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मन लागो मेरो यार फकीरी में..
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सुप्रसिद्ध सूफी गायक व पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. भारती बंधु की जादुई आवाज ने बांधा समा
अयोध्या। मन लागो मेरो यार फकीरी में..., सुनोगे तो साधोगे और साधोगे तो साधु कहलाओगे... प्रसिद्ध सूफी गायक व पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. भारती बंधु की जादुई आवाज ने समा बांध दिया।
अवसर था डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में स्पीक मैके की ओर से आयोजित कार्यक्रम का। डॉ. भारती ने कहा कि मैं मोहब्बत का पैगाम लेकर माता कौशल्या की भूमि से श्रीराम की जन्म भूमि अयोध्या आया हूं।
उन्होंने सूफी गायन में नवीन गायन के तौर तरीकों पर तंज कसते हुए कहा कि सूफियाना में इश्क को खुदा कहा गया हैं और इन्होंने उसे गिराने का काम किया है। डॉ. भारती बंधु की अगली प्रस्तुति दमादम मस्त कलंदर रही, जिसे सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए।
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कार्यक्रम की आखिरी प्रस्तुति श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाय की रही। इस मन मोहक व दिव्य प्रस्तुति से श्रोता अभिभूत हो उठे।
कार्यक्रम की समाप्ति पर मानवीय संवेदना पर व्यंग्य कसते हुए डॉ. भारती ने कहा कि भला मैं मुस्कुरा रहा हूं फकीर होकर, वह तो मुस्कुरा भी नहीं सकते अमीर होकर। साथ ही कबीर के प्रेम, कृष्ण के कर्तव्य प्रेम व सूफियाना इश्क को बखूबी प्रस्तुत किया।
जिससे हम कह सकते हैं कि प्रेम ही शाश्वत सत्य और प्रेम ही ईश्वर है। कबीर की वाणी में मोहब्बत, इंसान की संवेदना, वात्सल्य, व्यक्तित्व, वर्तमान परिवेश को अपने गायन में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. एसएन शुक्ला ने शानदार प्रस्तुति के लिए स्पिक मैके व पुरातन छात्रसभा के सदस्यों को बधाई दी। अतिथियों का स्वागत माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. शैलेंद्र कुमार ने किया।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह, प्रो. आरके तिवारी, प्रो. एसके गर्ग, डॉ. आरके सिंह, शिवेंद्र सिंह व नूपुर आदि मौजूद रहे।
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अयोध्या। मन लागो मेरो यार फकीरी में..., सुनोगे तो साधोगे और साधोगे तो साधु कहलाओगे... प्रसिद्ध सूफी गायक व पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. भारती बंधु की जादुई आवाज ने समा बांध दिया।
अवसर था डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में स्पीक मैके की ओर से आयोजित कार्यक्रम का। डॉ. भारती ने कहा कि मैं मोहब्बत का पैगाम लेकर माता कौशल्या की भूमि से श्रीराम की जन्म भूमि अयोध्या आया हूं।
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उन्होंने सूफी गायन में नवीन गायन के तौर तरीकों पर तंज कसते हुए कहा कि सूफियाना में इश्क को खुदा कहा गया हैं और इन्होंने उसे गिराने का काम किया है। डॉ. भारती बंधु की अगली प्रस्तुति दमादम मस्त कलंदर रही, जिसे सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए।
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कार्यक्रम की आखिरी प्रस्तुति श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाय की रही। इस मन मोहक व दिव्य प्रस्तुति से श्रोता अभिभूत हो उठे।
कार्यक्रम की समाप्ति पर मानवीय संवेदना पर व्यंग्य कसते हुए डॉ. भारती ने कहा कि भला मैं मुस्कुरा रहा हूं फकीर होकर, वह तो मुस्कुरा भी नहीं सकते अमीर होकर। साथ ही कबीर के प्रेम, कृष्ण के कर्तव्य प्रेम व सूफियाना इश्क को बखूबी प्रस्तुत किया।
जिससे हम कह सकते हैं कि प्रेम ही शाश्वत सत्य और प्रेम ही ईश्वर है। कबीर की वाणी में मोहब्बत, इंसान की संवेदना, वात्सल्य, व्यक्तित्व, वर्तमान परिवेश को अपने गायन में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. एसएन शुक्ला ने शानदार प्रस्तुति के लिए स्पिक मैके व पुरातन छात्रसभा के सदस्यों को बधाई दी। अतिथियों का स्वागत माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. शैलेंद्र कुमार ने किया।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह, प्रो. आरके तिवारी, प्रो. एसके गर्ग, डॉ. आरके सिंह, शिवेंद्र सिंह व नूपुर आदि मौजूद रहे।