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किसानों, युवाओं, बुजुर्गों और गरीबों की जेब में आई उम्मीदें
Updated Thu, 01 Feb 2018 10:48 PM IST
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चार लाख किसान परिवारों में जगी उम्मीद
फैजाबाद। चुनावी साल में जिस बजट का इंतजार था, बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री की वैसी कोशिश भी दिखी है। हर वर्ग को लुभाने का प्रयास हुआ। खासकर चार लाख किसान परिवारों समेत बुजुर्गों, युवाओं और गरीबों की जेब में ढेर सारी उम्मीदें आई हैं। 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा देने और आरोग्य सेंटर खोलने की घोषणा से लोगों में खास उत्साह है। लोगों का कहना है कि धन के अभाव में सही इलाज न होने से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। यही नहीं मंहगी चिकित्सा से परिवारों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ता हैं। हर जिले में स्कील सेंटर, बीएड के लिए नया कलेंडर, 70 लाख लोगों को रोजगार जैसे वादों से युवाओं में खुशी है। नर्सरी से कक्षा 12 तक एक नीति और शिक्षा के बेहतरी के लिए फोकस से अभिभावकों को परिवेश बदलने की उम्मीद हैं।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को पीएम मोदी के न्यू इंडिया का बजट पेश किया। इसे लेकर हर घर व प्रतिष्ठान में नफा-नुकसान की चर्चा शुरू हो गई है। अपने बजट भाषण में वे किसान, गरीब, युवा, गृहणी, उद्यमी सभी को खुश करते नजर आए। वित्तमंत्री जेटली ने किसानों को लागत मूल्य से 50 फीसदी ज्यादा देने की घोषणा की है। बजट में 50 करोड़ लोगों को पांच लाख कैश लेश मेडिकल सुविधा देकर मोदी सरकार ने सबसे बड़ा चुनावी दांव चला है। वरिष्ठ नागरिकों को डिपॉजिट राशि में राहत दी गई है। हालांकि घर सा सामान खरीदने वाली नौकरी पेशा महिलाएं व गृहणी कई सामानों की महंगाई गिनाती दिखीं। बजट से इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी महंगाई से सहमा दिखा। नौकरी पेशा को आयकर स्लैब न बढ़ने से निराशा मिली है।
फसल की लागत सही तय हो तो मिले लाभ
किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम इसी साल से देने की घोषणा से खुशी है, मगर इसके पालन में लागत की दरें कम बताने के चलन को किसान धोखा मानते हैं। किसान रामशंकर कहते हैं कि सरकार ने कृषि और किसानों पर जोर दिया है। हर जिले में फसल के हिसाब से क्लस्टर जोन बनाने से बाजार मिलेगा। मनीराम कहते हैं कि देश भर में 22 हजार कृषि बाजार का लाभ यहां भी मिले और फसल की सही लागत तय करके डेढ़ गुना दाम मिले तो सराहनीय है। मंशा राम कहते हैं कि फूड प्रॉसिसिंग इंडस्ट्री खोलने के एलान से भी उम्मीदें है। प्रेमदास कहते है कि किसान बदहाल है, सरकार की योजनाएं धरातल तक नहीं दिखतीं। रामसंवारे कहते हैं कि सड़ रहे आलू, प्याज और टमाटर के लिए ऑपरेशन ग्रीन के तहत धन की व्यवस्था सराहनीय है। अनिल कुमार ने कहा कि मछुआरों और पशुपालकों के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड देने से रोजगार के लिए ऋण आसान होगा।
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ की उम्मीद
सरकार का यह आम बजट बिखरा हुआ है। इससे रोजगार सृजन नहीं दिख रहा है। हालांकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ की उम्मीद है। स्वास्थ्य बीमा से किसानों से ज्यादा बीमा कंपनियों का फायदा होगा। कृषि क्षेत्र में हर बार वादे ही किए जाते हैं, इस बार भी वादा किया गया है। यह वास्तव में वजूद में आया तो किसानों को लाभ होगा। -प्रो. पीके सिन्हा, पूर्व कुलपति व अर्थशास्त्री, अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद
अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने वाला बजट
