तियों को करमुक्त रखना चाहिए। बैठक में मौजूद महंत माधवदास, महंत रामचंद्रदास, महंत दिनेश दास, महंत अशोक दास, महंत रामकृपाल दास, संतरामदास, आचार्य रामदेवदास शास्त्री सहित अन्य ने केंद्र सरकार से तत्काल देव प्रतिमाओं को टैक्स मुक्त करने की मांग की।