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आरएसएस के पूर्व विभाग प्रचारक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:07 AM IST
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आरएसएस के पूर्व विभाग प्रचारक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश
फैजाबाद। आरएसएस के पूर्व विभाग प्रचारक राम दयाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश हुआ है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय अविनाश चंद्र गौतम की कोर्ट से हुआ।
अधिवक्ता विवेक सिंह ने बताया कि राम जन्मभूमि थाने के संतोषी अखाड़ा के सर्वराहकार महंत राम स्वरूपदास ने कोर्ट में अर्जी दी थी। उसमें आरोप लगाया था कि उनके मंदिर में राम दयाल सिंह किराएदार हैं।
वह कई माह से किराया नहीं दिए। जब उसने किराया मांगा तो उन्होंने बताया कि पूर्व महंत ने उन्हें पट्टा कर दिया है। इसके आधार पर उनका नाम नगरपालिका अभिलेखों में दर्ज हो गया है।
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राम स्वरूपदास ने नगरपालिका में इसकी तहकीकात की तो राम दयाल का नाम दर्ज पाया गया। जब नगरपालिका में पट्टा देखा तो उस पट्टे पर और महंत के पास मौजूद कागजातों पर पूर्व महंत वैदेहीदास के हस्ताक्षर अलग अलग हैं।
राम दयाल ने यह पट्टा कूटरचित ढ़ंग से तैयार करके उस पर वैैदेही दास का फर्जी हस्ताक्षर कर मंदिर हड़पने के लिए उसके आधार पर अपना नाम दर्ज करवा लिया।
जानकारी होने के बाद महंत राम स्वरूपदास ने इसकी रिपोर्ट के लिए अर्जी थाने पर दी। सुनवाई न होने पर एसएसपी की कोर्ट में दी। अंत में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने एसओ रामजन्मभूमि को मामले में पिोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश दिया।
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फैजाबाद। आरएसएस के पूर्व विभाग प्रचारक राम दयाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश हुआ है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय अविनाश चंद्र गौतम की कोर्ट से हुआ।
अधिवक्ता विवेक सिंह ने बताया कि राम जन्मभूमि थाने के संतोषी अखाड़ा के सर्वराहकार महंत राम स्वरूपदास ने कोर्ट में अर्जी दी थी। उसमें आरोप लगाया था कि उनके मंदिर में राम दयाल सिंह किराएदार हैं।
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वह कई माह से किराया नहीं दिए। जब उसने किराया मांगा तो उन्होंने बताया कि पूर्व महंत ने उन्हें पट्टा कर दिया है। इसके आधार पर उनका नाम नगरपालिका अभिलेखों में दर्ज हो गया है।
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राम स्वरूपदास ने नगरपालिका में इसकी तहकीकात की तो राम दयाल का नाम दर्ज पाया गया। जब नगरपालिका में पट्टा देखा तो उस पट्टे पर और महंत के पास मौजूद कागजातों पर पूर्व महंत वैदेहीदास के हस्ताक्षर अलग अलग हैं।
राम दयाल ने यह पट्टा कूटरचित ढ़ंग से तैयार करके उस पर वैैदेही दास का फर्जी हस्ताक्षर कर मंदिर हड़पने के लिए उसके आधार पर अपना नाम दर्ज करवा लिया।
जानकारी होने के बाद महंत राम स्वरूपदास ने इसकी रिपोर्ट के लिए अर्जी थाने पर दी। सुनवाई न होने पर एसएसपी की कोर्ट में दी। अंत में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने एसओ रामजन्मभूमि को मामले में पिोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश दिया।