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अयोध्या में अस्तित्व खो रहे अधिकांश पौराणिक कुंड

Wed, 13 Dec 2017 10:33 PM IST
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:33 PM IST
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अयोध्या में अस्तित्व खो रहे अधिकांश पौराणिक कुंड
अयोध्या। अयोध्या के पौराणिक महत्व वाले कुंड बदहाल हैं। अधिकतर अस्तित्व खोने की कगार पर हैं, जबकि भूमाफिया कुंडों के किनारे की जमीनों को समतल कर बेच रहे हैं।
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इसके कारण अयोध्या के ये पौराणिक स्थल अब इतिहास बनते जा रहे हैं। रुक्मिणी कुंड, सुग्रीव कुंड, सप्तसागर, दुरभसर कुंड, उर्वशी कुंड, कौशल्या कुंड, क्षीरसागर आदि कुंडों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।
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रामायण सर्किट योजना से अयोध्या के कायाकल्प की तैयारी के बीच पौराणिक महत्ता के द्योतक प्राचीन कुंड व जलाशयों का अस्तित्व मिटने की कगार पर पहुंच गया है।
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नगर निगम, सरयू की निर्मलता, अविरलता की कार्ययोजना, राम की पैड़ी के सौंदर्यीकरण, सरयू घाटों का विस्तार सहित अन्य योजनाओं पर शीघ्र काम शुरू होने वाला है।

योगी सरकार ने अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन करने के साथ ही 133 करोड़ रुपये की योजनाओं का एलान भी किया। इससे रामनगरी के विकास की उम्मीद तो प्रबल हुई मगर रामनगरी की पौराणिकता बयां करने वाले प्राचीन कुंडों तक विकास की ये धार अभी तक नहीं पहुंच सकी है।

अयोध्या के पौराणिक रुक्मिणी कुंड, सुग्रीव कुंड, सप्तसागर, दुरभसर कुंड, उर्वशी कुंड, कौशल्या कुंड, क्षीरसागर जैसे कुंडों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।

वहीं, खजुआ कुंड, विद्या कुंड, बृहस्पति कुंड, मनमुनि कुंड और अग्नि कुंड सौंदर्यीकरण के अभाव में अपनी पहचान खो रहे हैं। मनमुनि कुंड व अग्नि कुंड तो पूरी तरह से सूख चुके हैं।

विद्या कुंड में भी पानी कम होने से जलीय जीव-जंतुओं की मौत हो रही है। कुछ दिनों पहले सांसद की पहल पर नगर निगम ने कुंड में पानी भरवाया मगर अब पुन: कुंड की स्थिति बदहाल है।

खजुहा कुंड जिसके बारे में मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से खुजली जैसे चर्मरोग दूर होते हैं, अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वहीं, सप्तसागर कुंड को भूमाफियाओं ने पाटकर कॉलोनी बना दी है। जबकि क्षीरसागर कुंड पर भी भूमाफियाओं की नजर है।

145 पौराणिक स्थलों की तय हुई थी सीमाएं
सन 1905 में बने फैजाबाद गजेटियर के अनुसार एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने नगरी के ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल सहेजने की पहल की थी।

1902 में अयोध्या के 145 मठ-मंदिरों, कुंडों, सागरों व अन्य पौराणिक स्थलों पर एडवर्ड के नाम के शिलापट लगवाए गए थे। अयोध्या शोध संस्थान ने भी अपनी शासकीय पत्रिका साक्षी में नगर में 26 कुंडों का उल्लेख किया है।

संरक्षण की मांग
कुंडों के संरक्षण की मुहिम चलाने वाली एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा ने रामनगरी के पौराणिक कुंडों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की मांग उठाई है। कुछ दिनों पूर्व विवेचनी सभा द्वारा श्रमदान कर सीताकुंड, खजुआ कुंड आदि की सफाई भी कराई गई थी।

सभा के अध्यक्ष अधिकारी राजकुमार दास कहते हैं कि, कुंडों के संरक्षण को लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है। सरकार की विकास योजनाओं में पौराणिक कुंड भी शामिल होंगे।

महामंत्री पुजारी रामदास कहते हैं कि, अयोध्या का विकास त्रेताकालीन पहचान को ध्यान में रखकर किया जाना है। कुंड व सरोवर अयोध्या की पौराणिकता के द्योतक हैं और इनका संरक्षण व सौंदर्यीकरण आवश्यक है।

कुंडों को अतिक्रमण से मुक्त कराएंगे
रामनगरी के पौराणिक स्थलों, कुंडों, सरोवरों का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल विकसित करने के लिए केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार प्रतिबद्ध है। शीघ्र ही विभिन्न योजनाओं पर काम शुरू होने जा रहा है, कुंडों को अतिक्रमण से मुक्त भी कराया जाएगा।

वेदप्रकाश गुप्ता, नगर विधायक अयोध्या

शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
रामनगरी के पौराणिक कुंडों पर अवैध कब्जे की शिकायत नहीं मिली है। कुंडों के संरक्षण को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। कब्जे की शिकायत आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार, रेजीडेंट मजिस्ट्रेट
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