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अब ई-हॉस्पिटल बनेगा जिला महिला अस्पताल
Updated Mon, 07 May 2018 11:33 PM IST
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ई-हॉस्पिटल बनेगा जिला महिला अस्पताल
फैजाबाद। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को दिखाने के लिए अब लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। शीघ्र ही लोहिया अस्पताल की तर्ज पर जिला महिला अस्पताल को भी ई-हॉस्पिटल बनाया जाएगा। जल्द ही यहां आने वाले मरीजों को ऑनलाइन पर्चा, डॉक्टरों की जानकारी, दवाओं की स्थिति आदि सुविधाएं ऑनलाइन मिलेगी। प्रथम चरण में आईपीडी सेक्शन को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके तीन माह बाद ओपीडी सेवाएं भी ऑनलाइन होंगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में 38 अस्पतालों को ई-हॉस्पिटल योजना में शामिल किया गया है। जिसमें जिला महिला अस्पताल भी शामिल है। ई-हॉस्पिटल बनने के बाद यहां पंजीकरण से लेकर ओपीडी, इमरजेंसी, जांच व प्रसव आदि का ब्योरा ऑनलाइन होगा। इसके लिए अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्रथम चरण में अस्पताल की आईपीडी सेवाएं ऑनलाइन की जाएंगी। तीन माह के भीतर ई-हॉस्पिटल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। नेटवर्किंग के लिए बीएसएनएल की लैंडलाइन तैयार की जा रही है। नेटवर्किंग और डाटा फीडिंग की मॉनिटरिंग के लिए शासन स्तर पर एक निजी कंपनी से करार भी हो गया है। अस्पतालों को ऑनलाइन सुविधा के लिए इसे स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट से लिंक किया जायेगा। इसके साथ ही अस्पताल की सभी तरह की डिजिटल डाटा एकत्र किया जा रहा है।
क्या है ई-हॉस्पिटल परियोजना
इसमें आधार से लिंक होने पर मरीज के नाम से व आधार न होने पर मोबाइल नंबर से ऑनलाइन पंजीकरण होगा। हर मरीज की यूनिक आइडी बनेगी। पंजीकृत नए मरीज को अप्वाइंटमेंट के साथ साथ यूएचआइडी (एकमात्र स्वास्थ्य पहचान अंक) भी दिया जाएगा। ओपीडी और आईपीडी में किस मरीज का क्या इलाज किया गया, यह ऑनलाइन दर्ज होगा। अभी तक ये रिपोर्ट मैनुअल बनती है। डिस्चार्ज होने के बाद मरीज का डाटा वेबसाइट पर पंच किया जाएगा। हर सप्ताह कार्य की प्रगति भी उच्च अधिकारियों द्वारा देखी जाएगी और इसी आधार पर अस्पताल की रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। अच्छी प्रगति मिलने पर अस्पताल को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बजट भी मिलेगा, जबकि कमी होने पर जुर्माना भी किया जाएगा। आईपीडी के तीन माह बाद ओपीडी सेवाएं ऑनलाइन होंगी। अल्ट्रासाउंड व अन्य जांचों को ऑनलाइन किया जाएगा। भविष्य में मरीज घर बैठे पंजीकरण करा सकेगा। अपनी रिपोर्ट भी देख सकेगा। यह रिकॉर्ड महीनों तक सुरक्षित रहेगा। डॉक्टर की सलाह भी ऑनलाइन होगी। अस्पताल की ओपीडी विभाग में कौन डॉक्टर किस दिन और कब बैठते हैं, इसका भी पता चल सकेगा।
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करीब पांच लाख रुपये होंगे खर्च
महिला अस्पताल को ई-हॉस्पिटल बनाने के लिए करीब पांच लाख रुपये खर्च होंगे। हालांकि यह धनराशि अस्पताल प्रशासन को नहीं मिलेगी न ही यह कार्य ही अस्पताल को कराना है। शासन की ओर अधिकृत कंपनी द्वारा चार ऑपरेटर, चार सेट कंप्यूटर, प्रिंटर, फ्रिंगर प्रिंट रीडर, टेलीफोन की डेडीकेटेड लीज लाइन आदि स्थापित की जाएगी।
मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने व क्राइसिस को कम करने के लिए शीघ्र ही अस्पताल को ई-हॉस्पिटल का दर्जा दिया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से कंपनी भी नामित हो गई है। तीन माह के भीतर ऑनलाइन सेवाएं शुरू हो जाएंगी।- डॉ. श्रीकांत शुक्ला, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फैजाबाद