यह लुभावना बजट नहीं है न ही चुनाव की दृष्टि से निर्धारित प्रतीत हो रहा है। यह बजट अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने वाला है। मध्यमवर्ग के लोगों के लिए बजट में इनकम टैक्स सीमा पुरानी होने की वजह से कुछ खास नहीं है। 50 करोड़ किसानों को बीमा से निमभन वर्ग के लोगों को लाभ होगा। इसके अलावा सिंचाई, उर्वरक व कृषि क्षेत्र में अन्य अनुदान से किसानों को लाभ मिलेगा।-डॉ. विनोद श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
बजट में रखा गया सभी वर्गों का ध्यान
सरकार ने इस बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा है। इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेट टैक्स घटने से इंडस्ट्रियों की अधिकाधिक स्थापना होने से रोजगार अधिक मिलेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा की सीमा बढ़ने से गरीबों को इलाज के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। बजट में घरेलू महिलाओं व किसानों को अधिक महत्व दिया गया है। -चंद्रप्रकाश गुप्ता, नगर अध्यक्ष, उप्र उद्योग व्यापार मंडल फैजाबाद
सरकार का बजट निराशाजनक
सरकार का आम बजट निराशाजनक है। शिक्षा कर में वृद्धि करने से छात्र और नौजवानों पर और बोझ बढ़ेगा। इससे आसान और सस्ती शिक्षा की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। टैक्स की मार से रोजगार के क्षेत्र में भी कुछ खास बदलाव नहीं होगा। हर बार की तरह इस बार भी किसानों के साथ सिर्फ वादे ही किए गए हैं। हकीकत में कुछ होता है तो किसानों को फायदा होगा। -केके गुप्ता, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल
मध्यम वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं
इस बार का बजट किसानों, गरीबों व मजदूरों के नाम रहा है। किसानों के लिए जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है, तो गरीबों और मजदूरों के लिए स्वास्थ्य बीमा में बड़ा एलान हुआ है। लेकिन बजट से मध्यम वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ है। स्वास्थ्य, शिक्षा उपकर में बढ़ोत्तरी से करदाताओं को भी निराशा हाथ लगी है। -मनीष अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
बजट में बुजुर्गों को मिली राहत
आम बजट में बुजुर्गों को खासी राहत दी गई है। आम आदमी के लिए इस बजट में कुछ भी खास नहीं है। कोई नयी छूट नहीं दी गई। सेंस बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया जो कि, एक अतिरिक्त बोझ है। टैक्स लगाने से शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए यह बजट दुर्भाग्यपूर्ण है।-अनुज सिंघल, अधिवक्ता, इनकम टैक्स
सरकार ने दिया प्रोग्रेसिव बजट
यह बजट एक प्रोग्रेसिव बजट है। सरकार ने इसमें किसानों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा दी है। इस बजट से अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने में सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य बीमा की राशि बढ़ाने से गरीब व मजदूर वर्ग के लोगों इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उनका आसानी से समुचित इलाज हो सकेगा। -प्रो. प्रदीप खरे, प्राचार्य, साकेत महाविद्यालय, अयोध्या
कल्चरल कैपिटल को प्रोत्साहित करेगा बजट
यह बजट देश की कल्चरल कैपिटल को प्रोत्साहित करेगा। यानी अमीर व्यक्ति अपने बच्चे को वैश्विक स्तर के संस्थानों में ही पढ़ाएंगे। ब्लैक बोर्ड योजना को डिजिटल बोर्ड योजना से प्रतिस्थापित किया जाना, आज की मांग है। सरकार ने ग्रामीण समाजशास्त्र पर सैद्धांतिक प्रावधान तो किये, लेकिन योजनाओं का लाभ वास्तविक किसान तक पहुंचे, इस पर ध्यान नहीं दिया।-डॉ. मनोज छापड़िया, साकेत महाविद्यालय
नौकरी पेशा लोगों का ध्यान नहीं
सरकार का यह आम बजट गरीबों, मजदूरों और किसानों को समर्पित है। इसमें मध्यम वर्गीय लोगों के लिए कुछ नहीं है। हालांकि सरकार को इनकम टैक्स के मामले पर नौकरी पेशा लोगों का ध्यान रखना चाहिए था। जो नहीं रखा। यह बजट एक साधारण बजट है, क्योंकि सरकार को आयकर स्लैब को अधिक उदार बनाना चाहिए था। -डॉ. एसपी सिंह, चीफ प्रॉक्टर साकेत महाविद्यालय
