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84 फीसदी मतदान कर दिव्यांगों ने रच दिया इतिहास
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जिले के लोकसभा चुनाव का नया रिकार्ड
अयोध्या। ठीक ही कहा गया है कि इनके अंदर कोई एक विशेष गुण होता है, जिसके लिए इन्हें दिव्यांग जैसा मर्यादापूर्ण नया शब्द दिया गया। लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों के इसी विशेष गुण का उभार सतह पर आया तो उन्होंने फैजाबाद संसदीय क्षेत्र के इतिहास में नया रिकार्ड बना दिया।
जिले के 84 फीसदी दिव्यांगों ने मतदान करके नया इतिहास रच डाला। ऐसा शायद पहली बार हुआ है। नए इतिहास के पीछे दिव्यागों की मेहनत के साथ प्रशासन की व्यूह रचना भी काम आई। दिव्यागों से बनाई गई नई लकीर से मतदान प्रतिशत बढ़ाने की नई राह खुल सकती है।
अतीत के चुनाव मेें अलग से दिव्यांग मतदाताओं पर कोई फोकस नहीं होता था। निर्वाचन से जुड़े लोगों का कहना है कि न ही इनकी अलग से कोई गिनती होती थी। आम मतदाताओं की तरह यह भी मतदान में हिस्सा लेते थे। लेकिन, इनका वोट प्रतिशत सामान्य औसत से कम होता रहा है।
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कम ही दिव्यांग बूथ पर पहुंचकर वोट डालते थे। ऐसा निर्वाचन विभाग का मानना है लेकिन इस बार इनके दिव्य गुण की याद दिलाई गई तो बिना रुके बिना थके सबको पीछे छोड़ दिया। नए रिकार्ड की ओर आगे बढ़ गए। इसके पीछे इनके जज्बे के साथ स्वीप का अहम योगदान रहा।
सीडीओ अभिषेक आनंद के नेतृत्व में जिले के सभी दिव्यांगों को चिह्नित करके उनसे संकल्प पत्र भरवाए गए। ब्लॉक वार इनके साथ अफसरों ने बैठके करके वोट डालने के लिए प्रेरित किया। गांवों मेें तैनात रोजगार सेवकों को इनके वोट डालने की मानीटरिंग और सहयोग का निर्देश दिया गया तो इनमें भी लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने का उल्लास भर गया और दिव्यांगों ने मतदान की नई कहानी गढ़ डाली।
दिव्यागों का यह रिकार्ड और भी ऊंचाई को छू सकता था यदि नगर निगम प्रशासन ने भी उतनी ही रुचि दिखाई होती जितनी प्रशासन और विकास विभाग के साथ ग्रामीण कर्मियों ने दिलचस्पी दिखाई। ग्रामीण क्षेत्र में दिव्यांगों के मतदान का औसत 87.77 रहा तो नगर निगम क्षेत्र में यह 42.64 पर सिमट गया। इसीलिए जिले का औसत भी 83.73 पर सिमट गया।
प्रेरित कर कराया मतदान
स्वीप के तहत दिव्यांग मतदाताओं को चिह्नित कर उनके साथ बैठकर उनको मतदान के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही गांव के रोजगार सेवकों को इनके सहयोग के लिए लगाया गया। जिले के 84 फीसदी दिव्यांगों ने मतदान किया।
- नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी
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अयोध्या। ठीक ही कहा गया है कि इनके अंदर कोई एक विशेष गुण होता है, जिसके लिए इन्हें दिव्यांग जैसा मर्यादापूर्ण नया शब्द दिया गया। लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों के इसी विशेष गुण का उभार सतह पर आया तो उन्होंने फैजाबाद संसदीय क्षेत्र के इतिहास में नया रिकार्ड बना दिया।
जिले के 84 फीसदी दिव्यांगों ने मतदान करके नया इतिहास रच डाला। ऐसा शायद पहली बार हुआ है। नए इतिहास के पीछे दिव्यागों की मेहनत के साथ प्रशासन की व्यूह रचना भी काम आई। दिव्यागों से बनाई गई नई लकीर से मतदान प्रतिशत बढ़ाने की नई राह खुल सकती है।
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अतीत के चुनाव मेें अलग से दिव्यांग मतदाताओं पर कोई फोकस नहीं होता था। निर्वाचन से जुड़े लोगों का कहना है कि न ही इनकी अलग से कोई गिनती होती थी। आम मतदाताओं की तरह यह भी मतदान में हिस्सा लेते थे। लेकिन, इनका वोट प्रतिशत सामान्य औसत से कम होता रहा है।
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कम ही दिव्यांग बूथ पर पहुंचकर वोट डालते थे। ऐसा निर्वाचन विभाग का मानना है लेकिन इस बार इनके दिव्य गुण की याद दिलाई गई तो बिना रुके बिना थके सबको पीछे छोड़ दिया। नए रिकार्ड की ओर आगे बढ़ गए। इसके पीछे इनके जज्बे के साथ स्वीप का अहम योगदान रहा।
सीडीओ अभिषेक आनंद के नेतृत्व में जिले के सभी दिव्यांगों को चिह्नित करके उनसे संकल्प पत्र भरवाए गए। ब्लॉक वार इनके साथ अफसरों ने बैठके करके वोट डालने के लिए प्रेरित किया। गांवों मेें तैनात रोजगार सेवकों को इनके वोट डालने की मानीटरिंग और सहयोग का निर्देश दिया गया तो इनमें भी लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने का उल्लास भर गया और दिव्यांगों ने मतदान की नई कहानी गढ़ डाली।
दिव्यागों का यह रिकार्ड और भी ऊंचाई को छू सकता था यदि नगर निगम प्रशासन ने भी उतनी ही रुचि दिखाई होती जितनी प्रशासन और विकास विभाग के साथ ग्रामीण कर्मियों ने दिलचस्पी दिखाई। ग्रामीण क्षेत्र में दिव्यांगों के मतदान का औसत 87.77 रहा तो नगर निगम क्षेत्र में यह 42.64 पर सिमट गया। इसीलिए जिले का औसत भी 83.73 पर सिमट गया।
प्रेरित कर कराया मतदान
स्वीप के तहत दिव्यांग मतदाताओं को चिह्नित कर उनके साथ बैठकर उनको मतदान के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही गांव के रोजगार सेवकों को इनके सहयोग के लिए लगाया गया। जिले के 84 फीसदी दिव्यांगों ने मतदान किया।
- नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी