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जिला अस्पताल अब होगा राजकीय मेडिकल कॉलेज
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:32 AM IST
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जिला अस्पताल बनेगा मेडिकल कॉलेज
- वर्ष 2018-19 में इसे देना होगा मूर्त रूप, प्रदेश सरकार के बजट में हुआ एलान
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। उप्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए बजट में स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि से जिले को बड़ी सौगात मिली है। सरकार ने अपने बजट में प्रदेश के चार जिलों के जिला अस्पतालों को राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाने का एलान किया है। इसमें फैजाबाद का जिला अस्पताल भी शामिल है। बजट घोषणा के अनुसार वर्ष 2018-19 में इसे मूर्त रूप भी दे दिया जाएगा।
अब गंभीर मामलों में फैजाबाद समेत आसपास के जिले के लोगों को भी लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कई रोगों के आधुनिक और बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है। उप्र सरकार के शुक्रवार को पेश हुए बजट में इस महत्वपूर्ण योजना को हरी झंडी मिल गई है। इसके लिए प्रदेश के चार जिले चुने गए हैं और कुल 500 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसका निर्माण कार्य 2018-19 में पूर्ण किया जाएगा। गंजा में 189 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं की कक्षाएं चलेंगी जबकि विद्यार्थी मेडिकल की बारीकियां जिला अस्पताल से ही सीखेंगे। इसके लिए दो माह पूर्व एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का दौरा कर शासन को प्रस्ताव भी भेजा था। अब सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने पर धन आवंटित होते ही इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
एक होगा जिला व महिला अस्पताल
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जिला अस्पताल के 212 बेड व महिला अस्पताल के 186 बेड को मिलाकर संयुक्त रूप से 500 बेड का विस्तार दिया जाएगा। महिला अस्पताल को विशेष रूप से गायनी व पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट बनाया जाएगा। शेष आर्थोपेडिक, फिजीशियन, सर्जरी, हृदय, ईएनटी आदि सेवाएं जिला अस्पताल की ओर संचालित की जाएंगी। मेडिकल कॉलेज के प्रथम सत्र में 30 से 50 सीट निर्धारित करने पर एमसीआई की टीम ने विचार किया है, इसके बाद सीटें भी बढ़ाई जाएंगी।
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इमारतों में होंगे फेरबदल
मेडिकल कॉलेज बनाने से दोनों अस्पतालों की इमारतों में भी मानक के अनुसार कई फेरबदल किए जाने हैं। दो माह पूर्व डॉ. प्रसाद के नेतृत्व में एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी व प्रभारी डॉ. पीके सिंह, प्रोफेसर सुजीत राय ने भौतिक निरीक्षण कर मौजूद संसाधनों के साथ-साथ संभावित फेरबदल व नवीन संसाधनों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। सरकार से बजट की आस में यह कवायद रुकी हुई थी, जिसमें अब तेजी आने के आसार दिखने लगे हैं। जिला महिला अस्पताल में बन रहे 100 बेड के मैटरनिटी विंग्स को भी इसी उद्देश्य से शीघ्रता से अंतिम रूप दिया जा रहा है। यहां इमारत खड़ी हो चुकी है। साज-सज्जा के कार्य हो रहे हैं। सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल के औषधि भंडार, पुराने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय व चिकित्सकों के आवास तक नई मल्टी स्टोरी इमारत खड़ी की जाएगी। जिसमें भूतल में पार्किंग बनाई जाएगी। महिला अस्पताल के निकट बने पंपिंग सेट के पास नर्सिंग हॉस्टल बनाया जाएगा। आरडीसी की बिल्डिंग के बगल लेक्चर थिएटर बनेगा।
मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने को 10 डॉक्टरों ने दी सहमति
मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं देने के लिए जिला अस्पताल के एमएस व एमडी की डिग्री वाले 10 चिकित्सकों ने सहमति भी जताई है। जिसमें अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव समेत तीन सर्जन, दो मेडिसिन, दो ईएनटी के चिकित्सक आदि शामिल हैं। सीएमएस ने बताया कि प्रस्ताव की मंजूरी के बाद अब स्टीमेट आदि बनाकर कार्य शुरू कराया जाएगा।
ई-हॉस्पिटल बनाने को लेकर निर्माण कार्य तेज