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फैजाबाद। चुनावी साल में जिस बजट का इंतजार था, बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री की वैसी कोशिश भी दिखी है। हर वर्ग को लुभाने का प्रयास हुआ। खासकर चार लाख किसान परिवारों समेत बुजुर्गों, युवाओं और गरीबों की जेब में ढेर सारी उम्मीदें आई हैं। 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा देने और आरोग्य सेंटर खोलने की घोषणा से लोगों में खास उत्साह है। लोगों का कहना है कि धन के अभाव में सही इलाज न होने से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। यही नहीं मंहगी चिकित्सा से परिवारों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ता हैं। हर जिले में स्कील सेंटर, बीएड के लिए नया कलेंडर, 70 लाख लोगों को रोजगार जैसे वादों से युवाओं में खुशी है। नर्सरी से कक्षा 12 तक एक नीति और शिक्षा के बेहतरी के लिए फोकस से अभिभावकों को परिवेश बदलने की उम्मीद हैं।
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को पीएम मोदी के न्यू इंडिया का बजट पेश किया। इसे लेकर हर घर व प्रतिष्ठान में नफा-नुकसान की चर्चा शुरू हो गई है। अपने बजट भाषण में वे किसान, गरीब, युवा, गृहणी, उद्यमी सभी को खुश करते नजर आए। वित्तमंत्री जेटली ने किसानों को लागत मूल्य से 50 फीसदी ज्यादा देने की घोषणा की है। बजट में 50 करोड़ लोगों को पांच लाख कैश लेश मेडिकल सुविधा देकर मोदी सरकार ने सबसे बड़ा चुनावी दांव चला है। वरिष्ठ नागरिकों को डिपॉजिट राशि में राहत दी गई है। हालांकि घर सा सामान खरीदने वाली नौकरी पेशा महिलाएं व गृहणी कई सामानों की महंगाई गिनाती दिखीं। बजट से इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी महंगाई से सहमा दिखा। नौकरी पेशा को आयकर स्लैब न बढ़ने से निराशा मिली है।
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फसल की लागत सही तय हो तो मिले लाभ
किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम इसी साल से देने की घोषणा से खुशी है, मगर इसके पालन में लागत की दरें कम बताने के चलन को किसान धोखा मानते हैं। किसान रामशंकर कहते हैं कि सरकार ने कृषि और किसानों पर जोर दिया है। हर जिले में फसल के हिसाब से क्लस्टर जोन बनाने से बाजार मिलेगा। मनीराम कहते हैं कि देश भर में 22 हजार कृषि बाजार का लाभ यहां भी मिले और फसल की सही लागत तय करके डेढ़ गुना दाम मिले तो सराहनीय है। मंशा राम कहते हैं कि फूड प्रॉसिसिंग इंडस्ट्री खोलने के एलान से भी उम्मीदें है। प्रेमदास कहते है कि किसान बदहाल है, सरकार की योजनाएं धरातल तक नहीं दिखतीं। रामसंवारे कहते हैं कि सड़ रहे आलू, प्याज और टमाटर के लिए ऑपरेशन ग्रीन के तहत धन की व्यवस्था सराहनीय है। अनिल कुमार ने कहा कि मछुआरों और पशुपालकों के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड देने से रोजगार के लिए ऋण आसान होगा।
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ की उम्मीद
सरकार का यह आम बजट बिखरा हुआ है। इससे रोजगार सृजन नहीं दिख रहा है। हालांकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ की उम्मीद है। स्वास्थ्य बीमा से किसानों से ज्यादा बीमा कंपनियों का फायदा होगा। कृषि क्षेत्र में हर बार वादे ही किए जाते हैं, इस बार भी वादा किया गया है। यह वास्तव में वजूद में आया तो किसानों को लाभ होगा। -प्रो. पीके सिन्हा, पूर्व कुलपति व अर्थशास्त्री, अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद
अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने वाला बजट