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फैजाबाद। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को दिखाने के लिए अब लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। शीघ्र ही लोहिया अस्पताल की तर्ज पर जिला महिला अस्पताल को भी ई-हॉस्पिटल बनाया जाएगा। जल्द ही यहां आने वाले मरीजों को ऑनलाइन पर्चा, डॉक्टरों की जानकारी, दवाओं की स्थिति आदि सुविधाएं ऑनलाइन मिलेगी। प्रथम चरण में आईपीडी सेक्शन को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके तीन माह बाद ओपीडी सेवाएं भी ऑनलाइन होंगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में 38 अस्पतालों को ई-हॉस्पिटल योजना में शामिल किया गया है। जिसमें जिला महिला अस्पताल भी शामिल है। ई-हॉस्पिटल बनने के बाद यहां पंजीकरण से लेकर ओपीडी, इमरजेंसी, जांच व प्रसव आदि का ब्योरा ऑनलाइन होगा। इसके लिए अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्रथम चरण में अस्पताल की आईपीडी सेवाएं ऑनलाइन की जाएंगी। तीन माह के भीतर ई-हॉस्पिटल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। नेटवर्किंग के लिए बीएसएनएल की लैंडलाइन तैयार की जा रही है। नेटवर्किंग और डाटा फीडिंग की मॉनिटरिंग के लिए शासन स्तर पर एक निजी कंपनी से करार भी हो गया है। अस्पतालों को ऑनलाइन सुविधा के लिए इसे स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट से लिंक किया जायेगा। इसके साथ ही अस्पताल की सभी तरह की डिजिटल डाटा एकत्र किया जा रहा है।
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क्या है ई-हॉस्पिटल परियोजना
इसमें आधार से लिंक होने पर मरीज के नाम से व आधार न होने पर मोबाइल नंबर से ऑनलाइन पंजीकरण होगा। हर मरीज की यूनिक आइडी बनेगी। पंजीकृत नए मरीज को अप्वाइंटमेंट के साथ साथ यूएचआइडी (एकमात्र स्वास्थ्य पहचान अंक) भी दिया जाएगा। ओपीडी और आईपीडी में किस मरीज का क्या इलाज किया गया, यह ऑनलाइन दर्ज होगा। अभी तक ये रिपोर्ट मैनुअल बनती है। डिस्चार्ज होने के बाद मरीज का डाटा वेबसाइट पर पंच किया जाएगा। हर सप्ताह कार्य की प्रगति भी उच्च अधिकारियों द्वारा देखी जाएगी और इसी आधार पर अस्पताल की रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। अच्छी प्रगति मिलने पर अस्पताल को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बजट भी मिलेगा, जबकि कमी होने पर जुर्माना भी किया जाएगा। आईपीडी के तीन माह बाद ओपीडी सेवाएं ऑनलाइन होंगी। अल्ट्रासाउंड व अन्य जांचों को ऑनलाइन किया जाएगा। भविष्य में मरीज घर बैठे पंजीकरण करा सकेगा। अपनी रिपोर्ट भी देख सकेगा। यह रिकॉर्ड महीनों तक सुरक्षित रहेगा। डॉक्टर की सलाह भी ऑनलाइन होगी। अस्पताल की ओपीडी विभाग में कौन डॉक्टर किस दिन और कब बैठते हैं, इसका भी पता चल सकेगा।
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करीब पांच लाख रुपये होंगे खर्च
महिला अस्पताल को ई-हॉस्पिटल बनाने के लिए करीब पांच लाख रुपये खर्च होंगे। हालांकि यह धनराशि अस्पताल प्रशासन को नहीं मिलेगी न ही यह कार्य ही अस्पताल को कराना है। शासन की ओर अधिकृत कंपनी द्वारा चार ऑपरेटर, चार सेट कंप्यूटर, प्रिंटर, फ्रिंगर प्रिंट रीडर, टेलीफोन की डेडीकेटेड लीज लाइन आदि स्थापित की जाएगी।
मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने व क्राइसिस को कम करने के लिए शीघ्र ही अस्पताल को ई-हॉस्पिटल का दर्जा दिया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से कंपनी भी नामित हो गई है। तीन माह के भीतर ऑनलाइन सेवाएं शुरू हो जाएंगी।- डॉ. श्रीकांत शुक्ला, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फैजाबाद