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की मंशा से ही पूर्व में उठा-पटक शुरू हो चुकी है। जिला अस्पताल को करीब 37 लाख की लागत से ई-हास्पिटल बनाने की कवायद पहले से जारी है। इसी के तहत अस्पताल की भर्ती पंजिका को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की भर्ती पंजिका मेडिकल कॉलेज के फार्मेट पर 27 पेज की बनाई गई है। अस्पताल में मरीजों का पर्चा कम्प्यूटराइज बनाया जाएगा। इसके लिए छह काउंटर भी खोले जाएंगे। मरीजों की भर्ती होने से लेकर दवाओं, जांच, डॉक्टर की उपलब्धता आदि स्थितियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल की स्थिति
वर्तमान समय में जिला अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों के लिए कुछ खास नहीं है। संसाधनों के साथ-साथ स्टाफ का भी अभाव है। इस वजह से गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। सीटी स्कैन मशीन यहां चार माह से खराब है, डिजिटल एक्स-रे मशीन शासन से मिल चुकी है, लेकिन प्रिंटर न मिलने से इसका भी सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। हेड इंजरी आदि मामलों का इलाज यहां लंबे समय से संभव नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ न होने व संसाधनों का टोटा होने से हृदय रोगियों का इलाज यहां न के बराबर है। इसी तरह इलाज के हर पटल पर ये अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज बनने से समस्त उच्चीकृत सुविधाएं मिलने लगेंगी और मरीजों को दर-दर भटकने से निजात मिलेगी।
मिलेंगी ये सुविधाएं
गंभीर स्थिति में मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इस समस्या से लोगों को निजात मिलेगी तथा बेहतर उपचार जिले में ही मिल सकेगा। जिले में चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा होगा तथा नवीन उपकरणों से उचित जांच हो सकेगी। इतना ही नहीं, गंभीर रोगों का भी उपचार यहीं होगा। मेडिकल कॉलेज बनने से जिले की आर्थिक प्रगति होगी तथा रोजगार के नए आयाम युवाओं को मिलेंगे।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए पूर्व में ही प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अब बजट पास होने पर शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू होगा। मेडिकल कॉलेज की क्लीनिकल कक्षाएं जिला अस्पताल परिसर में संचालित की जाएंगी। साथ ही मरीजों को जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा। धन अवमुक्त होते ही दोनों अस्पतालों को एक करके 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। -डॉ. पीके सिंह, प्रभारी अधिकारी मेडिकल कॉलेज
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- वर्ष 2018-19 में इसे देना होगा मूर्त रूप, प्रदेश सरकार के बजट में हुआ एलान
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। उप्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए बजट में स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि से जिले को बड़ी सौगात मिली है। सरकार ने अपने बजट में प्रदेश के चार जिलों के जिला अस्पतालों को राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाने का एलान किया है। इसमें फैजाबाद का जिला अस्पताल भी शामिल है। बजट घोषणा के अनुसार वर्ष 2018-19 में इसे मूर्त रूप भी दे दिया जाएगा।
अब गंभीर मामलों में फैजाबाद समेत आसपास के जिले के लोगों को भी लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कई रोगों के आधुनिक और बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है। उप्र सरकार के शुक्रवार को पेश हुए बजट में इस महत्वपूर्ण योजना को हरी झंडी मिल गई है। इसके लिए प्रदेश के चार जिले चुने गए हैं और कुल 500 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसका निर्माण कार्य 2018-19 में पूर्ण किया जाएगा। गंजा में 189 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में छात्र-छात्राओं की कक्षाएं चलेंगी जबकि विद्यार्थी मेडिकल की बारीकियां जिला अस्पताल से ही सीखेंगे। इसके लिए दो माह पूर्व एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का दौरा कर शासन को प्रस्ताव भी भेजा था। अब सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने पर धन आवंटित होते ही इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जिला अस्पताल के 212 बेड व महिला अस्पताल के 186 बेड को मिलाकर संयुक्त रूप से 500 बेड का विस्तार दिया जाएगा। महिला अस्पताल को विशेष रूप से गायनी व पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट बनाया जाएगा। शेष आर्थोपेडिक, फिजीशियन, सर्जरी, हृदय, ईएनटी आदि सेवाएं जिला अस्पताल की ओर संचालित की जाएंगी। मेडिकल कॉलेज के प्रथम सत्र में 30 से 50 सीट निर्धारित करने पर एमसीआई की टीम ने विचार किया है, इसके बाद सीटें भी बढ़ाई जाएंगी।