यह लुभावना बजट नहीं है न ही चुनाव की दृष्टि से निर्धारित प्रतीत हो रहा है। यह बजट अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने वाला है। मध्यमवर्ग के लोगों के लिए बजट में इनकम टैक्स सीमा पुरानी होने की वजह से कुछ खास नहीं है। 50 करोड़ किसानों को बीमा से निमभन वर्ग के लोगों को लाभ होगा। इसके अलावा सिंचाई, उर्वरक व कृषि क्षेत्र में अन्य अनुदान से किसानों को लाभ मिलेगा।-डॉ. विनोद श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
बजट में रखा गया सभी वर्गों का ध्यान
सरकार ने इस बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा है। इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेट टैक्स घटने से इंडस्ट्रियों की अधिकाधिक स्थापना होने से रोजगार अधिक मिलेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा की सीमा बढ़ने से गरीबों को इलाज के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। बजट में घरेलू महिलाओं व किसानों को अधिक महत्व दिया गया है। -चंद्रप्रकाश गुप्ता, नगर अध्यक्ष, उप्र उद्योग व्यापार मंडल फैजाबाद
सरकार का बजट निराशाजनक
सरकार का आम बजट निराशाजनक है। शिक्षा कर में वृद्धि करने से छात्र और नौजवानों पर और बोझ बढ़ेगा। इससे आसान और सस्ती शिक्षा की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। टैक्स की मार से रोजगार के क्षेत्र में भी कुछ खास बदलाव नहीं होगा। हर बार की तरह इस बार भी किसानों के साथ सिर्फ वादे ही किए गए हैं। हकीकत में कुछ होता है तो किसानों को फायदा होगा। -केके गुप्ता, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल
मध्यम वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं
इस बार का बजट किसानों, गरीबों व मजदूरों के नाम रहा है। किसानों के लिए जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है, तो गरीबों और मजदूरों के लिए स्वास्थ्य बीमा में बड़ा एलान हुआ है। लेकिन बजट से मध्यम वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ है। स्वास्थ्य, शिक्षा उपकर में बढ़ोत्तरी से करदाताओं को भी निराशा हाथ लगी है। -मनीष अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
बजट में बुजुर्गों को मिली राहत
आम बजट में बुजुर्गों को खासी राहत दी गई है। आम आदमी के लिए इस बजट में कुछ भी खास नहीं है। कोई नयी छूट नहीं दी गई। सेंस बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया जो कि, एक अतिरिक्त बोझ है। टैक्स लगाने से शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए यह बजट दुर्भाग्यपूर्ण है।-अनुज सिंघल, अधिवक्ता, इनकम टैक्स
सरकार ने दिया प्रोग्रेसिव बजट
यह बजट एक प्रोग्रेसिव बजट है। सरकार ने इसमें किसानों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा दी है। इस बजट से अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने में सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य बीमा की राशि बढ़ाने से गरीब व मजदूर वर्ग के लोगों इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उनका आसानी से समुचित इलाज हो सकेगा। -प्रो. प्रदीप खरे, प्राचार्य, साकेत महाविद्यालय, अयोध्या
कल्चरल कैपिटल को प्रोत्साहित करेगा बजट
यह बजट देश की कल्चरल कैपिटल को प्रोत्साहित करेगा। यानी अमीर व्यक्ति अपने बच्चे को वैश्विक स्तर के संस्थानों में ही पढ़ाएंगे। ब्लैक बोर्ड योजना को डिजिटल बोर्ड योजना से प्रतिस्थापित किया जाना, आज की मांग है। सरकार ने ग्रामीण समाजशास्त्र पर सैद्धांतिक प्रावधान तो किये, लेकिन योजनाओं का लाभ वास्तविक किसान तक पहुंचे, इस पर ध्यान नहीं दिया।-डॉ. मनोज छापड़िया, साकेत महाविद्यालय
नौकरी पेशा लोगों का ध्यान नहीं
सरकार का यह आम बजट गरीबों, मजदूरों और किसानों को समर्पित है। इसमें मध्यम वर्गीय लोगों के लिए कुछ नहीं है। हालांकि सरकार को इनकम टैक्स के मामले पर नौकरी पेशा लोगों का ध्यान रखना चाहिए था। जो नहीं रखा। यह बजट एक साधारण बजट है, क्योंकि सरकार को आयकर स्लैब को अधिक उदार बनाना चाहिए था। -डॉ. एसपी सिंह, चीफ प्रॉक्टर साकेत महाविद्यालय