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मेडिकल कॉलेज बनाने से दोनों अस्पतालों की इमारतों में भी मानक के अनुसार कई फेरबदल किए जाने हैं। दो माह पूर्व डॉ. प्रसाद के नेतृत्व में एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी व प्रभारी डॉ. पीके सिंह, प्रोफेसर सुजीत राय ने भौतिक निरीक्षण कर मौजूद संसाधनों के साथ-साथ संभावित फेरबदल व नवीन संसाधनों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। सरकार से बजट की आस में यह कवायद रुकी हुई थी, जिसमें अब तेजी आने के आसार दिखने लगे हैं। जिला महिला अस्पताल में बन रहे 100 बेड के मैटरनिटी विंग्स को भी इसी उद्देश्य से शीघ्रता से अंतिम रूप दिया जा रहा है। यहां इमारत खड़ी हो चुकी है। साज-सज्जा के कार्य हो रहे हैं। सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल के औषधि भंडार, पुराने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय व चिकित्सकों के आवास तक नई मल्टी स्टोरी इमारत खड़ी की जाएगी। जिसमें भूतल में पार्किंग बनाई जाएगी। महिला अस्पताल के निकट बने पंपिंग सेट के पास नर्सिंग हॉस्टल बनाया जाएगा। आरडीसी की बिल्डिंग के बगल लेक्चर थिएटर बनेगा।
मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने को 10 डॉक्टरों ने दी सहमति
मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं देने के लिए जिला अस्पताल के एमएस व एमडी की डिग्री वाले 10 चिकित्सकों ने सहमति भी जताई है। जिसमें अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव समेत तीन सर्जन, दो मेडिसिन, दो ईएनटी के चिकित्सक आदि शामिल हैं। सीएमएस ने बताया कि प्रस्ताव की मंजूरी के बाद अब स्टीमेट आदि बनाकर कार्य शुरू कराया जाएगा।
ई-हॉस्पिटल बनाने को लेकर निर्माण कार्य तेज
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की मंशा से ही पूर्व में उठा-पटक शुरू हो चुकी है। जिला अस्पताल को करीब 37 लाख की लागत से ई-हास्पिटल बनाने की कवायद पहले से जारी है। इसी के तहत अस्पताल की भर्ती पंजिका को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की भर्ती पंजिका मेडिकल कॉलेज के फार्मेट पर 27 पेज की बनाई गई है। अस्पताल में मरीजों का पर्चा कम्प्यूटराइज बनाया जाएगा। इसके लिए छह काउंटर भी खोले जाएंगे। मरीजों की भर्ती होने से लेकर दवाओं, जांच, डॉक्टर की उपलब्धता आदि स्थितियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल की स्थिति
वर्तमान समय में जिला अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों के लिए कुछ खास नहीं है। संसाधनों के साथ-साथ स्टाफ का भी अभाव है। इस वजह से गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। सीटी स्कैन मशीन यहां चार माह से खराब है, डिजिटल एक्स-रे मशीन शासन से मिल चुकी है, लेकिन प्रिंटर न मिलने से इसका भी सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। हेड इंजरी आदि मामलों का इलाज यहां लंबे समय से संभव नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ न होने व संसाधनों का टोटा होने से हृदय रोगियों का इलाज यहां न के बराबर है। इसी तरह इलाज के हर पटल पर ये अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज बनने से समस्त उच्चीकृत सुविधाएं मिलने लगेंगी और मरीजों को दर-दर भटकने से निजात मिलेगी।
मिलेंगी ये सुविधाएं
गंभीर स्थिति में मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इस समस्या से लोगों को निजात मिलेगी तथा बेहतर उपचार जिले में ही मिल सकेगा। जिले में चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा होगा तथा नवीन उपकरणों से उचित जांच हो सकेगी। इतना ही नहीं, गंभीर रोगों का भी उपचार यहीं होगा। मेडिकल कॉलेज बनने से जिले की आर्थिक प्रगति होगी तथा रोजगार के नए आयाम युवाओं को मिलेंगे।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए पूर्व में ही प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अब बजट पास होने पर शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू होगा। मेडिकल कॉलेज की क्लीनिकल कक्षाएं जिला अस्पताल परिसर में संचालित की जाएंगी। साथ ही मरीजों को जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा। धन अवमुक्त होते ही दोनों अस्पतालों को एक करके 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। -डॉ. पीके सिंह, प्रभारी अधिकारी मेडिकल कॉलेज